न्यू योर्क फिल्म फेस्ट में 'दायें या बायें'

फिल्म की कहानी नैनीताल के एक छोटे से गावं की हैं, जहाँ रमेश अपने परिवार के साथ रहता है और सपने देखता है। अचानक उन्हें लॉटरी में कार मिल जाता है और फिर उनकी दुनिया में सब कुछ बदल जाता है। इस फिल्म के माध्यम से बेला ने एक अच्छी कहानी कहने की कोशिश की है।
फिल्म की रिलीज में बेला को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ा था। इस फिल्म के निर्माण के अलावा लेखन और संपादन भी बेला ने ही किया है। इस फिल्म को न्यू योर्क की ख़ास श्रेणी में शामिल किया गया है।
4 मई को वह इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की जा रही है। इस फिल्म को न्यू योर्क के ट्रिबेका में दिखाने की व्यस्था की गयी है। बेला इस बारे में कहती हैं, "जब काम और मेहनत रंग लाती है तो बहुत ख़ुशी मिलती है। यह मेरी पहली फिल्म थी और मुझे दर्शकों से ऐसा प्यार मिला है। मेरा हौसला बढ़ा है तो निश्चित तौर पर मैं खुश हूँ और मेरी यही कोशिश होगी की मैं आगे भी ऐसी फिल्में बनती रहूँ।"
बेला हिमाचल प्रदेश की ही रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से अपने राज्य की खूबसूरत कहानी कहने की कोशिश की हैं। बेला ने रेनू सलूजा से संपादन का काम सिखा। फिर हिमाचल के वास्तविक लोकशन पर जाकर शूटिंग की। फिलहाल बेला अपनी इस कामयाबी से खुश हैं और जल्द ही वे एक और अच्छी फिल्म के साथ दर्शकों से रूबरू होने जा रही हैं।


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