कंगना रनौत की इमरजेंसी से पहले इंदिरा गांधी पर बनी हैं कई फिल्में, विद्या बालन भी बनेंगी इंदिरा

कंगना रनौत ने अपनी अगली फिल्म इमरजेंसी की तैयारी करनी शुरू कर दी है। इस फिल्म में वो इंदिरा गांधी के किरदार में दिखाई देंगी। लेकिन कंगना रनौत पहली एक्टर नहीं हैं जो इंदिरा गांधी पर फिल्म बनाने जा रही हैं। सत्ता में आने से लेकर हत्या तक इंदिरा गांधी की कहानी काफी विवादास्पद रही है।

गौरतलब है कि फिल्मों ने भी या तो इंदिरा गांधी की ज़िंदगी से प्रेरणा लेकर परदे पर राजनीति का चरम दिखाने की कोशिश की या फिर एक महिला किरदार को सत्ता का सिंहासन सौंप कर कहीं न कहीं उनकी छवि पेश की।

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विद्या बालन ने भी कुछ सालों पहले सागरिका घोस की इंदिरा गांधी पर लिखी किताब के राइट्स खरीद लिए हैं। विद्या ने बताया कि उनकी बहुत इच्छा है कि वो परदे पर इंदिरा गांधी का किरदार निभाएं।

हालांकि विद्या बालन ने ये नहीं पक्का किया कि ये फिल्म होगी या वेब सीरीज़। उन्होंने बताया कि किसी भी तरीके से मैं परदे पर इंदिरा गांधी ज़रूर निभाऊंगी।

बात करें इंदिरा गांधी पर बनी फिल्मों की तो कुछ फिल्मों ने इंदिरा गांधी के शासन काल को परदे पर उतारा तो कुछ फिल्मों ने तो सीधे सीधे उन्हें ही परदे पर उतारने की कोशिश की।

आंधी का विवाद

आंधी का विवाद

आंधी के विवाद और इंदिरा गांधी के डर ने यह साबित कर दिया था कि इस फिल्म ने उन्हें बहुत कुछ याद दिलाया है। वहीं 1975 की इमरजेंसी के वक्त उन्होंने पूरी तरह से फिल्म को बैन कर दिया था। उन्हें डर था कि यह फिल्म ऐसा बहुत कुछ खोल जाएगी जो उनके हित में कतई नहीं होगा।

सालों बाद हटा था बैन

सालों बाद हटा था बैन

आंधी के कुछ पोस्टरों में तो यहां तक छपा था कि अपने प्रधानमंत्री की असली कहानी परदे पर देखिए। इंदिरा ने तो अपने स्टाफ को यह फिल्म देखकर यह डिसाइड करने का ऑर्डर दिया था कि फिल्म रिलीज़ होनी चाहिए या नहीं। हालांकि उन्होंने खुद यह फिल्म कभी नहीं देखी। इसके बाद 1975 की इमरजेंसी में इंदिरा ने फिल्म बैन कर दी। बाद में जनता पार्टी की सरकार आने के बाद यह बैन हटाया गया।

किस्सा कुर्सी का

किस्सा कुर्सी का

इस फिल्म के रिलीज़ होने से पहले ही बहुत कंट्रोवर्सी बटोरी। फिल्म में संजय गांधी और इंदिरा गांधी का खूब मज़ाक उड़ाया गया। इतना ही नहीं फिल्म ने उनपर करारे व्यंग्य कसे थे। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास नहीं किया था। ये फिल्म इंदिरा गांधी सरकार पर बनी पहली कटाक्ष करने वाली फिल्म थी।

बेहतरीन स्टारकास्ट

बेहतरीन स्टारकास्ट

फिल्म 1975 की इमरजेंसी के कारण लटका दी गई। बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे केंद्र सरकार के हवाले कर दिया। केंद्र ने फिल्म पर 51 आपत्तियां जताई थीं। फिल्म में शबाना आज़मी, राज बब्बर, रेहाना सुल्तान, सुरेखा सीकरी, मनोहर सिंह और उत्पल दत्त ने बेहतरीन काम किया था।

31 अक्टूबर

31 अक्टूबर

भारत में घटी कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिनसे आज तक लोगों की संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। 31 अक्टूबर 1984 वैसा ही एक दिन है, जिसे लोग भुलाए नहीं भूल सकते। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके दो सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उसके बाद देखते देखते पूरे देश में दंगा फैल गया।

असफल कोशिश करती फिल्म

असफल कोशिश करती फिल्म

फिल्म की कहानी एक सिख परिवार के इर्द गिर्द बुनी गई थी जहां एक पति- पत्नी अपने तीन बच्चों के साथ दिल्ली में रहते हैं। मोहल्ले में सब मिल जुलकर रहते हैं लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद ही माहौल पूरी तरह से बदल जाता है। फिल्म ने सिख दंगों के खौफनाक मज़र को परदे पर उतारने की पूरी कोशिश की थी लेकिन फिल्म ज़्यादा गहरा असर नहीं छोड़ पाई थी।

इंदु सरकार

इंदु सरकार

मधुर भंडारकर की फिल्म 'इंदु सरकार' 1975 की इमेरजेंसी पर आधारित थी। जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में 21 महीनों की इमेरजेंसी घोषित कर दी थी। फिल्म में नील नितिन मुकेश - संजय गांधी और सुप्रिया विनोद इंदिरा गांधी के किरदार में दिखाई दिए थे।

सिस्टम से लड़ती फिल्म

सिस्टम से लड़ती फिल्म

फिल्म काफी सीरियस और सिस्टम की कमियों पर बनी थी जहां कीर्ति कुल्हाड़ी एक ऐसी महिला के किरदार में दिखाई दी थीं जो सरकार की कमियों के खिलाफ आवाज़ उठती है और सिस्टम से लड़ती है।

पंजाबी फिल्म कौम दे हीरे

पंजाबी फिल्म कौम दे हीरे

इंदिरा गांधी के हत्यारों पर बनी इस पंजाबी फिल्म ने भी बहुत विवाद खड़े किए। फिल्म में इंदिरा के दोनों हत्यारों को बहुत ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस ने फिल्म पर आपत्ति जताई। इसके अलावा फिल्म के प्रोड्यूसर ने सेंसर बोर्ड से फिल्म को पास करवाने के लिए रिश्वत दी।

बड़ी मुश्किल में पड़ी थी रिलीज़

बड़ी मुश्किल में पड़ी थी रिलीज़

फिल्म पास भी हो गई और रिलीज़ के लिए तैयार थी कि कांग्रेस को भनक लग गई। फिल्म को तुरंत बैन कर दिया गया। हालांकि सिख समुदाय ने फिल्म की सिफारिश यह कहकर की कि फिल्म सिख समुदाय पर इंदिरा गांधी सरकार की प्रता़ड़नाओं को दिखाती है।

नसबंदी

नसबंदी

यह फिल्म इंदिरा गांधी सरकार की नीतियों पर व्यंग्य था। फिल्म के व्यंग्य इतने सीधे थे कि फिल्म को इमरजेंसी के बाद बैन कर दिया। फिल्म में इंदिरा गांधी सरकार की नसबंदी योजनाओं का जमकर मज़ाक उड़ाया गया था। हालांकि फिल्म ने वापस रिलीज़ होने के बाद कोई कमाई नहीं की।

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