मिस टनकरपुर हाजिर हों फिल्म रिव्यू- भैंस का बलात्कार!
शायद आपको याद हो काफी समय पहले एक फिल्म आई थी जिसमें ये दिखाया गया था कि अगर दुनिया में लड़कियां ना हों तो क्या होगा। उस फिल्म में एक गांव दिखाया गया था जहां पर सिर्फ लड़के ही रह जाते हैं। ऐसे में लड़कियों के ना होने पर गावो में मौजूद जानवरों के साथ दुष्कर्म करते भी दिखाया गया था। इतना ही नहीं बल्कि हमारी कुछ एडल्ट कॉमेडी जैसे क्या सुपर कूल हैं हम में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया था हालांकि वो सिर्फ एक मजाक था।
यानी कि हम अब उस परिस्थिति में पहुंच चुके हैं जहां पर बेजुबां लाचार जानवर भी हमारे गंदे विचारों से अछूते नहीं रह गये। विनोद कापड़ी जी की फिल्म मिस टनकरपुर हाजिर हों समाज की ऐसी ही परिस्थिति पर एक प्रहार है। फिल्म में एक भैंस के साथ झूठ मूठ के हुए बलात्कार को विषय बनाया गया है। कॉमेडी और मार्मिक प्रसंगों से सजी इस फिल्म के विषय को काफी लाइट रखते हुए एक बेहतरीन बात कही गयी है।
फिल्म में काफी ड्रामा डाला गया है। कॉमेडी सीन्स बेहतरीन हैं। अन्नू कपूर, रवि किशन और संजय मिश्रा ने अपने अभिनय से इस संजीदा विषय पर आधारित फिल्म को भी काफी एंटरटेनिंग बनाया है। हालांकि फिल्म काफी जगह पर थोड़ा खींची हुई और बोर सी महसूस होती है लेकिन विषय को इस तरह से सामने रखा गया है कि कहानी बोझिल होते होते अचानक ही इंटरेस्टिंग हो जाती है।
आइये एक नज़र डालते हैं मिस टनकरपुर हाजिर हों के रिव्यू पर।
कहानी
मिस टनकरपुर हाजिर हों की कहानी एक लड़के अर्जुन प्रसाद (राहुल बग्गा) के इर्द गिर्द घूमती है जो कि अपने गांव की जवान पत्नी माया (ऋिषिता भट्ट) से प्यार करता है। गाव के मुखिया सुआल गंडास (अन्नु कपूर) को जब अर्जुन के बारे में पता चलता है तो वो उसे बहुत मारता है और उसपर अपनी पूरे गाव में मशहूर भैंस मिस टनकपुर के साथ बलात्कार का इल्जाम लगाता है। अब पुलिस, अदालत में फंसकर मिस टनकरपुर की क्या दुर्गति होती है और कैसे वो इनम मुश्किलों से पीछा छुड़ाती हैं यही है मिस टनकपुर हाजिर हों की कहानी।
अभिनय
अन्नू कपूर, संजय मिश्रा, ओम पुरी और रवि किशन जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी फिल्म मिस टनकपुर हाजिर हों एक मनोरंजक फिल्म है। सभी कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है। संजय मिश्रा, अन्नू कपूर ने अपने बेहतरीन कॉमेडी सीक्वेंस से लोगों को हंसाने की पूरी तैयारी की है। ऋषिता भट्ट ने भी अपने कुछ ही सीन्स में अच्छा अभिनय किया है।
संगीत
सुष्मित सेन और पलाश मुंचाल ने अच्छा संगीत दिया है। फिल्म में कुछ गाने हैं जो कि कहानी से मेल खाते हैं।
निर्देशन
निर्देशक विनोद कापड़ी जी ने काफी मेहनत की है मिस टनकरपुर हाजिर हों की विषयवस्तु पर। पूरी कोशिश करके फिल्म को बोझिल होने से बचा लिया। तंत्र मंत्र से लेकर पुलिस के चोंचलों तक के विषय को बेहतरीन तरीके से बुना गया है।
देखें या नहीं
मिस टनकपुर हाजिर हों फिल्म एक बार देखने लायक है। हालांकि ये हमारे कमर्शियल सिनेमा के फैंस के लिए नहीं है लेकिन एक गंभीर विषय को फिल्म में खूबसूरती से रखने की कोशिश की गयी है। डबल मीनिंग संवादों के चलते फिल्म हर किसी के लिए देखने योग्य नहीं है।


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