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वेदा ही नहीं इन बॉलीवुड फिल्मों में भी सेंसरशिप ने चलाई कैंची

Author Sandhya Yadav | Published: Thursday, August 29, 2024, 11:49 AM [IST]

सेंसर बोर्ड कुछ फ़िल्मों के प्रति अपने दृष्टिकोण में सख्त रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे विशिष्ट दिशानिर्देशों और मानकों का पालन करें। जबकि कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि इससे रचनात्मक स्वतंत्रता बाधित होती है, अन्य मानते हैं कि कलात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक मानदंडों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। चलिए ऐसे फिल्मों के बारे में जानते हैं...


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वेदा

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'वेदा', अपनी अनूठी कहानी और गहन विषयवस्तु के लिए जानी जाती है। यह फ़िल्म समाज की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं को लेकर एक विचारशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। सेंसर बोर्ड द्वारा की गई कटौतियों के कारण 'वेदा' की कुछ महत्वपूर्ण सीन और संवाद हटा दिए गए हैं, जो फ़िल्म के मूल संदेश और कलात्मक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं। 

मस्‍तीजादे

भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप एक जटिल और अक्सर विवादास्पद विषय रहा है, और इस संदर्भ में 'मस्तिज़ादे' फ़िल्म का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह फ़िल्म अपने बोल्ड कंटेंट और आपत्तिजनक सामग्री के कारण सेंसर बोर्ड द्वारा गंभीर संशोधन और कटौती की शिकार हुई थी। इस फ़िल्म के लिए सेंसर बोर्ड ने कुल 381 दृश्यों को हटाने का आदेश दिया, जो इसे भारतीय सिनेमा में सबसे ज़्यादा सेंसर की गई फ़िल्मों में से एक बना देता है।

ग्रेट ग्रैंड मस्ती

भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप अक्सर फ़िल्म निर्माताओं और दर्शकों के बीच एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनती है। ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ फ़िल्म, जो कि 2016 में रिलीज़ हुई थी, सेंसरशिप की इस प्रक्रिया का एक स्पष्ट उदाहरण है। सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म में कुल 218 दृश्यों को हटाने का आदेश दिया था। 

क्या कूल हैं हम 3

2016 की फ़िल्म 'क्या कूल है हम 3' का मामला विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है, जहां सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म के लिए 150 कट का प्रस्ताव दिया था। सेंसर बोर्ड द्वारा 150 कट की मांग ने फ़िल्म निर्माताओं को एक कठिन स्थिति में डाल दिया। फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक को अपनी कलात्मक दृष्टि और फ़िल्म के मूल तत्वों के साथ समझौता करना पड़ा। 

ओएमजी 2

अक्षय कुमार की फ़िल्म ‘ओएमजी – ओह माय गॉड!’ (2012) इस परिदृश्य का एक प्रमुख उदाहरण है। यह फ़िल्म, जो धार्मिक व्यंग्य और सामाजिक टिप्पणियों से भरपूर थी, सेंसर बोर्ड के हाथों से गुजरते समय कई महत्वपूर्ण कटौतियों का सामना करना पड़ी।


लिपस्टिक अंडर माय बुर्का

2017 की फ़िल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बर्का’ का मामला विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है। फ़िल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा कई कटौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कुल 28 दृश्य हटा दिए गए। फ़िल्म का मुख्य विषय महिलाओं की यौन स्वतंत्रता, उनके सपनों, और समाज की कठोर मान्यताओं के खिलाफ उनके संघर्ष को दर्शाता है।

द केरला स्टोरी

‘द केरला स्टोरी’ के सेंसरशिप के दौरान, बोर्ड ने फ़िल्म में से कई दृश्य और संवादों को हटाने का आदेश दिया। कटौतियों का मुख्य कारण फ़िल्म की संवेदनशीलता और विवादित विषयवस्तु को माना गया। सेंसर बोर्ड ने दावा किया कि फ़िल्म में कुछ ऐसे दृश्य और संवाद थे जो समाज की नैतिकता और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ हो सकते थे।

उड़ता पंजाब

2016 की फ़िल्म ‘उड़ता पंजाब’ एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। फ़िल्म, जो कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर केंद्रित थी, ने सेंसर बोर्ड की कैंची का सामना किया और इसके परिणामस्वरूप कुल 94 कट लगाए गए। फ़िल्म का उद्देश्य एक गंभीर सामाजिक समस्या को प्रकाश में लाना था, लेकिन इसके इस उद्देश्य ने सेंसर बोर्ड की आलोचना को भी आमंत्रित किया।

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