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    जन्मतिथि: विनोद खन्ना का 'विलेन' से सुपरस्टार बनना, लेकिन क्यों सब छोड़ बन गए संन्यासी

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    मशहूर बॉलीवुड स्टार और सांसद विनोद खन्ना एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर विलेन के किरदार के की लेकिन उनकी एक्टिंग उन्हें लीड हीरो तक खींच लाई। साल 2017 में दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। लेकिन आज वो दिन है जब विनोद खन्ना ने पाकिस्तान के पेशावर में जन्म लिया और एक सामान्य से परिवार से आने वाला लड़का बॉलीवुड पर राज करने लगा। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि शानदार करियर और राजनीति व परिवार सब कुछ छोड़कर एक दिन विनोद खन्ना संन्यासी बन जाएंगे। जी हां, सबकुछ छोड़छाड़ कर विनोद खन्ना ने साधु संत की जिंदगी जीने का फैसला ले लिया था, लेकिन फिर जिंदगी में ऐसा घटा कि उन्हें दोबारा अपनी जिंदगी में वापस लौटना ही पड़ा। आइए विनोद खन्ना के जन्मदिन पर उनके करियर, उनकी जिंदगी के सफर को फिर से तरोताजा करते हैं।

    पुण्यतिथि: विनोद खन्ना ने शानदार करियर छोड़ ले लिया था संन्यास, अंतिम दिनों में हो गई थी ऐसी हालत

    हिंदी सिनेमा के मोस्ट हैंडसम हीरो के तौर पर पहचान बनाने वाले विनोद खन्ना ने अपने करियर में मुकद्दर का सिकंदर, हेरा फेरी और अमर अकबर एंथनी से लेकर परवरिश तक ढेरों फिल्में ऐसी की जिन्हें आज भी खूब देखा जाता है। लेकिन विनोद खन्ना ने अपने शुरुआती करियर में छोटे मोटे रोल और विलेन के रोल किए। लेकिन इन किरदारों के जरिए वह ये तो अच्छे से साबित कर चुके थे कि वह टॉप स्टार्स बनने की खूबी रखते हैं।

    फिल्म मन का मीत में विनोद खन्ना

    फिल्म मन का मीत में विनोद खन्ना

    यही वजह है कि सुनील दत्त की नजर कद काठी में शानदार और दिखने में एकदम जबरदस्त विनोद खन्ना पर पड़ी। पहली बार इंडस्ट्री में विनोद खन्ना को सुनील दत्त की वजह से ही काम मिला। साल 1969 में सुनील दत्त की फिल्म मन का मीत में विनोद खन्ना को कास्ट किया गया। इस फिल्म में उन्हें रोल मिला विलेन का। फिल्म में हीरो के तौर पर सुनील दत्त के भाई सोम दत्त नजर आए।

    जब विलेन किरदार में दिखे विनोद खन्ना

    जब विलेन किरदार में दिखे विनोद खन्ना

    फिल्म में बेशक लीड रोल सोमदत्त का हो लेकिन लंबी कद काठी वाले विनोद खन्ना को लोग भूला नहीं पाए। इस फिल्म के बाद भी कई सालों तक विनोद खन्ना को लीड रोल तो नहीं मिल पाया। वह पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा और आन मिलो सजना जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर नजर आए।

    फिल्म मेरे अपने में

    फिल्म मेरे अपने में

    फिर हुआ यूं कि गुलजार द्वारा निर्देशित और लिखित फिल्म मेरे अपने में पहली बार विनोद खन्ना को लीड रोल मिला। ये फिल्म बांगला फिल्म आपनजन का हिंदी रूपांतर था, इस फिल्म में विनोद खन्ना के अलावा मीना कुमार, शत्रुघ्न सिन्हा और सुमिता सान्याल जैसी स्टार्स नजर आए।

    हैंडसम सुपरस्टार

    हैंडसम सुपरस्टार

    इस फिल्म के बाद अचानक, इम्तिहान, इंसाफ, दयावान, चांदनी, महादेव, पुलिस और मुजरिम, सत्यमेव जयते जैसी ढेरों फिल्में विनोद खन्ना करते गए और करियर के इस स्टेज तक आते आते वह इंडस्ट्री के चार्म एक्टर के तौर पर उभर कर सामने आए।

    संन्यासी

    संन्यासी

    विनोद खन्ना का करियर शानदार चल रहा था लेकिन एक दिन अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके संन्यासी जीवन बिताने का फैसला किया। साल 1982 में विनोद खन्ना ने रजनीश यानी ओशो के आश्रम में संन्यासी बने अमेरिका चले गए। बताया जाता है कि यहां आश्रम में विनोद खन्ना माली से लेकर टॉयलेट साफ करने का काम तक किया करते थे। लेकिन पांच साल बा विनोद खन्ना का आश्रम से भी मन उचट गया और वह भारत वापस लौट आए।

    English summary
    Vinod khanna birthday: Vinod khanna started career as villain then turn hero and then Sanyasi
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