Malaika Arora के पिता की मौत की खबरों में उलझा रहा सोशल मीडिया, उधर कम उम्र में चली गई इस फेमस सिंगर की जान

Mangey Khan Dies: इस वक्त पूरा सोशल मीडिया मलाइका अरोड़ा के पिता की मौत की खबरों से भरा पड़ा है और इस बीच एक खबर ऐसी भी आ रही है, मनोरंजन जगत के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। अमरस रिकॉर्ड्स के बैंड बाड़मेर बॉयज के लीड सिंगर और मशहूर राजस्थानी फॉक सिंगर मांगे खान का बुधवार को निधन हो गया।
49 साल की उम्र में हुआ निधन
मांगे खान (Mangey Khan Demise) सिर्फ 49 वर्ष के थे। खान दिल की बीमारी से पीड़ित थे और हाल ही में उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी। मांगे खान के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। मांगे खान (Mangey Khan Songs) के कई गाने फेमस हैं और अपने पार्टनर्स सवाई खान और मगदा खान के साथ देश और दुनिया के कई हिस्सों में जाकर अपने हुनर को दिखाते थे।
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आशुतोष शर्मा ने किया कन्फर्म
अमररस रिकॉर्ड्स के फाउंडर आशुतोष शर्मा ने यह दुख भरी खबर बताते हुए कहा, "मांगे के निधन से एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरा नहीं जा सकता। वह एक अच्छे दोस्त और एक खूबसूरत आवाज वाले अद्भुत इंसान थे। इतनी कम उम्र में उनकी दुखद मौत ना केवल उनके परिवार और हमारे लिए बल्कि म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए भी एक बहुत बड़ा नुकसान है। एक ऐसी आवाज जिसे कभी बदला नहीं जा सकता।"
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2010 में हुई थी मुलाकात
शर्मा ने बताया कि अस्पताल जाते समय उनकी बातचीत हुई और सिंगर ने उनसे कहा, "तबीयत-जोरदार, मिलते हैं ऑपरेशन के बाद।" शर्मा ने बताया उनकी खान से मुलाकात 2010 में हुई थी, जब वे राजस्थान के बाड़मेर में रामसर गांव में रुक्मा बाई की रिकॉर्डिंग के लिए गए थे, जो पब्लिक में परफॉर्म करने वाली पहली महिला मांगनियार सिंगर थीं।
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कोक स्टूडियो के लिए भी गाया
मांगे खान (Mangey Khan Coke Studio) उनके पड़ोसी थे और हारमोनियम पर उनके साथ थे। बाई के गानों की रिकॉर्डिंग पूरी करने के बाद, खान ने भी उनके गानों को रिकॉर्ड करने की इच्छा जताई। शर्मा ने कहा, 'हम उनकी आवाज और सिंगिंग से हैरान हो गए थे। उस शाम हमने मांगे के साथ अपने पहले दो गाने रिकॉर्ड किए - 'छल्ला छल्ला' और 'पीर जलानी', जिसे कोक स्टूडियो ने फिर से तैयार किया।'
बाड़मेर बॉयज़ ने 2011 में दिल्ली के सिरी फोर्ट में एक परफॉर्मेंस के साथ शुरुआत की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे मंगनियार म्यूजिक के ग्लोबल अंबेसडर बन गए, जो राजस्थानी फोक म्यूजिक और क्लासिकल म्यूजिक में सूफीवाद को जोड़ता है।


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