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कितना झूठा है बॉलीवुड..अक्षय से लेकर सलमान तक..जीरो या हीरो

Written By: Utkarsh
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"खुफिया एंजेंसियों के एजेंट्स की जिंदगी रोमांच से भरी होती है। दुश्मन अगर पकड़ भी ले तो किसी हीरो की तरह ये एजेंट्स धमाकेदार एक्शन करते हैं और निकल जाते हैं। और तो और उनकी लव लाइफ भी अमेजिंग होती है" लेकिन ऐसा केवल अनरियलिस्टिक बॉलीवुड फिल्मों में ही, असल में इन खुफिया एजेंट की जिंदगी सरबजीत की तरह जेल में सड़ कर ही खत्म हो जाती है।

हाल ही में जाधव का मामला ले लीजिए, पाकिस्तानी सरकार ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को भारत का खुफिया एजेंट बताते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई है। जाधव को 2016 में नेपाल के पास से पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी जबरन उठाकर ले गए थे। जिसके बाद भारत को मिले सरबजीत के जख्म फिर से हरे हो गए हैं। बवाल मचा हुआ है लेकिन कोई कुछ करने की सूरत में नजर नहीं आ रहा।

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रियल लाइफ में सीक्रेट एजेंट्स की ये दशा है, वहीं बॉलीवुड के सीक्रेट एजेंट्स असलियत से बिल्कुल अलग और ग्लैमरस दिखाई देते हैं। इस तरह की घटनाओं से साफ है कि बॉलीवुड को ग्लैमर, रोमैंस और हीजोइज्म से हटकर रियलिस्टिक सिनेमा की तरफ जाने की जरूरत है। आगे की स्लाइड में देखें सीक्रेट एजेंट्स पर बनी बॉलीवुड की कुछ ऐसी ही फिल्में और उनमें खो चुकी असलियत-

एक था टाइगर

एक था टाइगर

इस फिल्म को रवीन्द्र कालिया के जीवन से प्रेरित फिल्म बताया जाता है। सलमान ने रॉ के अंडर कवर एजेंट की भूमिका इस फिल्म में निभाई थी जिसे पता चलता है कि एक वैज्ञानिक की केअरटेकर वह पाकिस्तान के लिए काम करती है। कबीर खान द्वारा निर्देशित ये फिल्म ब्लॉकबस्टर तो हुई, वहीं इस फिल्म में दो देशों के खुफिया एजेंट्स के बीच ड्रामेटिक लव स्टोरी दिखाई गई, इन किरदारों को कुछ ज्यादा ही ग्लैमरस दिखाया गया है। जो कि हकीकत से एकदम अलग है।

बेबी

बेबी

एक्शन स्पाय थ्रिलर 'बेबी' में रॉ के काम करने की शैली को बारीकी से निर्देशक नीरज पांडे ने दिखाया था। अक्षय कुमार ने अंडरकवर एजेंट अजय सिंह राजपूत की भूमिका निभाई थी। फिल्म को काफी सराहा गया, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षानुरूप सफलता नहीं मिली।इस फिल्म में अक्षय कुमार के जबदस्त एक्शन के साथ अनरियलिस्टिक हीरोइज्म पर जोर दिया गया था।

डी डे

डी डे

इस फिल्म का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया था। इरफान खान ने इसमें रॉ के स्पेशल एजेंट की भूमिका निभाई थी जो पाकिस्तान में डी कंपनी के हर कदम पर नजर रखता है। इस फिल्म को चर्चा तो खूब मिली थी लेकिन सफलता नहीं मिली। थ्रिलर के शौकीनों को यह फिल्म पसंद आई थी। वहीं फिल्म बेहतरीन होते हुए भी कहीं न कहीं रियलिस्टिक फैक्टर में पीछे रह गई।

मद्रास कैफे

मद्रास कैफे

सुजीत सरकार की मद्रास कैफ एक रॉ एजेंट पर बनी बेहतरीन फिल्म है। इस पॉलिटिकल थ्रिलर का ताना-बाना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या और उसमें लिट्टे की भूमिका के इर्दगिर्द बुना गया है। फिल्म रियल सिचुएशन की महज कल्पना भर ही थी।

फैंटम

फैंटम

हुसैन जैदी की किताब 'मुंबई एवेंजर्स' पर आधारित इस फिल्म में सैफ अली खान लीड रोल में थे। इस फिल्म में रॉ एक ऐसे कवर्ट ऑपरेशन को अपने एजेंट के जरिये अंजाम देता है जो 26/11 मुंबई टेरर अटैक के पीछे मास्टर माइंड थे। वहीं फिल्म में फिर से रियलिस्टिक फैक्टर की कमी थी।

नाम शबाना

नाम शबाना

बेबी के एक किरदार को लेकर 'नाम शबाना' बनाई गई। महिला सीक्रेट एजेंट पर बनी यह बॉलीवुड की पहली फिल्म मानी जा सकती है। सीक्रेट एजेंट बन कर वह अपने पहले ही मिशन में किस तरह कामयाब होती है यह फिल्म में दिखाया गया। जो कि कहीं न कहीं असलियत से जुड़ा नहीं लगता।

द ग्रेट गैम्बलर

द ग्रेट गैम्बलर

यूरोप में फिल्माई गई 'द ग्रेट गैम्बलर' में अमिताभ बच्चन ने अंडरकवर कॉप की भूमिका निभाई थी जो बदमाशों से कांफिडेंशियल डॉक्यूमेंट हासिल करने की कोशिश करता है जिसके कारण देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस फिल्म में ग्लैमर का तड़का असलियत से परे था।

एजेंट विनोद

एजेंट विनोद

श्रीराम राघवन ने सैफ अली खान को लेकर एजेंट विनोद बनाई जो कोड क्रेक करते-करते पाकिस्तान जा पहुंचता है। फिल्म स्टाइलिस्ट थी और कई लुभावने क्षण भी फिल्म में थे, लेकिन यह फिल्म प्रभावित नहीं कर पाई।फिल्म में स्पाई की भूमिका इतनी ग्लैमरस थी कि यकीन करना मुश्किल था।

सुरक्षा

सुरक्षा

मिथुन चक्रवर्ती अभिनीत फिल्म 'सुरक्षा' अब बी-ग्रेड जैसी फिल्म लग सकती है, लेकिन उस दौर में कम बजट में एक जेम्स बांड नुमा फिल्म बनाने का प्रयास किया गया था। फिल्म की कल्पना ही हकीकत से बहुत दूर है।

द हीरो- लव स्टोरी ऑफ ए स्पाय

द हीरो- लव स्टोरी ऑफ ए स्पाय

अनिल शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म अपने समय की सबसे महंगी फिल्म थी। सनी देओल एक कवर्ट ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। कश्मीरी लड़की प्रीति जिंटा, सनी की सहायक बन दुनिया को न्यूक्लियर बम हमले से बचाने में मदद करती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत रही थी। इस फिल्म में भी बाकी सब छोड़कर हीरोइज्म पर तगड़ा जोर दिया गया था।

English summary
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