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    दिलीप कुमार की पुण्यतिथि: सायरा बानो ने लिखा इमोशनल खत, "तकिए में मुंह छिपा लेती हूं कि शायद साहेब आ जाएं"

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    7 जुलाई को मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार के निधन को एक साल पूरे हो गए हैं। उनकी पुण्यतिथि पर सायरा बानो ने अपने साहेब को याद करते हुए एक इमोशनल चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने बताया कि दिलीप साहब के जाने के बाद वो ठीक नहीं हैं। हर रोज़ मुश्किल से बीत रहा है।

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    कोई दिन ऐसा नहीं बीतता जब वो दिलीप साहब से जुड़ा कुछ टीवी पर ना देखें। और वो देख ही नहीं पाती हैं। सायरा बानो ने दिलीप कुमार की पुण्यतिथि पर एक शांति पाठ रखा है जिसमें करीबी दोस्त, परिवार और रिश्तेदार शामिल होंगे।

    सायरा बानो ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि हम सब इकट्ठे होंगे और उनके लिए दुआ पढ़ेंगे कि उन्हें जन्नत नसीब हुई हो और वहां पर वो सुकून में हों। सायरा बानो ने आगे ये भी बताया ऐसा नहीं है कि मैं सच्चाई से वाक़िफ़ नहीं हूं। मुझे भी सच का एहसास है। अल्लाह की मर्ज़ी के आगे हम सब कितने मजबूर है, इस बात का भी एहसास है। लेकिन मुझे केवल इस बात की खुशी है कि यूसुफ साहब मेरे साथ 56 सालों तक रहे।

    मुश्किल से बीता है एक साल

    मुश्किल से बीता है एक साल

    सायरा बानो ने एक भावुक चिट्ठी में लिखा, साहेब के बिना ये एक साल बहुत ही मुश्किल से बीता है। मैं जब बेड पर उन्हें अपने बगल में नहीं देखती हूं तो तकिए में मुंह छिपा लेती हूं और सो जाती हूं। इस उम्मीद में कि सुबह उठूंगी तो शायद वो बगल में लेटे हुए मिल जाएंगे। उनके गुलाबी गाल, सूरज की तरह चमकते हुए दिखाई देंगे। मैं उनकी पत्नी, दोस्त, मां, सहेली, फैन, सब कुछ थी और अल्लाह का मैं इस बात के लिए बहुत शुक्रिया करती हूं।

    12 साल की उम्र से प्यार

    12 साल की उम्र से प्यार

    सायरा बानो ने आगे लिखा कि उन्हें 12 साल की उम्र से दिलीप कुमार से प्यार हो गया था। वो चाहती थीं कि उन्हें यही इंसान, अपने जीवनसाथी के तौर पर चाहिए। हालांकि, जब वो बड़ी हुईं तो उन्हें पता चला कि कितनी लड़कियां मिसेज़ दिलीप कुमार बनने की चाह रखती हैं। लेकिन अल्लाह उन पर मेहरबान हो गया और दिलीप कुमार उनके हो गए। दिलीप कुमार और सायरा बानो की शादी 56 सालों की शादी रही।

    रोने से खुद को रोक नहीं पातीं

    रोने से खुद को रोक नहीं पातीं

    सायरा बानो ने बताया कि आज भी किसी ना किसी चैनल पर दिलीप कुमार की कोई फिल्म आती है। लेकिन वो देख नहीं पाती हैं। उन्हें ये फिल्में देखकर साहेब की याद आती है और रोना आता है। उन्होंने बताया कि वो दिलीप साहब की तस्वीर भी नहीं देख पाती हैं। हालांकि, उनका पूरा स्टाफ रोज़ साथ बैठकर दिलीप साहब की फिल्में देखता है। लेकिन वो चाह कर भी ऐसा नहीं कर पाती। अभी भी उनके अंदर हिम्मत नहीं है।

    7 जुलाई 2021 को निधन

    7 जुलाई 2021 को निधन

    गौरतलब है कि लंबी बीमारी से लड़ने के बाद 7 जुलाई 2021 को भारत के सबसे महान अभिनेता दिलीप कुमार का निधन हो गया। कई सालों से दिलीप कुमार बीमारी चल रहे थे लेकिन उनकी पत्नी सायरा बानो ने उनकी सेहत का पूरा ख्याल रखा था। इतना ही नहीं, सायरा बानो कोरोना काल में भी साए की तरह दिलीप कुमार की सेहत का ख्याल रखा।

    बेटा बनकर संभालते दिखे शाहरूख खान

    बेटा बनकर संभालते दिखे शाहरूख खान

    दिलीप कुमार साहब के निधन से सायरा बानो पूरी तरह टूट गई थीं। उनके दुख में शामिल होने वाले सबसे पहले इंसान थे शाहरूख खान जिन्हें दिलीप कुमार और सायरा बानो अपना बेटा मानते हैं। सायरा बानो और दिलीप कुमार के बच्चे नहीं है लेकिन इंडस्ट्री में कई परिवार उनके बेहद करीब हैं। जब से कोरोना का कहर देश में शुरू हुआ, तब से लगातार सायरा बानो, दिलीप कुमार की सेहत का पूरा ध्यान रख रही थीं। 2020 में दोनों ने अपनी शादी के 54 साल पूरे किए थे लेकिन किसी तरह का कोई जश्न नहीं मनाया था।

    धर्मेंद्र ने भी बांटा दुख

    धर्मेंद्र ने भी बांटा दुख

    दिलीप कुमार के निधन के दौरान, धर्मेंद्र भी सायरा बानो को संभालते नज़र आए थे। सायरा बानो ने दिलीप कुमार के पार्थिव शरीर के पास बैठकर बार बार धर्मेंद्र से कहा कि देखो, साहब ने पलकें झपकाई हैं। इसे सुनकर धर्मेंद्र भी टूट गए थे। उन्होंने ये बातें, अपना दिल हल्का करने के लिए अपने सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। वहीं दिलीप साहब के निधन के कुछ महीनों बाद सायरा बानो को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उस दौरान भी धर्मेंद्र उनकी तबीयत का हाल चाल लेते रहे।

    डॉक्टर ने दी थी सलाह

    डॉक्टर ने दी थी सलाह

    डॉक्टर्स ने सायरा बानो को सलाह दी है कि वो लोगों से घुलना मिलना शुरू करें। सायरा बानो का कहना है कि वो कोशिश बहुत करती हैं लेकिन उनसे ऐसा हो नहीं पाता है। वो मानसिक तौर पर ठीक नहीं हैं। उन्हें केवल दिलीप साहब के लिए जीना आता था। हर चीज़ जो वो देखती हैं या महसूस करती हैं, उसमें उन्हें दिलीप साहब का एहसास मिलता है और ये एहसास छोड़कर वो कहीं और किसी से मिलना नहीं चाहती हैं।

    English summary
    Saira Banu breaks down while remembering Dilip Kumar on his first desth anniversary. In a letter she bears her heart out on how is she coping without her Saaheb.
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