केवल 15 दिन में शूट हुई थी उर्मिला मातोंडकर की ये फिल्म, बेस्ट साईकोलॉजिकल थ्रिलर
उर्मिला मातोंडकर और मनोज बाजपेयी स्टारर कौन की रिलीज़ को 22 साल पूरे हो चुके हैं। रामगोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था अनुराग कश्यप ने और अनुराग को अपनी लिखी ये फिल्म इतनी नापसंद थी कि वो रिलीज़ के दो ही दिन बाद इस फिल्म के बारे में सब भूल गए थे।
हालांकि, आज भी उर्मिला मातोंडकर की ये फिल्म हिंदी फिल्मों की बेस्ट साईकोलॉजिकल फिल्मों की लिस्ट में टॉप पर ही रहती है। इस फिल्म की शूटिंग केवल 15 दिनों में पूरी कर ली गई थी।

दिलचस्प ये है कि फिल्म में केवल तीन ही किरदार थे - उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी और सुशांत सिंह। वहीं इससे भी ज़्यादा दिलचस्प ये था कि पूरी फिल्म में उर्मिला मातोंडकर का कोई नाम ही नहीं था। अगर आपको भी ये बातें याद नहीं है तो आपको ये फिल्म देखने की ज़रूरत है।
और अगर आपको कौन के बारे में ये बातें याद हैं तो हम आपको फटाफट दे देते हैं बॉलीवुड की बेस्ट साईकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों की एक शानदार सी लिस्ट

गुमनाम
फिल्म गुमनाम है कोई गाने के लिए आज तक फेमस हो। फिल्म के बारे में ज़्यादा कुछ बताएंगे तो मज़ा किरकिरा हो जाएगा। फिल्म देखिएगा ज़रूर।

वो कौन थी
एक अंधेरी रात में एक डॉक्टर से एक लड़की लिफ्ट मांगती है। और फिर एक कब्रिस्तान के बाहर गायब हो जाती है। यहीं से कहानी शुरू होती है और इसी गुत्थी पर खत्म होती है कि वो कौन थी।

बीस साल बाद
फिल्म में एक भूत है जो अपने रेप का बदला ले रही है। वो ठाकुर को और उसके बेटे को मारती है। 20 साल बाद ठाकुर का पोता लौटता है और गांव वाले उसे आगाह करते हैं कि उसकी मौत भी तय है।

खामोश
फिल्म विधु विनोद चोपड़ा ने बनाई थी और एक बॉलीवुड सेट पर हो रहे एक के बाद एक मर्डर की कहानी थी। अगर आपने ये फिल्म नहीं देखी और कहीं मिले तो देखिएगा ज़रूर।

100 डेज़
इस फिल्म में माधुरी दीक्षित जो भी देखती हैं वो सच हो जाता है। लेकिन उन सपनों का कुछ मतलब होता है। वो अपनी बहन का मर्डर देखती हैं। और इसके बाद फिल्म की कहानी दिलचस्प मोड़ ले लेती हैं।

13 बी
फिल्म एक आदमी की कहानी है जो परिवार सहित एक फ्लैट में रहता है। उसकी पत्नी एक सीरियल बहुत ज़्यादा देखती है। लेकिन फिर जो जो सीरियल में होता है वो परिवार में भी होने लगता है।

404 एरर नॉट फाउंड
अगर आपने ये फिल्म नहीं देखी है तो कहीं से ढूंढिए और देखिएगा ज़रूर। फिल्म कुछ कॉलेज स्टूडेंट्स की कहानी है। एक नए स्टूडेंट को 404 नंबर कमरा मिलता है जहां पहले ही एक स्टूडेंट ने सुसाइड किया होता है।

नैना
फिल्म एक अंधी लड़की की कहानी थी जिसे आंखें ट्रांसप्लांट की जाती है। लेकिन इसके बाद उसे अजीब अजीब सी चीज़ें दिकाई देने लग जाती हैं।

फोबिया
राधिका आप्टे स्टारर ये फिल्म एक लड़की की कहानी है जो बाहर निकलने से डरती है। और खुद को अपने घर में बंद कर लेती है। क्यों और किससे डर कर वही फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू है।

भूलभुलैया
अक्षय कुमार और विद्या बालन स्टारर ये फिल्म पिछले दशक की बेस्ट साइकोलॉजिकल थ्रिलर कही जाएगी। विद्या बालन एक राजकुमार से शादी करती हैं लेकिन उनके महल में एक आत्मा है, जिसे विद्या नहीं मानती। लेकिन क्या वो आत्मा विद्या खुद हैं?

कौन
बात जहां से शुरू हुई, वहीं पर खत्म ना हो तो फिर साईकोलॉजिकल थ्रिलर कैसी। वैसे अगर उर्मिला मातोंडकर को देखे काफी समय हो गया है तो ये फिल्म आज के आज ही वापस देख डालिए। कल वीकेंड भी है! #HappyWeekend


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