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    महारानी वेब सीरिज रिव्यू- बेहतरीन अभिनय, लेकिन ढ़ीली है राजनीतिक दांवपेंच की यह कहानी

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    Rating:
    2.5/5

    निर्देशक- करण शर्मा

    कलाकार- हुमा कुरैशी, सोहम शाह, अमित सियाल, प्रमोद पाठक, कनी कुश्रुती आदि

    प्लेटफॉर्म- सोनी लिव

    एपिसोड- 9 एपिसोड/45 मिनट प्रति एपिसोड

    बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव को जब अपने पद के लिए खतरा महसूस हुआ, तो उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था। भारतीय राजनीतिक इतिहास में इसे सबसे अप्रत्याशित फैसलों में से एक माना जाता है। सुभाष कपूर की वेब सीरिज 'महारानी' इसी घटना पर आधारित दिखती है। लेकिन किसी भी तरह के विवादों से बचते हुए मेकर्स ने पूरी कहानी को काल्पनिक बताया है। सीरिज में इस बाबत डिस्क्लेमर है।

    कहानी शुरु होती है बिहार के मुख्यमंत्री भीमा भारती (सोहम शाह) से। पिछड़े वर्ग से आए भीमा को जनता से प्यार मिलता है, लेकिन पार्टी के अंदर और बाहर अवसरवादी नेताओं से घिर हैं। एक दिन उन पर जानलेवा हमला होता है, जिसके बाद बिहार की राजनीति तितर बितर होने लगती है। विरोधी पार्टियां इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश में लग जाती हैं। लेकिन इस बीच अपने प्रतिद्वंद्वियों को स्तब्ध कर देने वाला कदम उठाते हुए भीमा भारती अपनी पत्नी रानी भारती (हुमा कुरैशी) का नाम नए मुख्यमंत्री के रूप में रख देते हैं।

    कहानी

    कहानी

    घर की चारदीवारी में दिन- रात गुजारने वाली 'अंगूठाछाप' महिला से एक ताकतवर मुख्यमंत्री के रूप में रानी भारती का बदलाव काफी तेजी से दिखाया गया है। एक दृश्य में वह कहती हैं- "हमसे 50 लीटर दूध दूहा लो, 500 गोबर का गोइठा बना लो पर एक दिन में इतना फाइल पर अंगूठा लगाना, ना.. हमसे ना हो पाएगा।" लेकिन फिर कुछ ही समय के बाद वह नेताओं को आदेश जारी करते दिखती हैं। यह सब काफी जल्दी में होता है, और यहीं से प्रतीत होता है कि पटकथा पर मजबूती से काम नहीं किया गया है। शुरुआती तीन एपिसोड दिलचस्पी बनाए रखते हैं, लेकिन उसके बाद कहानी बिखर जाती है।

    शामिल हैं ये किरदार

    शामिल हैं ये किरदार

    'महारानी' के सत्ता की लड़ाई में मुख्य तौर पर मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार, प्रतीक्षारत मुख्यमंत्री, राज्यपाल , एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एक उच्च जाति के विरोधी नेता, नक्सली और एक आध्यात्मिक गुरु (बाबा) जैसे किरदार शामिल हैं। पूरी कहानी इन्हीं किरदारों के इर्द गिर्द घूमती है। यहां जनता की बात होती है.. लेकिन जनता गायब है।

    कमज़ोर निर्देशन

    कमज़ोर निर्देशन

    शतरंग की बिसात की भांति फैले राजनीतिक खेल में निर्देशक ने नारीवाद भी घुसाने की कोशिश की है, लेकिन फोकस इतनी जल्दी जल्दी शिफ्ट होता है कि आप जल्दी ही बोर हो जाते हैं। एक एपिसोड में अचानक ही घोटाला दिखाया जाता है, तो अगले में अचानक ही एक बाबा की उपस्थिति हो जाती है। 10 एपिसोड होते हुए भी सीरिज में सब कुछ संक्षिप्त सा है।

    अभिनय

    अभिनय

    अभिनय की बात करें तो हुमा कुरैशी, सोहम शाह, अमित सियाल और कनी कुसरुति ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है, लेकिन स्क्रीन कोई भी किरदार उभरकर नहीं आ पाता है। कहना गलत नहीं होगा कि इतने उम्दा कलाकारों की टोली होने के बावजूद निर्देशक ने यहां निराश किया। कुछ संवाद दमदार और बेहतरीन हैं। बैकग्राउंड स्कोर और संगीत औसत है और दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ता है।

    उलझी पटकथा

    उलझी पटकथा

    कुल मिलाकर, महारानी बहुत बेहतर बन सकती थीं यदि पटकथा को मजबूती दी जाती। कुछ सब- प्लॉट को विस्तार की जरूरत थी, लेकिन कहानी में अलग अलग मोड़ लाने के चक्कर में सुभाष कपूर उलझे दिखते हैं। राजनीतिक कहानियां आपको पसंद आती हैं 'महारानी' को एक बार देखा जा सकता है।

    English summary
    Maharani Web Series Review: Huma Qureshi tries to give her best in this underwritten political drama created by Subhash Kapoor.
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