बर्थडे स्पेशल : बीमारी से नहीं तिरुपति की मन्नत पूरी करने के लिए राकेश रोशन ने मुंडवा दिये थे बाल
बॉलीवुड में एक्टर से डायरेक्टर और फिल्म प्रोड्यूसर तक का लंबा सफर राकेश रोशन ने तय किया है। 6 सितंबर को वह अपना बर्थडे मना रहे हैं। उन्होंने 'सीमा', 'मन मंदिर', 'झुठा', 'बुनियाद' जैसी फिल्मों में अपनी लाजवाब एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया है। इसके बाद उन्होंने 'करन-अर्जुन', 'कोई मिल गया', 'कृष' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया था। राकेश रोशन की लाइफ में एक समय ऐसा भी आया जब वह जीभ के कैंसर से पीड़ित हो गये थे। नौबत यहां तक आ गयी थी कि उनकी जीभ को काटना पड़ सकता था लेकिन राकेश रोशन घबराये नहीं और कैंसर का डटकर मुकाबला कर एक रियल लाइफ हीरो की तरह उभरकर सामने आये हैं।
राकेश रोशन के बर्थडे पर चलिए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

बीमारी की वजह से नहीं मन्नत के कारण मुंडवाए बाल
फिल्मों में एक्टिंग का लंबा सफर तय करने के बाद राकेश रोशन साल 1987 में फिल्म 'खुदगर्ज' से निर्देशन के क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार थे। उस समय उन्होंने तिरुपति में जाकर फिल्म की सफलता के लिए मन्नत मांगी थी कि अगर फिल्म सफल हुई तो वे बाल मुंडवा देंगे। फिल्म तो सफल हो गयी लेकिन कहा जाता है कि वह अपनी मन्नत भूल गये थे। बाद में उनकी पत्नी पिंकी ने उन्हें इस मन्नत के बारे में याद दिलाया जिसके बाद उन्होंने अपने बाल मुंडवा दिये।

'के' अक्षर को मानते हैं लकी
राकेश रोशन भी टीवी की ड्रामा क्वीन एकता कपूर की तरह अंग्रेजी के 'के' अक्षर को अपने लिए लकी मानते हैं। उनके निर्देशन में बनी लगभग सभी फिल्मों के नाम 'के' अक्षर से ही शुरू होते हैं जैसे 'कहो ना प्यार है', 'कृष', 'करन-अर्जुन', 'कोई मिल गया' और इनमें से ज्यादातर फिल्में हिट भी रही। साल 2010 में राकेश रोशन ने फिल्म 'कहो ना प्यार है' से अपने बेटे ऋतिक रोशन को लॉन्च किया था। फिल्म को बनाने में 10 करोड़ का खर्च हुआ था लेकिन फिल्म ने 62 करोड़ रुपये की कमाई की थी। उन्हें इस बात का अहसास एक प्रशंसक के लेटर से हुआ था। उनके प्रशंसक ने ही उन्हें बताया था कि 'के' अक्षर से रखी उनकी सारी फिल्में हिट होती हैं। इसलिए वह अपनी फिल्मों का नाम 'के' अक्षर से ही रखे। इसके बाद ही राकेश ने इस बात पर ध्यान दिया और अपनी अगली सारी फिल्मों का नाम 'के' अक्षर से ही रखना शुरू कर दिया।

डटकर किया कैंसर का मुकाबला
साल 2018 के दौरान राकेश रोशन को जीभ का कैंसर हो गया था। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि टेस्ट का रिपोर्ट आने और डॉक्टरों के उन्हें बताने से पहले ही उन्हें इस बात का अहसास हो चुका था कि वह कैंसर की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि उन्हें कैंसर की वजह से ज्यादा तकलीफ नहीं हो रही थी लेकिन उनके मुंह का स्वाद करीब 6-8 महीनों के लिए बिगड़ गया था। कभी किसी खाने में नमक ज्यादा तो कभी कोई खाना मीठा लग रहा था। राकेश ने बताया कि उन्होंने सिगरेट पीना तो बिल्कुल छोड़ दिया है लेकिन बीच-बीच थोड़ी मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं। इंटरव्यू में राकेश रोशन ने बताया कि कैंसर के बारे में पता चलने के बाद भी वो कभी घर पर नहीं बैठे। यहां तक कि कीमोथेरेपी के बाद मैं ऑफिस भी गया था। मैंने खुद को कभी बिस्तर से नहीं बांधा या नर्वस नहीं हुआ।


Click it and Unblock the Notifications











