स्टेनली का डब्बा कहानी

    स्टेनली का डब्बा वर्ष 2011 में रिलीज हुई फिल्म है, जिसका निर्देशन अमोल गुप्ते ने किया है। फिल्म में मुख्य भूमिका में दिव्या दत्ता, पार्थो गुप्ते, दिव्या जगदले, राज जुत्शी, अमोल गुप्ते नजर आये। फिल्म 13 मई 2011 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। 

    यह कहानी है स्टैलनी की। स्टैलनी अपने स्कूल में सबसे होनहार छात्र है। उसे स्कूल के सभी टीचर प्यार करते हैं। वह कहानी कहने व कविताएं बनाने में भी उस्ताद है। उसकी एक टीम भी है। जिसके दोस्त उसे बेहद प्यार करते हैं। फिल्म की कहानी में एक अहम मुद्दे को डब्बे के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है। स्टैलनी अच्छा गाता है, अच्छा डांस करता है और अच्छी कविताएं भी बनाता है। अपनी हरकतों से ही वह औरों से अलग है। होली स्कूल के कई टीचर उससे प्यार करते हैं लेकिन रोजी मिस उसे सबसे अधिक चाहती है। इन्हीं शिक्षकों में से एक है वर्माजी। वर्माजी को दूसरों का डब्बा खाने की बुरी लत है। वे खुद दूसरों का डब्बा खाते हैं लेकिन स्टैलनी के डब्बे न लाने की वजह से वे उसे बातें सुनाते हैं और स्कूल से बाहर निकाल देते हैं। कहानी यहां से मोड़ लेती है और धीरे धीरे स्टैलनी के बारे में दर्शकों को एक ऐसी सच्चाई पता चलती है जिसके बाद दर्शक दंग रह जायेंगे।

    यह यकीनन मानना होगा कि शिक्षक व छात्र के बीच के रिश्ते को सोचने व सहजेने में व फिर उसे कहानी के रूप में गढ़ने में अमोल गुप्ते का जवाब नहीं। उन्होंने तारें जमीं पर के माध्यम से भी बेहतरीन तरीके से एक शिक्षक व छात्र की कहानी गढ़ी। इस फिल्म के माध्यम से भी अमोल गुप्ते ने शिक्षकों के मन की मनःस्थिति को समझने की कोशिश की है। गौर करें, तो इस फिल्म में यह भी बात गौर करनेवाली है। शिक्षक व लालची वर्मा की स्थिति भी कभी बचपन में शायद स्टैलनी की तरह ही रही होगी। चूंकि दोनों ही किसी न किसी वजह से डब्बा नहीं लाते। स्टैलनी जैसे बच्चों की कहानी उन तमाम बच्चों की कहानी है जो पढ़ाई के साथ साथ गुजारे के लिए होटलों में भी काम करते हैं।
     
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