'सीरियस मेन' फिल्म रिव्यू- सुधीर मिश्रा के इस प्रभावी व्यंग्य में दमदार दिखे हैं नवाजुद्दीन सिद्दीकी
निर्देशक- सुधीर मिश्रा
कलाकार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी, इंदिरा तिवारी, अक्षत दास, नास्सर, श्वेता बसु प्रसाद
प्लैटफॉर्म- नेटफ्लिक्स
शुरुआती दृश्य में ही अपने अंधेरे कमरे में बंद अय्यन मणि (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) जिंदगी की व्याख्या करते हुए कहता है- "जिंदगी ऐसी ही है, कॉम्प्लेक्स.. आदमी बेमतलब ही पैदा होता है, मरता भी बेमतलब ही है.." उसे हमेशा अपने दादाजी की मृत्यु की घटना याद आती है, कि किस तरह को वो चलती ट्रेन ही चल बसे थे, जब किसी ने उनके कान में आकर इतना भर कह दिया था कि वो फर्स्ट क्लास कपार्टमेंट में चढ़ आए हैं, जो सिर्फ ब्राह्मणों के लिए होता है।
मनु जोसफ के इसी नाम से लिखी गई किताब पर आधारित फिल्म 'सीरियस मेन' जाति, वर्ग और वर्ण के आधार पर बंटे हुए समाज पर तंज कसती है। फिल्म का संदेश गंभीर और सामाजिक ताने बाने के लिए अति महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्देशक सुधीर मिश्रा ने आसान तरीके से इसे सामने रखने की कोशिश की है।


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