ये है बकरापुर वर्ष 2014 में आई एक सामजिक व्यंग्यात्मक फिल्म है, जिसका निर्देशन जानकी विश्वनाथन ने किया है। बकरापुर में दिखाया गया है कि किस तरह से इंसानों को तो अभी तक मजहब के नाम पर बांटा ही था लेकिन अब जानवरों के भी धर्म और मजहब का बंटवारा होने लगा। लोगों की मानसिकता को बड़ी ही खूबसूरती और कड़वे तौर पर ये है बकरापुर में दिखाया गया है।
फिल्म की कहानी
'ये है बकरापुर' की कहानी है एक बकरे की जिसका नाम है शाहरुख। शाहरुख जुल्फी नाम के लड़के के घर में रहता है। जुल्फी शाहरुख से बेहद प्यार करता है। लेकिन एक दिन जुल्फी के परिवार वाले शाहरुख को बेचकर अपना कुछ कर्जा चुकाने का फैसला करते हैं और जुल्फी इस खबर को सुनकर काफी परेशान और दुखी हो जाता है। जुल्फी शाहरुख को बचाने के लिए जफर (आयुष्मान झा) की मदद लेता है। जफर शाहरुख के ऊपर अरबी भाषा में अल्लाह लिख देता है और जब लोग शाहरुख के ऊपर लिखे अल्लाह को देखते हैं तो उन्हें लगता हे कि शाहरुख अल्लाह का बंदा है। शाहरुख पूरे गांव में मशहूर हो जाता है और एक तरफ हिंदु शाहरुख को अपने साथ रखने के लिए तैयार होते हैं तो वहीं मुसलमान कहते हैं कि शाहरुख उनके मजहब का है और वो उनके साथ ही रहना चाहिए। जुल्फी और मुसीबत में फंस जाता है। अपने शाहरुख को बचाने के लिए जुल्फी क्या क्या करता है और किन मुश्किलों का सामना करता है ये जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।