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    Batti Gul Meter Chalu Movie Review: शाहिद कपूर शानदार लेकिन फिर भी 'फ्यूज' हो गई फिल्म

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    Rating:
    2.0/5
    Star Cast: शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, यामी गौतम
    Director: श्री नारायण सिंह

    बुतबुदाते हुए लैंप पोस्ट के नीचे फुल टल्ली होतर ललिता नौटियाल उर्फ नौटी (श्रद्धा कपूर) बोलती है- 'या तो जल जा या बुझ जा बल, ये बंद बुझ बंद बुझ क्या लगा रखे'.. बस फिल्म की यही लाइनें ही समझा देती हैं कि श्री नारायण सिंह की लेटेस्ट डायरेक्टोरियल बत्ती गुल मीटर चालू में क्या दिखने वाला है। फिल्म मेकर ने भारत के छोटे-छोटे कस्बों से जुड़ी बिजली की समस्या और भारीभरकम बिल की इस गंभीर मुद्दे को सटीक तरीके से तो उठाया है लेकिन ढ़ीलेपन ने फिल्म का मजा खराब कर दिया है।

    शुरूआत करते हैं सुशील कुमार पंत (शाहिद कपूर) से, जो कि SK के नाम से जाने जाते हैं। SK, नॉटी और त्रिपाठी (दिव्येंदु शर्मा) बचपन के दोस्त हैं। SK एक धूर्त वकील है जो इधर-उधर चालाकी कर थोड़े-बहुत पैसे कमा लेता है। वहीं त्रिपाठी सिद्धांतो वाला इंसान है। फिल्म का फर्स्ट हाफ दोस्ती और प्यार दिखाने में ही गुजरता है।

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    हालांकि, सबकी जिंदगी तब बदलती है जब नौटी दोनों को एक-एक कर डेट करने का फैसला करती है ताकि वो अपना लाइफ-पार्टनर चुन सके। इसी दौरान दोस्ती के बीच जलन आ जाती है और दिल टूटने का सिलसिला शुरू होता है। जिस तरह पारो के दिल तोड़ने के बाद देवदास शराब में शांति खोजता है वैसे ही एसके ट्रैजडी के बाद अपनी सोए हुए विवेक को जगाने का फैसला लेता है।

    श्री नारायण सिंह की बत्ती गुल मीटर चालू एक सही इरादों वाली फिल्म है लेकिन बस इस फिल्म के इरादे ही सही हैं। डायेक्टर ने समाज का मुद्दा उठा तो लिया लेकिन उसे बॉलीवुड मसाला फिल्म बनाने के चक्कर में फंस गए और पूरी फिल्म ही उलझ गई।

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    भारत से जुड़े मुद्दों पर अपने शानदार काम के लिए पहचाने जाने वाले सिंह इस बार बुरी तरह फेल हो गए हैं। फिल्म में कैरेक्टर्स को ऑथेंटिक दिखाने के लिए उन्होंने इस फिल्म में कुमांउनी का इस्तेमाल किया है। जिसमें बल और ठहरा जैसे शब्द हैं। जिनके डायलॉग्स कुछ ऐसे बने बिजली चली गई बल, मैं तुमसे प्यार करके ठहरी बल... वहीं फिल्न का कोर्टरूम सीन सीरियस कम मजाकिया ज्यादा लगते हैं।

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    परफॉर्मेंस की बात करें तो शाहिद कपूर शानदार लगे हैं खासकर उस सीन में जब उनका किरदार पूरी तरह टूट जाता है और ऑडिएंस को भी बुरी तरह इमोशनल कर देता है। श्रद्धा कपूर बहुत कोशिश करती हैं लेकिन कुमाउंनी लहजा उन्हें बेस्ट दिखाने से रोक देता है। दिव्येंदु शर्मा को छोटा ही रोल मिला है लेकिन वे हर सीन में बेहतरीन दिखे हैं। यामी गौतम ने भी बेस्ट देने की भरपूर कोशिश की है।

    वहीं दूसरी तरफ, फरीदा जलाल, सुप्रिया पिलगांवकर और सुधीर पांडे जैसे एक्टर्स को महज एक प्रॉप बने देखकर काफी खराब लगता है।

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    अंशुमन महालय के कैमरे में उत्तराखंड की खूबसूरती को शानदार तरीके से कैद किया है। वहीं बत्ती गुल मीटर चालू एडिटिंग में कमजोर पड़ जाती है। तीन घंटे की लंबी फिल्म में प्लॉट को बुरी तरह खींचा जाता है और फिल्म काफी थकाऊ हो जाती है। फिल्म के गाने उतने खास नहीं हैं लेकिन निराश भी नहीं करते।

    इस फिल्म में एक डायलॉग है- 'जीतने से ज्यादा लड़ना जरूरी ठहरा' बत्ती गुल मीटर चालू में शाहिद कपूर शानदार परफॉर्मेंस के जरिए ऑडिएंस को रिझाने की पुरजोर कोशिश करते हैं लेकिन ढ़ीला-ढ़ाला निर्देशन और खराब एडिटिंग फिल्म को कमजोर बना देते हैं। हमारी तरफ से इस फिल्म को 2 स्टार।

    English summary
    There's a dialogue in the film which says, 'Jeetne Se Jayada Ladhna Zaruri Thehra.' Shahid Kapoor puts in his sincere efforts, but it's the weak direction and editing which fails to light up the film. I am going with 2 and a half stars here.
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