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    बॉलीवुड की इन बातों का मतलब कोई नहीं समझ पाया..

    By Shweta
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    आज बॉलीवुड के उस शख्स का जन्मदिन जो अपने आप में बॉलीवुड के किसी कोहिनूर हीरे से कम नहीं है। बॉलीवुड तो छोड़िए हर शख्स इनकी इज्जत और इनका नाम अदब से ही लेता है।

    जी हां हम बात कर रहे हैं गुलजार की। गुलजार साहब आज अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉलीवुड में हर कोई उन्हें मुबारकबाद दे रहा है। गुलजार साहब ने अपने इतने लंबे करियर में कई खूबसूरत गाने लिखें। उनके गानों के बोल से ही पता चल जाता है कि ये गाना उन्हें छोड़कर कोई लिख ही नहीं सकता।

    [इनकी 'जोड़ी' है कमाल की..जब रहें साथ तभी बन जाए बात..CUTE..]

    शायद आपको पता नहीं हो लेकिन गुलजार का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और उनका असल नाम गुलजार नहीं बल्कि संपूर्ण सिंह कालरा था। लेकिन भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय उनका परिवार भारत शिफ्ट हो गया।गुलजार का पूरा परिवार बिजनस से जुड़ा था लेकिन इनकी बिजनस में कोई रूची नहीं देखकर पैरेंट्स परेशान भी हो जाते थे कि शायरी की लत कहां से लग गई।

    गुलजार के बारे में जो भी कहा जाए जितना भी कहा जाए कम ही होगा। उनके गानों में इतनी गहराई होती है कि कोई भी सुनकर अलग ही दुनिया में चला जाए तो कई बार ऐसा भी हुआ को लोग उनके कई गानों के अर्थ को समझ ही नहीं पाए । देखिए कुछ ऐसे ही गाने जिसके बोल बेहद शानदार थे और अर्थ में इतनी गहराई थी कि लोग उसके मतलब को समझ नहीं पाए।

    साथिया के टाइटल ट्रैक की लाइन

    साथिया के टाइटल ट्रैक की लाइन

    'पीली धुप पहनकर तुम देखो बाग में मत जाना

    भंवरे सब तुमको छेड़ेंगे देखो फूलों में मत जाना '

    कजरारे

    कजरारे

    तुमसे मिलना पुरानी दिल्ली में..छोड़ आए निशानी दिल्ली में..

    पल निमानी दरी बेतलब तेरी मेरी कहानी दिल्ली में

    काली कमली वाले को याद करके..तेरे काले काले

    नयनों की कसम खाते हैं

    ओंकारा..नमक इश्क का

    ओंकारा..नमक इश्क का

    ओह मै तू चांद निकल गयो दैय्या रे
    अंग पे ऐसे छाले पडी
    तेज़ था झोंका का करूं
    सीसी करती, सीसी सीसी करती मै मरूं

    माचिस का गाना पानी पानी रे..

    माचिस का गाना पानी पानी रे..

    ये रूदाली जैसी आंखें जगरातों में बिता देना..

    मेरे आंखो में जो बोले मीठे पानी तो उड़ा लेना

    बर्फों में लगे मौसम पिघले

    मौसम हरे कर जा..नींदे खाली कर जा

    चप्पा चप्पा चरखा..माचिस

    चप्पा चप्पा चरखा..माचिस

    चप्पा चप्पा चरखा चले
    औनी-पौनी यारियाँ तेरी
    बौनी-बौनी बेरियोँ तले
    चप्पा चप्पा चरखा चले ...
    गोरी चटखोरी जो कटोरी से खिलाती थी
    जुम्मे के जुम्मे जो सुरमे लगाती थी

    नैना ठग लेंगे..ओमकारा

    नैना ठग लेंगे..ओमकारा

    भला मंदा देखे ना पराया ना सगा रे
    नैनो को तो डसने का चस्का लगा रे
    नैनो का जेहर नशीला रे
    बादलो में सतरंगिया बोंवे, भोर तलक बरसावे
    बादलो में सत्र अंगिया बोंवे, नैना बांवरा कर देंगे
    नैना ठग लेंगे ठग लेंगे, नैना ठग लेंगे

    इब्ने बतूता..इश्किया

    इब्ने बतूता..इश्किया

    इब्ने बतूता ता, बगल में जूता ता

    पहने तो करता है चुर्रर्रर्रर्रर्र...

    उड़ उड़ आवे..आ दाना चुगे आ आ..

    उड़ जाए चिड़ियां फुर्रर्रर्रर्र...

    पहली बार मोहब्बत की है..कमीने

    पहली बार मोहब्बत की है..कमीने

    याद है पीपल के जिसके घने साये थे..

    हमने गिलहरी के जूठे मटर खाए थे..

    ये बरकत उन हजरत की है..

    हां पहली बार मोहब्बत की है

    तस्वीरें

    तस्वीरें

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    English summary
    Gulzar Sahab turns 83 today, see his most intense lyrics that was difficult to understand by common man.
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