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    परेश रावल ने समझाया तो नहीं, आमिर ने कहा तो Pk 'सुपरहिट'

    By Neeti
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    [नीति सुधा] ''इस गोले में रहने वाले किसी भी प्राणी का कॉल राइट नंबर पर जा ही नहीं रहा, सब रांग नंबर पर कॉल कर रहे हैं और कोई उनकी फिरकी ले रहा है''..यह कहना है एलियन बने 'पीके' का। भगवान पर अंधविश्वास, धर्मों के डोर में उलझे लोग और बाबाओं के शिंकजे में जकड़ते रिवाज, यह सभी बातें हमने पहली बार नहीं सुनी। लेकिन राजकुमार हिरानी ने इन बातों को जिस तरह दर्शकों के सामने रखा है, वह काबिलेतारीफ है। लेकिन हमें यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि संदेश होते हुए भी पीके आपको सोचने पर मजबूर नहीं करेगी।

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    दो साल पहले रिलीज फिल्म 'ओह माई गॉड' याद है क्या? यदि हां, तो फिर पीके की कहानी और कुछ डॉयलोग्स वहीं से प्रेरित लगेंगे। जो कि राजकुमार हिरानी और आमिर खान की फिल्मों में दर्शकों को देखने की उम्मीद नहीं रहती है। किरदारों के मामले में फिल्म बेहद मजबूत है। सभी अपनी जगह बेहतरीन हैं। आमिर खान की एक्टिंग बेस्ट है और एलियन के रूप में दर्शकों ने उन्हें खूब पसंद भी किया। लेकिन यह कहना कि पीके आमिर की बेस्ट फिल्म है अतिश्योक्ति होगी।

    बहरहाल, स्लाइडर में पढ़िए 'पीके' में कौन सा किरदार रहा कितना मजबूत और किस बात ने किया दर्शकों को निराश:

    पीके

    पीके

    एलियन बने आमिर खान हर तरह से बेस्ट हैं। अभिनय के लिहाज़ से ये आमिर ख़ान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पूरी फ़िल्म में वो नेचुरल लगे हैं। हालांकि फिल्म का मुख्य थीम 'पीके' नहीं है, बल्कि वह सिर्फ संदेश देने का माध्यम है। धर्म और जात-पात के नाम पर हम जो भेदभाव करते हैं उन्हें 'पीके' चैलेंज करता है। हांलाकि कई जगह पर लॉजिक थोड़ी पीछे छूट गई है, लेकिन आमिर की एक्टिंग के सामने सब माफ। लेकिन यहां ध्यान देने की बात यह है कि जब यही सारी बातें हमारे सामने फिल्म 'ओह माई गॉड' में इंसान बने परेश रावल ने रखी थी, तो हम पचा नहीं पाए, लेकिन एलियन आमिर ने रखी तो फिल्म हुई सुपरहिट। खैर, इसे कहते हैं नेम इफैक्ट..

    जगत जननी

    जगत जननी

    जगत जननी बनी अनुष्का शर्मा एक्टिंग में बेहतरीन थी। लेकिन राजकुमार हिरानी ने अनुष्का से उतना ही कराया, जितना वह पहले कर चुकीं है। इस फिल्म से अनुष्का की छवि में कोई बदलाव नहीं आने वाला है। वह एक बेहतर एक्ट्रेस हैं, यह सब जानते थे। हालांकि, जगत जननी की बात करें तो इस किरदार में राजकुमार हिरानी ने कोई कमी नहीं छोड़ी। इनकी छोटी सी लव-स्टोरी को शुरू किया तो इसे अंजाम तक भी पहुंचाया। और शायद इसी में फिल्म गड़बड़ा गयी।

    भैरोसिंह

    भैरोसिंह

    भैरोसिंह बने संजय दत्त ने दिल जीत लिया। भैरोंसिंह का किरदार जैसे राजकुमार हिरानी ने संजू बाबा के लिए लिखा हो। लेकिन उसे मार क्यों डाला, यह समझ आना परे है। बिना भैरोसिंह को मारे भी फिल्म का संदेश उतना ही प्रभावशाली रहता, जितना ट्रेन धमाके के बाद। हालांकि संजय दत्त ने एक बार फिर राजकुमार हिरानी की फिल्म में कमाल किया है।

    सरफरा़ज़ यूसूफ

    सरफरा़ज़ यूसूफ

    इस फिल्म से यह साबित हो गया कि सुशांत सिंह राजपूर बॉलीवुड में लंबे रेस के घोड़े हैं। सरफराज के किरदार में सुशांत चंद मिनटों के लिए आए, और दर्शकों का दिल जीत ले गए। सुशांत सिंह राजरूत ने सरफराज़ के किरदार के साथ पूरी तरह न्याय किया है। ये बात अलग है कि निर्देशक ने सीन चेंज होने पर सुशांत के कॉस्ट्यूम तक चेंज नहीं किया।

    तपस्वी महाराज

    तपस्वी महाराज

    तपस्वी महाराज बने सौरभ शुक्ला ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। कथित संत, महात्मा जो लोगों को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं उनके बारे में बात करती है पीके। लिहाजा, तपस्वी को राजकुमार हिरानी ने काफी सटिक ढ़ंग से बड़े पर्दे पर पेश किया है। हालांकि, फिल्म के अंत में लाइव शो पर क्लाइमेक्स थोड़ा ज्यादा था।

    बोमन ईरानी

    बोमन ईरानी

    बोमन ईरानी हमेशा अपने किरदार में ढ़ल जाते हैं। लिहाजा, पीके में भी चैनल हेड बने बोमन काफी सशक्त नजर आते हैं। हालांकि निर्देशक ने उनके लिए ज्यादा कुछ रखा नहीं था, लेकिन फिल्म में उनके डॉयलोग्स काफी इंप्रेसिव हैं।

    English summary
    Here is the character review of the film Pk. The film is liked by the audiences and critics but though lacks the x- factor.
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