शिद्दत फिल्म रिव्यू: जुनूनी प्यार की एक और दास्तां, कमजोर कहानी लेकिन मोहित रैना जीतते हैं दिल

Rating:
2.0/5

निर्देशक- कुणाल देशमुख
कलाकार- सनी कौशल, राधिका मदान, मोहित रैना, डायना पेंटी
प्लेटफॉर्म- डिज़्नी प्लस हॉटस्टार

"यदि तुम मुझे लंदन में नहीं मिलती तो तुम पेरिस में मिलती, यदि पेरिस में नहीं मिलती तो एम्सटर्डम में मिलती.. मैं तुम्हें दुनिया के किसी भी शहर, किसी भी गांव, गली, कूंचे में ढूंढ़ निकालता.. क्योंकि तुम किस्मत हो मेरी.." गौतम (मोहित रैना) अपने रिसेप्शन में सबके सामने ये बात अपनी पत्नी से ईरा (डायना पेंटी) से कहता है। उसी पार्टी में गेटक्रैश करके पहुंचा लड़का जग्गी (सनी कौशल) के दिल में प्यार का ये इजहार इतना गहरा उतरता है कि सच्चे प्यार को लेकर उसके मन भी वैसा ही जुनून बैठ जाता है।

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फिल्म की कहानी वर्तमान से फ्लैशबैक में जाती है, जहां जग्गी की लव स्टोरी सामने आती है। इस हैप्पी गो लकी लड़के को एक स्पोर्ट्स कैंप में स्विमिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई लड़की कार्तिका (राधिका मदान) से प्यार हो जाता है। नफरत और तकरार से शुरु हुआ दोनों का रिश्ता प्यार तक पहुंचता है। लेकिन जग्गी को जल्द ही पता चल जाता है कि कार्तिका की लंदन में शादी होने वाली है। कार्तिका उसे समझाने की कोशिश करती है कि वह शादी कैसिंल नहीं सकती है। वह उसे जाने देता है, लेकिन एक शर्त के साथ! जग्गी को अपने प्यार पर पूरा भरोसा है। वह अपने प्यार को पाने के लिए भारत से फ्रांस, फ्रांस से लंदन तक मापने के लिए निकल पड़ता है। इस सफर में उसकी मुलाकात दोबारा गौतम और ईरा से होती है, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। जग्गी के सामने तमाम मुश्किलें आती हैं, एक समय पर उसकी पहचान तक उससे छीन ली जाती है। लेकिन वह किसी भी हाल में कार्तिका तक पहुंचना चाहता है। लंदन में कार्तिका की शादी को कुछ ही दिन बचे हैं.. ऐसे में क्या वो भी इसी शिद्दत से जग्गी का इंतजार कर रही है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगा।

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बॉलीवुड की कई फिल्मों में मजनू आशिक लड़कों की कहानी दिखाई जा चुकी है, जो प्यार पाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं। 'शिद्दत' उन फिल्मों से अलग नहीं है। श्रीधर राघवन और धीरज रतन द्वारा लिखी गई यह पटकथा कई हिस्सों में बेहद कमजोर है। फिल्म दो प्रेम कहानियों को साथ लेकर चलती है। लेकिन यहां प्रेम कहानियां नहीं, बल्कि किरदार दिल छूते हैं। कमजोर लेखन की भरपाई इसके कलाकार अपने अभिनय से करते हैं। सनी कौशल की डायलॉग डिलीवरी और परफॉर्मेंस बढ़िया है। हालांकि राधिका मदान और डायना पेंटी को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं दिया गया है, लेकिन व्यावहारिक और खुले विचारों वाली महिलाओं के रूप में एक छाप छोड़ती हैं। और अंत में, मोहित रैना की बात करें तो.. वो शिद्दत के सबसे मजबूत पक्ष हैं। एक भारतीय डिप्लोमैट के किरदार में उनका सहज अभिनय देखने लायक है।

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तुम मिले और जन्नत जैसी फिल्में बना चुके निर्देशक कुणाल देशमुख की 'शिद्दत' प्यार में जुनून और जिद की बात करती है। लेकिन आज के समय से काफी पीछे की लगती है। या यूं कह लें कि वास्तविकता से दूर लगती है। लव स्टोरी के साथ साथ अवैध प्रवासियों की समस्या को दिखाना एक अच्छा ट्विस्ट था। लेकिन सेकेंड हॉफ में फिल्म बहुत खिचीं हुई सुस्त लगती है। ऐसी कहानियों में यदि क्लाईमैक्स छाप छोड़े तो भी बात बन जाती है, लेकिन यहां निर्देशक ने बहुत ही सुविधाजनक रास्ता ले लिया, जो निराश करता है। सचिन- जिगर का संगीत औसत से ऊपर है। फिल्मीबीट की ओर से 'शिद्दत' को 2 स्टार।

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