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पीके (U/A)

पाठकों द्वारा समीक्षा

रिलीज़ डेट

19 Dec 2014
कहानी
पीके एक राजनीतिक व्यंग्य है, जो कि समाज में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता है। निर्देशक राजकुमार हिरानी के मुताबिक फिल्म भगवान और उसके भक्तों पर व्यंग्य करती है।

कथानक

एक एलियन (आमिर खान) बिना किसी चीज के पृथ्वी पर आता है, उसके पास कपड़े तक नहीं है सिवाय उसके लाॅकेट के जो कि उसका रिमोट है और उसी के सहारे अंतरिक्ष यान को बुलाकर वह अपने ग्रह पर वापस जा सकता है लेकिन कुछ समय के भीतर ही उस एलियन यानी आमिर खान से लाॅकेट लूट लिया जाता है। वह उसे वापस पाने का प्रयास करता है मगर असफल रहता है। वह ऐसी धरती पर आ गया है जो कि उसके घर से बिल्कुल अलग है। यहां वह धीरे धीरे पैसों और कपड़ों का मतलब समझता है।

एक बार, जब वह अपने जीवन के लिए चल रहा होता है, भैरो सिंह (संजय दत्त) की गाड़ी से लड़ जाता है। उसे लगता है कि इस एलियन की याददाश्त जा चुकी है और वह किसी को पहचान नहीं पा रहा है। वह उस एलियन को अपने साथ ले जाता है और धरती के रीति रिवाजों को समझाने में उसकी मदद करता है। वह पृथ्वी पर कोई भी भाषा समझ नहीं पाता है और वह महिला के हाथों से उसकी भाषा को अपने अंदर लेने की कोशिश करता रहता है। भैरों को लगता है कि एलियन औरतों की तरफ ज्यादा प्रभावित है इसलिए वह उसे नाइट क्लब में लेकर जाता है जहां वह हाथ पकड़ने के लिए अब स्वतंत्र था। 6 घंटे के स्थानांतरण के बाद फुलझडि़या (रीमा देबनाथ) नाम की लड़की से वह उसकी भाषा सीख जाता है।

बात करने के लिए सक्षम होने के बाद, पीके अपने दोस्त भैरों को बताता है कि किसी ने उसका लाॅकेट चुरा लिया है। तो भैरों उसको बताता है कि पकड़े जाने के डर से चोर यहां उसका लाकेट नहीं बेचेंगा और हो सकता है कि वह चोर दिल्ली चला गया हो। तो पीके दिल्ली जाता है और वहां अपने लाकेट को ढूंढने की कोशिश करता है जहां उसे हर जगह से केवल यही पंक्तियां सुनने को मिलती हैं कि केवल भगवान तुम्हारी मदद कर सकते हैं। अब वह भगवान को ढूंढने का निर्णय करता है और इस पूरी प्रक्रिया के अंत में वह इस उलझन में रह जाता है कि किस धर्म के भगवान को खोजूं।

इस बीच, सब यह समझते कि उसने पी रखी है और इसी वजह से उसका नाम पीके पड़ जाता है।

एक दिन, टीवी रिपोर्टर जगतजननी (अनुष्का शर्मा), जिसे लोग जग्गू भी बुलाते हैं, आश्चर्यचकित हो जाती है जब वह पीके को ‘मिसिंग गाॅड’ नामक पोस्टर बांटता हुआ देखती है। वह उसका पीछा करती है, यह सिलसिला तब तक चलता है जब वह उसे मार खाने से बचाती है क्योंकि वह मंदिर से पैसे चुरा रहा होता है। वह हर चीज की पूछताछ करती है और इसे अपने चैनल पर प्रसारित करती है। जग्गू पीके को उसका लाकेट दिलाने मेें मदद करती है ताकि वह अपने ग्रह पर वापस जा सके। उसका लाकेट तपस्वी महाराज (सौरभ शुक्ला) के पास होता है।  जग्गू और पीके तय करते हैं कि एक नाटक की मदद से वह लाकेट पाने करा प्रयास करेंगे और वे दावा करते हैं कि तपस्वी महाराज असल में भगवान का नहीं, गलत नंबर मिला रहे थे।

इसी बीच, पीके को जग्गू से प्यार हो जाता है लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि जग्गू सरफराज (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार करती थी और उससे शादी करना चाहती थी लेकिन एक गलतफहमी की वजह से उसने यह विचार त्याग दिया था। वहीं दूसरी ओर, भैरो सिंह चोर को पकड़ लेता है और उसे लेकर दिल्ली पहुंच जाता है लेकिन वहां एक बम ब्लास्ट में दोनों की मौत हो जाती है। जग्गू के न्यूज चैनल में एक टी.वी. शो के दौरान पीके और तपस्वी महाराज में टकराव होता है। जग्गू के बाॅस की मदद से वह यह साबित कर देता है कि सरफराज गलत नहीं था जिसके बदले में उसे अपना लॉकेट मिल जाता है।
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