आलोचनात्मक समीक्षा

    • ब्रोमांस Vs रोमां एक ऐसी स्थिति होती है जिससे हम सब कभी ना खभी गुजरते हैं, ये बात तो आप भी मानेंगे। आपकी दोस्त किसी और से प्यार करने लगती है और आप उसके लिए हां बोलते हैं लेकिन नहीं बोलना चाहते हैं। लव रंजन की यह लेटेस्ट फिल्म सोनू के टीटू की स्वीटी इस लड़ाई की कहानी है। प्यार का पंचनामा और प्यार का पंचनामा 2 के डायरेक्टर यहां भी जेंडर बैलेंस को अलग तरीके से पेश किया है लेकिन जिस तरह से उन्होंने फिल्म में सबकुछ दिखाया है वो उनके पक्ष में काम करती है।विद्या बालन की फिल्म डर्टी पिक्चर का वो डायलोग तो आपको याद होगा कि फिल्में सिर्फ 3 चीजों की वजह से चलती है इंटरटेनमेंट, इंटरटेनमेंट, इंटरटेमेंट। सोनू के टीटू की स्वीटी भी पूरे 140 मिनट तक आपको इंटरटेनमेंट देती है।
     
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