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    FACT: 33 के संजय दत्त Vs 23 की नीरजा...देश के 10 सवाल कभी सोने नहीं देंगे!

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    [बॉलीवुड समाचार] संजय दत्त अब एक आज़ाद नागरिक हैं। सारे आरोपों से मुक्त। पर कुछ चीज़ें होती हैं जिन्हें आप कितनी भी कोशिश कर लें पर भुला नहीं पाएंगे।

    ऐसा ही एक दिन है 12 मार्च 1993। जब भी आप ब्लैक फ्राइडे नाम की फिल्म देखेंगे, आपका खून ज़रूर खौलेंगे, उन लोगों पर जिनकी वजह से 257 लोगों ने अपनी जान गंवाई। और जब भी 1993 के बम धमाकों की बात होगी, संजय दत्त का नाम हमेशा आएगा।

    [संजय दत्त के लिए अजय देवगन - सलमान खान का SURPRISE!]

    एक दिन, 13 धमाके और 257 लोगों की जान गंवाने में संजय दत्त का हाथ नहीं था। पर वो चाहते तो उन हाथों को रोक सकते थे जिन्होंने ये बम धमाके किए थे। उस वक्त संजय दत्त की उम्र 33 साल थी।

    खैर, ये सब अब तो पुरानी बातें हैं लेकिन फिर भी कुछ सवाल संजय दत्त का पीछा कभी नहीं छोड़ेंगे -

    एक संजय और एक नीरजा

    एक संजय और एक नीरजा

    दिलचस्प है कि एक लड़की थी नीरजा, जिसकी कहानी हाल ही में लोगों ने देखी, 23 साल की उम्र में उसने लगभग 360 लोगों की जान बचाई थी और 33 साल की उम्र में संजय दत्त की एक नादानी बंबई को काला कर गई थीं...धमाकों के धुंए से! 257 लोगों की मौत के साथ!

    इतने थे नादान

    इतने थे नादान

    संजय दत्त ने 33 साल की उम्र में बंबई बम ब्लास्ट से ठीक पहले काफी बड़ा कांड किया। ध्यान दीजिएगा संजय दत्त की उम्र उस वक्त 33 साल थी, तो क्या वो इतने नादान थे कि उन्हें समझ नहीं आया कि ऐसे वक्त में एके 56 राइफल वो किससे खरीद रहे हैं!

    असलहा से राइफल तक

    असलहा से राइफल तक

    संजय दत्त ने अपने बयान में कहा था कि जब वो राइफल खरीद रहे तो कुछ लोगों ने उन्हें हैंड ग्रेनेड भी दिखाए। और पूछा भी कि क्या वो बारूद के गोले खरीदेंगे। इतने के बाद भी संजय ने पुलिस को इत्तिला करना ज़रूरी क्यों नहीं समझा!

    257 जान गईं

    257 जान गईं

    संजय दत्त ने एक डीटेल छिपाई जिसका असर 12 मार्च को पूरी बंबई ने देखा जब 13 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों को जान चली गई और करीब 750 लोग घायल हो गए।

    क्यों नहीं किया कुबूल

    क्यों नहीं किया कुबूल

    जब संजय दत्त ने राइफल खरीदी थी और उन्हें पता चला कि वही लोग ब्लास्ट के दोषी हैं तो उन्होंने इस बात को कुबूल करने की बजाय चुप रहना बेहतर समझा। जबकि उनसे पूछा गया, तब भी!

     कैसे दोस्त बनाए थे

    कैसे दोस्त बनाए थे

    संजय दत्त ने राइफल और उसके बाद एक गन अपने दोस्त से खरीदी थी। वो अबू सलेम से भी मिले। उन्होंने अपने घर के गराज में एक स्मगलिंग का आया माल भी रखवाया...किस तरह के लोगों से संजय दत्त की दोस्ती थी!

    डर बड़ा था या फर्ज़

    डर बड़ा था या फर्ज़

    संजय दत्त को जब पता चला कि उनके 'दोस्तों' के पास इतनी भारी मात्रा में असलहे और बारूद है तो भी उन्होंने पुलिस को इत्तिला करना ज़रूरी नहीं समझा। जबकि बंबई पहले ही दंगों में सुलग रही थी। क्या डर एक 33 साल के आदमी के फर्ज़ से बड़ा था?

    काम में कैसे लगे थे

    काम में कैसे लगे थे

    इतना बड़ा कांड हो जाने के बाद, 257 लोगों की जान चली जाने के बाद संजय दत्त आराम से किसी आतिश नाम की फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, मॉरीशस में! कैसे?

    आज भी मुंबई के हीरो!

    आज भी मुंबई के हीरो!

    कहते हैं ना कि इस देश की जनता का दिल बहुत बड़ा है। तभी तो इतने कांड करने के बावजूद संजय दत्त इस देश के हीरो हैं। लोगों के हीरो हैं। मुंबई के हीरो हैं। उस मुंबई के जिसके 257 लोगों की जान उनकी एक 'नादानी' ने ली थी! क्या ये स्टारडम संजय दत्त को काटती नहीं!

    मेरे पिता को किसने मारा

    मेरे पिता को किसने मारा

    MUST READ

    मैंने सलमान खान को माफ कर दिया....पर मेरे पिता को किसने मारा?

    English summary
    1993 Bombay Blast - Questions which will haunt Sanjay Dutt forever.
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