ब्लैकबोर्ड vs व्हाइटबोर्ड एक हिंदी फिल्म है जिसे तरुण बिस्ट ने निर्देशित किया है। फिल्म में रघुवीर यादव, अलिस्मिता गोस्वामी, अशोक समर्थ, अखिलेंद्र मिश्रा और पंकज झा मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म ग्रामीण क्षेत्र की हिंदी मीडियम स्कूलों की समस्याओं पर आधारित है। मुख्य कहानी: फिल्म में एक व्यक्ति अमित की कहानी को दिखाया गया है। अमित अपनी स्कूल की परीक्षाओं को पास करने के लिए संघर्ष करता है। और प्रतियोगिताओं से डरता है। हालांकि, कड़ी मेहनत करके वह अपनी पढ़ाई पूरी करता है और अपने माता-पिता की मदद से एक प्राथमिक शिक्षक बन जाता है, और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये उन्हें नये तरीके से पढ़ाता है। तभी वहां एक महिला पत्रकार आती है और स्कूल में फैली गंदगी से लेते हर अव्यवस्था को टीवी पर दिखाने की बात कहती है। लेकिन अमित उससे एक मौका देने की बात कहता है और महिला पत्रकार का चैलेंज स्वीकार करता है जिसमें वह यह कहती है कि इन अव्यवस्थओं को वह ठीक करेगा। वह सरकारी स्कूल के प्रति लोगों का नजरिया बदलने के लिये बहुत ही रोचक ढंग से काम करता है। बच्चों को बड़ी मेहनत से पढ़ाता है। जिससे देखते ही देखते स्कूल में बच्चों की संख्या काफी बढ़ जाती है। लेकिन यह बात वहां के लोकल नेता को पसंद नही आती क्योंकि इससे उनकी प्रायवेट स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार कम होती जाती है। जिससे वह अपने आदमियों से सरकारी स्कूल के बच्चों के भोजन में जहर मिलवा देता है। और अन्य तरीकों से भी अमित को परेशान करता है। इस तरह से इस फिल्म के माध्यम से लोगों के बीच सरकारी स्कूल और प्रायवेट स्कूल के बारे में सोच को बदलने की कोशिस की गई है।