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    मौत से जूझ रहे ऋतिक रोशन के सुपर 30 हीरो आनंद कुमार, रूला देगी ज़िंदगी की असली कहानी

    By Staff
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    ऋतिक रोशन आनंद कुमार के जीवन पर बनी फिल्म सुपर 30 के साथ शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक दे रहे हैं लेकिन एक इंटरव्यू के दौरान, कल आनंद कुमार ने ऐसे राज़ पर से परदा उठाया कि सबके होश ही उड़ गए। इसी के साथ इस बात पर से भी परदा उठा कि आखिर आनंद कुमार की बायोपिक बनाई क्यों गई है और इस वक्त क्यों रिलीज़ की जा रही है। वजह है आनंद कुमार की ज़िंदगी में बचे हुए दिनों की संख्या।

    दरअसल, एक इंटरव्यू में आनंद कुमार ने बताया कि वो ब्रेन ट्यूमर से जंग लड़ रहे हैं और जीते जी अपनी बायोपिक देखना चाहते थे। लेकिन फिलहाल उनकी ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं है। इस इंटरव्यू में भावुक होकर आनंद कुमार ने कहा कि मेरे लिए अच्छा यही होगा कि मैं जीते जी अपनी ज़िंदगी की कहानी परदे पर देख सकूं।

    आनंद कुमार ने बताया कि कुछ समय पहले उन्हें सुनने में समस्या होती थी। अधिक चेकअप पर पता चला कि वो 80 - 90 प्रतिशत सुनने की क्षमता खो चुके हैं। किसी ट्रीटमेंट से कोई फर्क नहीं पड़ा। 2014 में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पता चला कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है। हर ऑपरेशन के साथ उनकी ज़िंदगी पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

    देखिए आनंद कुमार की ज़िंदगी की संघर्ष की कहानी

    कौन हैं आनंद कुमार

    कौन हैं आनंद कुमार

    आनंद कुमार बिहार के एक टीचर हैं। आनंद पेशे से एक गणितज्ञ हैं जो अपने सुपर 30 प्रोग्राम के लिए काफी मशहूर हुए। आनंद ने बिहार की राजधानी पटना में, साल 2002 में सुपर 30 प्रोग्राम शुरू किया था। इस प्रोग्राम में वो 30 ऐसे बच्चों को आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की कोचिंग देते थे जो इसके लिए महंगी कोचिंग की फीस नहीं जुटा पाते थे लेकिन जिनके अंदर पूरी काबिलियत होती थी।

    बज गया डंका

    बज गया डंका

    2018 तक आनंद के पढ़ाए 480 बच्चों में से 428 बच्चों का चयन देश के अलग अलग आईआईटी संस्थानों में हो गया था। डिस्कवरी चैनल ने आनंद की इस उपलब्धि को डॉक्यूमेंट्री के तौर पर दिखाया था। उनकी इन्हीं सारी उपलब्धियों की झलक और बचपन का संघर्ष ऋतिक रोशन की सुपर 30 में दिखने वाला है।

    कैसा बीता बचपन

    कैसा बीता बचपन

    आनंद कुमार का बचपन, काफी दिलचस्प था। चूंकि उनके पिता पोस्ट ऑफिस में एक क्लर्क थे, आनंद कुमार किसी प्राईवेट कॉन्वेंट स्कूल की बजाय एक सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़े। लेकिन यहां उनकी रूचि गणित में जाग गई। स्नातक की पढ़ाई के दौरान, आनंद ने गणित पर कुछ रिसर्च पेपर सबमिट किए जो कई जगह पब्लिश हुए।

    शानदार पल

    शानदार पल

    आनंद कुमार के रिसर्च पेपर से प्रभावित होकर उन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला लेकिन पिता की मौत और घर की माली हालत बिगड़ने के कारण वो विदेश नहीं जा पाए। हालांकि 1994 - 95 में उन्होंने स्पॉन्सर ढूंढने की काफी कोशिश की लेकिन असफल रहे।

    ऐसे चलाते थे घर

    ऐसे चलाते थे घर

    दिन में आनंद अपनी गणित की पढ़ाई पर काम करते थे और शाम को मां का हाथ बटाने के लिए पापड़ बेचते थे। इसके अलावा कुमार बच्चों को ट्यूशन देकर पैसे इकट्ठा करने लगे। चूंकि पटना की लाईब्रेरी में उपयुक्त सामग्री नहीं मिल पाती थी, आनंद हर हफ्ते वाराणसी जाते थे जहां बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में उनका भाई पढ़ता था। वहां जाकर आनंद अपनी पढ़ाई का काम पूरा करते थे।

    ऐसे शुरू हुआ सिलसिला

    ऐसे शुरू हुआ सिलसिला

    1992 में आनंद गणित पढ़ाने लगे। उन्होंने 500 रूपये में एक क्लास भाड़े पर लिया और रामानुजन स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स नाम से अपनी कोचिंग चलाने लगे। एक साल में इस कोचिंग में 2 से 36 बच्चे आने लगे। और 3 साल में 500 बच्चों ने एडमिशन ले लिया। 2000 में एक गरीब बच्चा उनसे पैसे की मदद मांगने आया जो आईआईटी की परीक्षा पास करना चाहता था पर उसके पास आनंद की कोचिंग की फीस के पैसे नहीं थे। यहीं से सुपर 30 की शुरूआत हुई।

    हर साल लेते हैं परीक्षा

    हर साल लेते हैं परीक्षा

    हर साल मई में आनंद की कोचिंग एक परीक्षा रखती है जो 30 बच्चों को छांटकर सुपर 30 प्रोग्राम में जगह देती है। इसके बाद आनंद, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के इन बच्चों को खुद कोचिंग देते हैं और आईआईटी की प्रवेश परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। उनकी मां इन बच्चों के लिए खाना बनाती हैं और भाई मैनेजमेंट देखते हैं।

    सबसे बड़ी उपलब्धि

    सबसे बड़ी उपलब्धि

    2003 - 2017 तक में सुपर 30 के 391 बच्चों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की। आनंद लाईमलाईट में आए जब 2008 - 2010 तक सुपर 30 के सारे बच्चों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास कर ली। कुमार के पास इन बच्चों को पढ़ाने के लिए कहीं से कोई सहायता नहीं मिलती है। इन बच्चों को पढ़ाने की फीस वो अपनी कोचिंग से लगाते हैं।

    अवार्ड ही अवार्ड

    अवार्ड ही अवार्ड

    सुपर 30 को डिस्कवरी चैनल से लेकर कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों ने सराहा। कई विदेशी यूनिवर्सिटी ने आनंद को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके काम को अतुलनीय माना जाता है। कनाडा के एक मनोचिकित्सक आनंद की बायोग्राफी भी लिख चुके हैं। उन्हें राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय बाल कल्याण अवार्ड् से सम्मानित किया है।

    लोगों ने की साज़िश

    लोगों ने की साज़िश

    2018 में दैनिक जागरण में छपे एक आर्टिकल ने आनंद पर कीचड़ उछालते हुए ये साबित करने की कोशिश कर डाली कि केवल 3 सुपर 30 बच्चों का चयन आईआईटी में हुआ जबकि आनंद ने 26 का दावा किया था। जागरण ने ये भी दावा किया कि सुपर 30 के लिए आए बच्चों को पहले रामानुजन कोचिंग में पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है जिसकी फीस बहुत ज़्यादा है।

    आनंद कुमार पर इल्ज़ाम लगाए गए थे कि रामानुजन कोचिंग में बच्चों को पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है और उन्हें लालच दिया जाता है कि सुपर 30 में उन्हें जगह मिल जाएगी। इस कोचिंग से आनंद कुमार सालाना 1 करोड़ रूपये की आमदनी करते हैं।

    हालांकि बिहार के लोग खुलकर आनंद के पक्ष में सामने आए और इन बातों को केवल उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश करने वाला एक कैंपेन बताया। लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी ने इसे आनंद की कोशिशों से जलने वालों की साज़िश बताया था। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने भी आनंद के पक्ष में ट्वीट किया था।

    English summary
    Anand Kumar' biopic Super 30 starring Hrithik Roshan releases this Friday but Anand in an interview confessed that he fighting brain tumor since 2014 and wanted to see his biopic while he is still alive.
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