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    INTERVIEW- 'फिल्मों से भी मुझे तालियां मिली, लेकिन सफलता और पहचान OTT से मिली है'- अमित सियाल

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    बहुचर्चित वेब सीरिज़ 'मिर्जापुर 2' अमेज़न प्राइम वीडियो पर 23 अक्टूबर से स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी। इसे दुनियाभर के 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में रिलीज किया जा रहा है। सीरिज में अहम किरदार निभा रहे कलाकार अमित सियाल ने कहा- "मिर्जापुर की पूरी कास्ट, क्रू, सभी उत्साहित हैं कि अब हमारा काम दर्शकों के सामने आएगा। हमने बहुत मेहनत की है।"

    सोनचिड़ैया, रेड, तितली, लव सेक्स और धोखा समेत कई फिल्मों का हिस्सा रहे अभिनेता अमित सियाल को हमेशा ऐसे किरदारों की चाह रही थी जो चुनौतीपूर्ण हो। उनकी तलाश ओटीटी पर आकर खत्म हुई। जमतारा, स्मोक, हॉस्टेजेस, इनसाइड एड्ज, मिर्जापुर जैसे वेब सीरिज से अभिनेता को बड़ी पहचान मिली है। अपने करियर पर बात करते हुए अमित सियाल ने कहा, "मैं काफी भाग्यशाली महसूस करता हूं कि ओटीटी की शुरुआत हुई। मैं हार मानने वाली स्थिति में था। मैंने सोचना शुरू कर दिया था कि कुछ और करना पड़ेगा, लेकिन ओटीटी ने मुझे रोक लिया। मैं खुश हूं।"

    अमित सियाल मिर्जापुर में एसपी राम शरण मौर्य का किरदार निभा रहे हैं। अब जबकि मिर्जापुर 2 की रिलीज में चंद दिन रहे गए हैं, फिल्मीबीट ने अमित सियाल से खास बातचीत की है, जहां उन्होंने अपने किरदार से लेकर अपने करियर में आए संघर्ष के दिन और सफलताओं पर खुलकर बातें की।

    यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

    ‌आपका किरदार दोनों सीजन में रहा है। मिर्ज़ापुर 2 में इसे किस तरह से आकार दिया गया है, बिना spoiler यदि आप कुछ साझा करना चाहें तो?

    ‌आपका किरदार दोनों सीजन में रहा है। मिर्ज़ापुर 2 में इसे किस तरह से आकार दिया गया है, बिना spoiler यदि आप कुछ साझा करना चाहें तो?

    टेक्निकल भाषा में कहूं तो, स्क्रीन टाइम ज़्यादा बड़ा है। कहानी में इस किरदार का जुड़ाव ज़्यादा है। दर्शकों के नज़रिये से कहूं तो यह देखना दिलचस्प होगा कि ये किरदार अब कौन सी राह पकड़ेगा। सेकेंड सीज़न उसी की जर्नी है, कि किस तरह वो इसमें सेटल होता है। मिर्ज़ापुर की दुनिया में बने रहने के लिए वो क्या करता है।‌

    मिर्जापुर के दोनों सीजन के बीच दो सालों का अंतर रहा है। क्या वापस से अपने किरदार के सुर को पकड़ना मुश्किल रहता है?

    जैसे ही आपको एक किरदार मिलता है, हर कलाकार का उसे अप्रोच करने का तरीका अलग अलग होता है। किरदार का सुर पकड़ना होता है। जैसे ही वो सुर आप पकड़ लेते हो तो फिर कुछ मुश्किल नहीं लगता। दो साल क्या, तीन साल के बाद के बाद भी मिर्ज़ापुर आती तो भी शायद किसी भी एक्टर को मुश्किल नहीं होती क्योंकि वो कहीं ना कहीं आपके ज़ेहन में रहती हैं। को-एक्टर्स बहुत सपोर्ट करते हैं। साथ ही हमारे राइटर कमाल के हैं, हमारे डाइरेक्टर कमाल के हैं, वो हमें सहारा देते हैं और हम चल पड़ते हैं।

    ‌आप थिएटर से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं, फिल्मों का भी हिस्सा रहे हैं, और वेब सीरीज़ में भी नाम कमा रहे हैं। बतौर एक्टर किस माध्यम से ज्यादा जुड़ाव महसूस रहते हैं?

    ‌आप थिएटर से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं, फिल्मों का भी हिस्सा रहे हैं, और वेब सीरीज़ में भी नाम कमा रहे हैं। बतौर एक्टर किस माध्यम से ज्यादा जुड़ाव महसूस रहते हैं?

    सच कहूं तो तीनों ही माध्यम मेरे लिए खास रहे हैं और मुझे बहुत मज़ा आया है। आप जब काम करते हो तो आपको नई नई चीजें पता चलती हैं। सिर्फ क्राफ्ट को लेकर ही नहीं बल्कि एक इंसान के नाते भी आपको पता चलता है.. कि अच्छा मैं ये भी कर सकता हूं। थिएटर के अपने मज़े थे, फ़िल्म और सीरीज़ तो कुछ ज़्यादा जुदा नहीं है, तकनीकी रूप में भी। लेकिन मैं ये ज़रूर मानता हूं कि ओटीटी ने मुझे सफलता ज़्यादा दी है। लोग मेरा काम देखने लगे गए, मुझे पसंद करने लग गए। मुझे अच्छे काम मिले। और ये सिर्फ मेरा लक नहीं था, बल्कि ये इसीलिए हुआ क्योंकि ओटीटी ज़्यादा साहसी माध्यम है, यहां रिस्क-टेकिंग वाली चीज है। मैं काफी भाग्यशाली महसूस करता हूं कि ओटीटी की शुरुआत हुई।

    ‌मिर्ज़ापुर सीरीज़ की बात करें तो लेखन के साथ साथ शो की कास्टिंग भी काफी चर्चा में रही है। एक से बढ़कर एक कलाकार इसमें शामिल रहे। सबके साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?

    ‌मिर्ज़ापुर सीरीज़ की बात करें तो लेखन के साथ साथ शो की कास्टिंग भी काफी चर्चा में रही है। एक से बढ़कर एक कलाकार इसमें शामिल रहे। सबके साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?

    जब इतने कमाल के एक्टर्स हों न साथ में तो sub conscious स्तर पर ही आपके अंदर और ज़्यादा मेहनत करने की भावना आ जाती है। जब तीन एक्टर या चार एक्टर पूरी तैयारी के साथ, एक साथ स्क्रीन पर अभिनय करते दिखते हैं, तो उसका मज़ा ही अलग होता है। किसी भी प्रोजेक्ट को अच्छा बनाने में कास्टिंग बहुत अहम होता है। तो मिर्ज़ापुर में मुझे लगता है, बहुत ही महीन तरीके से, बहुत ही सोच समझकर कास्टिंग की गई है।

    ‌एक इंटरव्यू में आपने कहा था कि 'My career was dying, OTT saved me'। फिल्मों में आपको किस तरह के किरदार की तलाश थी, जो नहीं मिली और वह तलाश ओटीटी पर खत्म हुई?

    ‌एक इंटरव्यू में आपने कहा था कि 'My career was dying, OTT saved me'। फिल्मों में आपको किस तरह के किरदार की तलाश थी, जो नहीं मिली और वह तलाश ओटीटी पर खत्म हुई?

    मिल तो सब रहा था, लेकिन जो frequency होनी चाहिए काम मिलने की वो बहुत धीमी थी। मैंने लव सेक्स और धोखा किया, तितली की, और भी 10-12 फिल्में की। लोग जो कहते हैं ना कि अच्छे एक्टर की पहचान एक दो सीन से भी हो जाती है, तो वो तो हो गया। लोगों को पता चल गया कि मैं अच्छा काम करता हूं, लेकिन उसके बाद क्या? एक प्रमोशन भी तो होनी चाहिए ना। वर्ना पता चला आप हमेशा दो- तीन सीन ही करते रहे, लोग ताली बजाते रहे। तो मैं ये बात नहीं मानता कि छोटा बड़ा एक्टर कुछ नहीं होता। रियल लाइफ में ये सारी बातें काम नहीं आती हैं। आप लीडिंग मैन हो तो आप लीडिंग मैन हो, आपका भविष्य ज़्यादा उज्ज्वल है। तो मुझे भी अपने ऊपर जिम्मेदारी चाहिए थी कि मुझे बड़े रोल दो, मैं कर के दिखाता हूं। मुझे लगता है कि ओटीटी से मुझे वो विश्वास मिला है। वर्ना मैं खो रहा था, मैं हार मानने वाली स्थिति में था। मैंने सोचना शुरू कर दिया था कि कुछ और करना पड़ेगा, लेकिन ओटीटी ने मुझे रोक लिया, मैं खुश हूं।

    ‌कह सकते हैं कि Ott की सफलता से फ़िल्म करियर को भी कुछ फायदा मिलता है?

    ‌कह सकते हैं कि Ott की सफलता से फ़िल्म करियर को भी कुछ फायदा मिलता है?

    बिल्कुल होता है और होगा भी। कोई भी मीडियम आपको दूसरे मीडियम में जाने से रोक नहीं सकता, जब तक आप सीखने के लिए तैयार रहते हो। और ओटीटी फिल्मों से कुछ खास अलग नहीं है, बल्कि यहां ज़्यादा detailing से काम होता है। टेलीविजन थोड़ा अलग है, मुझे वो और ज़्यादा मेहनत का काम लगता है।

    ‌मिर्ज़ापुर 2 के ट्रेलर को प्यार तो काफी मिला, लेकिन साथ कुछ निगेटिव प्रतिक्रिया भी देखने को मिली, 'बॉयकॉट मिर्ज़ापुर' ट्रेंड किया जा रहा था। ऐसे में, अब जबकि शो रिलीज़ पर है, क्या टीम को इस दिशा में फिक्र है? आप खुद सोशल मीडिया ट्रेंड या ट्रोल्स को किस तरह देखते हैं ?

    ‌मिर्ज़ापुर 2 के ट्रेलर को प्यार तो काफी मिला, लेकिन साथ कुछ निगेटिव प्रतिक्रिया भी देखने को मिली, 'बॉयकॉट मिर्ज़ापुर' ट्रेंड किया जा रहा था। ऐसे में, अब जबकि शो रिलीज़ पर है, क्या टीम को इस दिशा में फिक्र है? आप खुद सोशल मीडिया ट्रेंड या ट्रोल्स को किस तरह देखते हैं ?

    सीधी सी बात है, हम सब स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं। जिसको बॉयकॉट करना है बॉयकॉट करे, जिसको देखना है देखे, जिसको बॉयकॉट बोल के छुप छिपा के देखना है, वो भी कर ले। तो इस पर मैं तो जज ही नहीं करता किसी को। बाकी तो सीरीज़ की रिलीज़ के साथ पब्लिक खुद ही बता देगी, क्या है क्या नहीं। जिस तरह का रिस्पॉस आया है, मुझे तो नहीं लगता कोई बॉयकॉट करने वाला है।

    ‌मिर्ज़ापुर सीरीज़ से जुड़ी कोई एक बात, जो आपको सबसे खास लगती है, जो आप दर्शकों को बताना चाहें कि क्या वजह इसे दूसरी सीरीज़ से अलग बनाती है?

    बहुत सारे कारण हैं (हंसते हुए) , लेकिन रिलीज़ से पहले मैं कुछ बताना नहीं चाहूंगा। मुझे पता है लोग देखेंगे ही देखेंगे। कह सकता हूं कि पहला सीजन ही सबसे बड़ा कारण है कि लोग मिर्जापुर 2 देखेंगे।

    English summary
    In an exclusive interview with Filmibeat, actor Amit Sial opens up on his role in Mirzapur 2, his struggle in films and success in OTT platforms.
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