कोरोना पॉज़िटिव एक्टर राहुल वोहरा का अस्पताल में निधन, कुछ घंटे पहले मोदी जी से मांग रहे थे बेहतर अस्पताल

कोरोना काल में एक और एक्टर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। दु:खद ये है कि राहुल वोहरा नाम के ये एक्टर और यू ट्यूबर अपनी मौत के कुछ घंटों पहले तक भी खुद को बचाने के लिए लड़ते रहे लेकिन उन्हें मदद मुहैया नहीं हो पाई। राहुल ने अपने निधन के कुछ घंटों पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा।

अपने फेसबुक पोस्ट में राहुल ने अपनी उम्र, बीमारी और अस्पताल का बेड नं. से लेकर वार्ड तक सब लिखा और मोदी जी और मनीष सिसोदिया को टैग कर के अपने लिए बेहतर अस्पताल मांगा।

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राहुल ने इस पोस्ट में बताया कि अगर उन्हें बेहतर अस्पताल मिल जाए तो शायद वो बच जाएं लेकिन अब वो हिम्मत हार चुके हैं। इस अस्पताल में उनका ऑक्सीजन लगातार गिर रहा है और कोई ख्याल रखने वाला नहीं है। उनका परिवार, उनकी सहायता करने में असमर्थ है इसलिए राहुल खुद अपने लिए सहायता मांग रहे हैं।

दु:खद है कि राहुल तक मदद नहीं पहुंच पाई और वो कोरोना से जंग हार गए। जाते जाते राहुल ने लिखा - मुझे भी ट्रीटमेंट मिल जाती तो मैं बच जाता। जल्दी जन्म लूंगा और अच्छा काम करूंगा।

डाला था फेसबुक पोस्ट

डाला था फेसबुक पोस्ट

कुछ ही दिनों पहले, लॉकडाउन पर राहुल का गुस्सा निकला था और उन्होंने एक पोस्ट भी लिखा था। राहुल ने अपने पोस्ट में लिखा, "दिल्ली में #lockdown है सभी को पता है, पर किसके लिए है यह किसी को नहीं पता । लोग तो बाहर निकल ही रहे हैं कुछ दुपहियों पर तो कुछ चारपहियों पर, हाँ बस जो दिहाड़ी मज़दूर है जिसके पास work from home नहीं है वह घर बैठा है ।

कई दिन से कोरोना

कई दिन से कोरोना

"पिछले लगभग 8 दिन से high fever है मुझे जिसका सारा अनुभव एक बार ठीक हो जाने दो फिर साझा करूँगा आप सभी से ।
हाँ तो आज डॉक्टर के परामर्श से CT SCAN कराने मैं पिताजी के साथ उनकी गाड़ी में निकला और जब कराकर लौट रहा था तब एक अभूतपूर्व आँखों को सुकून देने वाला नज़ारा देखा।"

शेयर किए थे अनुभव

शेयर किए थे अनुभव

राहुल ने आगे लिखा - "नमन है ऐसे लोगों को।इस करोना काल में कुछ लोग सड़क के बीचोंबीच माइक और स्पीकर लेकर मज़दूरों से आग्रह कर रहे थे कि कृपया शहर छोड़कर अपने गाँव ना जाए । आपकी देखरेख की जाएगी।

आस पास की बातों पर भी था ध्यान

आस पास की बातों पर भी था ध्यान

"जिस सड़क पर यह कार्यक्रम चल रहा था उसके पीछे आधे स्टेडीयम जैसा पार्क है और सड़क के सामने 2/3 करोड़े की कोठी वाले मज़दूर रहते हैं, आगे 500मीटर right तक और left में बड़ा सा DTC का Bus Depot जिसके सामने एक पेट्रोल पम्प है । उनके स्पीकर की आवाज़ इतनी कि 50 मीटर के बाद आवाज़ सुनायी दे जाए तो बात ही क्या पर क़िस्मत देखो वहाँ से 200 मीटर दूर तक भी कोई ऐसी कॉलोनी नही जहाँ वैसे मज़दूर रहते हों जिन्हें आप और हम मज़दूर कहते हैं।"

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे

"और एक आदमी उनकी विडीओ बना रहा था वही विडीओ एक दिन viral हो जाएगी और कहा जाएगा देखो हमने मज़दूरों को रोका था।
हाँ वह बात अलग है वह बड़े मज़दूर थे जिनके ख़ुद के 2/3 करोड़ के बंगलो थे।" ये पोस्ट जस का तस, राहुल की फेसबुक वॉल से लिया गया है। उनका इस तरह दुनिया से जाना बेहद दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

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