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    Womens Day- फातिमा बेगम, मेघना गुलजार, अश्विनी अय्यर, जोया अख्तर-पर्दे के पीछे की असली हीरोइनें

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    फिल्मी सफर की बात हो तो लोग सलमान खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, कैटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण को तो बखूबी जानते हैं लेकिन फिल्मों के पीछे के दिमाग और रीढ़ को जानने की कोशिश नहीं करते। वहीं बात जब महिला निर्देशकों की हो तो बिल्कुल ही इससे लोग अंजान हैं। बॉलीवुड की पहली निर्देशिका फातिमा बेगम थीं।

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    जिन्होंने 1926 में 'बुलबुल ए परिस्तान' फिल्म का डायरेक्शन किया। इसके बाद लगातार महिलाएं इस क्षेत्र में काफी आगे बढ़ीं लेकिन लोगों से अंजान रहीं। इन महिला निर्देशकों की फिल्म चली तो खूब लेकिन इनके चेहरों से लोग परिचित नहीं हुए। आइए आज आपको ऐसे ही बॉलीवुड की दिग्गज निर्देशिकाओं से परिचित करवाते हैं जिनके बारे में पढ़ना आपके लिए भी दिलचस्प साबित होगा।

    फ़ातिमा बेगम

    फ़ातिमा बेगम

    साल 1926 में अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'बुल बुल ए परिस्तान' से फातिमा ने अपने करियर सी की। यह वह दौर था जब महिलाएं सामाजिक कुरीतियों के चलते कुछ खास करने में सक्षम नहीं हो पाती थी। उस दौर में फातिमा बेगम एक सफल अभिनेत्री, डायेक्टर और पटकथा लेखक बनीं।

    शगुफ्ता रफ़ीक

    शगुफ्ता रफ़ीक

    शगुफ्ता रफ़ीक के बारे में कहां से शुरू किया जाए, यही मुश्किल है। जिसने अपने करियर में इतने उतार चढ़ाव देखे हों। इनके बारे में अगर आप पढ़ेंगे तो रोंगटे भी खड़े हो सकते हैं। शगुफ्ता रफीक निर्देशिका होने के साथ साथ एक पटकथा राइटर भी रही हैं। लेकिन दुख तब होता है जब पता चलता है कि वह 17 साल की उम्र में प्रॉस्टिट्यूट बन गई थीं। इतनी बड़ी बात खुद शगुफ्ता रफीक ने एक इंटरव्यू में बताई।

    जब वह भारी लफ्जों में कहती हैं कि एक अजनबी संग वर्जिनिटी खोना बहुत दर्दनाक होता है। 'आशिकी 2', 'मर्डर 2' और 'राज 2', 'राज 3', 'जिस्म 2', 'आवरापन' जैसी फिल्मों की पटकथा लिखनी वाली शगुफ्ता रफीक महज 7वीं पास हैं। उन्हें बॉलीवुड में निर्देशक की कुर्सी पर पहुंचने के लिए 20 साल लग गए। इस कुर्सी तक पहुंचने का श्रेय वह पूजा भट्ट को देती हैं। साथ ही उन्होंने बंगाली और पंजाबी फिल्म निर्देशित की हैं।

    अरुणा राजे

    अरुणा राजे

    साल 1946 में जन्मीं अरुणा राजे ने अपनी पढ़ाई साइंस साइड से की। इसके बाद उन्होंने एफटीआईआई ज्वाइन किया। यहां से पास होने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत निर्देशिका के तौर पर शुरू की। उन्होंने अपने करियर में कई फिल्मों की पटकथा लिखीं और फिल्में बनाईं। अरुणा ने कई फिल्में मिलकर बनाई तो 'रिहाई' जैसी फिल्मों का निर्माण किया।

    साल 2019 में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीजफायरब्रांड को अरुणा राजे ने ही लिखा और डायरेक्ट किया। इस वेब सीरीज को प्रियंका चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस किया गया।

    लीना यादव

    लीना यादव

    'तीन पत्ती' हो या 'पार्च्ड' इन फिल्मों को न केवल क्रीटिक्स द्वारा सराहा गया बल्कि तमाम अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया गया। फिल्म 'पार्च्ड' की टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में काफी प्रशंसा हुई थी। 'पार्च्ड' का जब भी जिक्र होता है तो राधिका आप्टे का नाम जरूर जहन में आता है लेकिन लीना यादव का नाम लोग भूल जाते हैं।

    कुछ तो ऐसे भी होंगे जो उनसे वाकिफ ही न हो। लीना यादव निर्देशन से पहले फिल्मों की एडिटिंग भी कर कर चुकी हैं। साल 1995 के दौरान जब उन्होंने एडिटिंग का काम शुरू किया तो लोगों ने उन्हें यही कहा कि क्या एक लड़की एडिटिंग जैसा भारी भरकम काम कर पाएंगी ? फिर लोग कहने लगे क्या कोई महिला निर्देशक बन सकती है? फिर जब 'पार्च्ड' बनी तो लोगों ने उनकी तारीफ की। महिला निर्देशक पर वह कहती हैं कि डायरेक्टर डायरेक्टर होता है। पुरुष या महिला कुछ नहीं।

     गुरिंदर चड्ढा

    गुरिंदर चड्ढा

    गुरिंदर चड्ढा उन गिनी चुनी निर्देशिकाओं में शुमार हैं जो इंग्लिश फिल्में बनाती है। वो फिल्में जिनमें अधिकतर विदेशी स्टार कास्ट ही नजर आते हैं। गुरिंदर चड्ढा का नाम इस लिस्ट में रखना कई मायनों में जरूरी है। साल 2002 में आई फिल्म 'बेंड इट लाइक बेकहम', 'पार्टिशन 1947', 'ब्लाइंडिट बाय द लाइट' जैसी कई फिल्में बनाई हैं। 'बेंड इट लाइक बेकहम' तो उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है।

    शोनाली बोस

    शोनाली बोस

    नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित शोनाली बोस का जन्म तो कलक्ता में हुआ लेकिन उन्होंने अपना बचपन मुंबई और फिर दिल्ली में बिताया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई और फिर कोलंबिया से अपनी आगे की पढ़ाई की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2005 में आई कोंकणा सेन की फिल्म 'अमु' से की। वह एक फिल्म निर्देशिका होने के साथ साथ निर्माता और लेखक भी है। इसके अलावा उन्होंने हाल में आई 'द स्काई इज पिंक' और 'मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है।

    गौरी शिंदे

    गौरी शिंदे

    इनकी फिल्में तो आपने बहुत देखी होगी और तारीफ भी की होगी लेकिन नाम शायद आप नहीं जानते होंगे। लेकिन 'इंग्लिश विंग्लिश' से तुंरत आपको ये नाम याद आ सकता है। जी हां, 'डियर जिंदगी', 'इंग्लिश विंग्लिश' व 'शमिताभ' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकी हैं।

    अनुषा रिज़वी

    अनुषा रिज़वी

    अनुषा रिज़वी निर्देशन से पहले पत्रकार भी रह चुकी हैं। 'पीपली लाइव' जैसी फिल्म में अनुषा रिज़वी ने देश के किसानों की आत्महत्या की समस्या को बेहद संजीदे तरीके से दर्शाया। उन्होंने इस फिल्म का लेखन भी किया। दुनियाभर में फिल्म को प्रशंसा मिली। इस फिल्म को डरबन में सर्वेश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला।

    अलंकृता श्रीवास्तव

    अलंकृता श्रीवास्तव

    जामिया से फिल्मों का ज्ञान बटौरने वाली अलंकृता श्रीवास्तव ने 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' का निर्देशित किया। उनके द्वारा अमेजन की वेब सीरीज 'मेड इन हेवन' ने भी खूब प्रशंसा लूटी थी। अलंकृता ने 'अपहरण' फिल्म में अस्सिटेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया है।

    पूजा भट्ट

    पूजा भट्ट

    कई फिल्मों में एक्टिंग के बाद पूजा भट्ट ने अपने करियर का रुख डायेरक्शन की ओर मोड़ा। 'पाप', 'हॉलीडे', 'जिस्म 2' और 'धोखा' जैसी फिल्मों का निर्देशन महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट ने किया है।

    अश्विनी अय्यर

    अश्विनी अय्यर

    हाल में ही 'पंगा' जैसी फिल्म का निर्देशन करने वाली अश्विनी अय्यर तिवारी को उनकी पहली ही फिल्म के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला था। उनकी पहली फिल्म 'निल बटे सन्नाटा' थी।

    रीमा कागती

    रीमा कागती

    रीमा कागती निर्देशिका के अलावा स्क्रीनराइटर भी हैं। बतौर डायरेक्टर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 'हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेड लिमिडेट' से किया। इसके बाद उन्होंने 'गोल्ड', तलाश जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। 'लगान' और 'दिल चाहता है' जैसी सुपरहिट फिल्मों में वह सह-निर्देशिका के तौर पर काम कर चुकी हैं।

    जोया अख्तर

    जोया अख्तर

    जावेद अख्तर की बेटी जोया अख्तर ने अपनी लेखनी और निर्देशन के तौर पर खूब नाम कमाया है। 'लक बाय चान्स', 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा', 'बॉम्बे टॉकिज', 'दिल धड़कने दो', 'लस्ट स्टोरिज' और 'गली बॉय' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। अवॉर्ड की बात करें तो वह कई सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं। हाल में ही उनकी फिल्म 'गली बॉय' ने सबसे ज्यादा कैटगरी में अवॉर्ड जीतें। वहीं ये फिल्म ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट हुई थी।

    मेघना गुलजार

    मेघना गुलजार

    'छपाक', 'राजी' और 'तलवार' जैसी फिल्मों के लिए गुलजार और राखी की बेटी मेघना गुलजार की जितनी तारीफ हो उतनी कम है।

    English summary
    indian Female directors who are inspires us on women's day
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