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सुपर 30 (A)

पाठकों द्वारा समीक्षा

रिलीज़ डेट

12 Jul 2019
कहानी
सुपर 30, 2019 की आगामी बायोग्राफिकल फिल्म है, जिसका निर्देशन और निर्माण विकास बहल ने किया है। फिल्म की कहानी बिहार के आनंद कुमार और उनके एजुकेशनल प्रोग्राम के ऊपर आधारित है। फिल्म में ऋतिक रोशन, सुपर 30 के संस्‍थापक आनन्द कुमार की भूमिका निभाते हुए नजर आ रहे हैं। फिल्म में ऋतिक रोशन के साथ मृणाल ठाकुर ने टीवी की दुनिया से निकलकर फिल्मी दुनिया में कदम रखा है। 

पटकथा
फिल्‍म की शुरुआत एक सीन से होती है जिसमें शिक्षा मंत्री श्रीराम सिंह (पंकज त्रिपाठी) छात्रों को पुरस्कृत करते हुए जब अपनी टूटी फूटी अंग्रेजी में 'Education Is A Way To Heaven' कहते हैं, तो वहां खड़े छात्र हंस पड़ते हैं। लेकिन आनंद कुमार (ऋतिक रोशन) को हंसी नहीं आती। वह बगल में खड़े लड़के के हाथ में रखी किताब पर नजरें गड़ाए हैं। प्रतियोगिता में अव्वल आये आनंद कुमार अपना मेडल लेते हैं और ऊंची से ऊंची शिक्षा पाने का ख्वाब लिये घर आ जाते हैं।
 
उनके पिता (वीरेन्द्र सक्सेना) का विश्वास कि ''अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, राजा वही बनेगा जो हकदार होगा'', आनंद की इच्छाओं को बल देता है। गणित का कीड़ा लिये आनंद हर उस कठिनाई का सामना करते हैं, जो उनके और उनकी शिक्षा के आड़े आती है। चाहे वह हर हफ्ते ट्रेन के डिब्बे के ऊपर बैठकर पटना से BHU की यात्रा करना हो, या एक डाक डालने के लिए रुपए ना होना। शिक्षा के प्रति यही भूख उन्हें लंदन कैम्ब्रिज़ विश्वविद्यायल तक का रास्ता देती है। लेकिन यहां गरीबी उनके आड़े जा जाती है।
 
शिक्षा पर तो सबका अधिकार होता है.. कथनी पर विश्वास करने वाले आनंद जल्द ही समझ जाते हैं गरीबी एक अभिशाप है। संघर्ष के दिनों को पार करते हुए आनंद की जिंदगी में कई मोड़ आते हैं। जहां वो गरीबी से अमीरी तक सफर भी तय करते हैं। शिक्षा के नाम पर धंधा करने वालों से भी यारी होती है। वह एक बड़े कोचिंग संस्‍थान में बतौर टीचर काम भी करते हैं। लेकिन अमीरी का रंग उन्हें ज्यादा दिनों तक नहीं भाता और अहसास हो जाता है कि वह राजा के बच्चों को ही राजा बनाने की तैयारी में जुटे हैं।
 
बिना समय गंवाए आनंद अपने पिता के बातों को याद करते हुए सुपर 30 की शुरुआत करते हैं। जिसके जरिए वह 30 ऐसे बच्चों को आईआईटी की तैयारी कराते हैं, जिनके पास शिक्षा पाने की लगन तो है लेकिन साधन नहीं है। यह असाधारण सफर भी आनंद कुमार के लिए आसान नहीं, लेकिन उनका मानना है कि 'आपत्ति से ही तो आविष्कार का जन्म होता है..' 
 
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