सेक्शन 375 कहानी

    सेक्शन 375 कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक और एससीआईपीएल द्वारा निर्मित और अजय बहल द्वारा निर्देशित एक हिंदी भाषा का नाटक है। यह भारत में भारतीय दंड संहिता कानूनों की धारा 375 पर आधारित है। फिल्म में अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा मुख्य भूमिका में हैं।
     
    पटकथा 
    फिल्म की कहानी शुरु होती है जब मशहूर फिल्म निर्देशक रोहन खुराना (राहुल भट्ट) पर जूनियर कॉस्ट्यूम डिजाइनर अंजलि दांगले (मीरा चोपड़ा) बलात्कार का आरोप लगाती है। सेशन कोर्ट में आनन फानन में यह केस निपट जाता है। सारे फॉरेन्सिक रिपोर्ट्स को देखते हुए कोर्ट रोहन खुराना को 10 साल की सज़ा सुनाती है। लेकिन केस हाई कोर्ट तक पहुंचता है और वहां आमने सामने आते हैं हाई प्रोफाइल वकील तरुण सलूजा और अंजलि की ओर से सरकारी वकील हिरल गांधी (ऋचा चड्ढा)।
     
    अब कोर्ट में तमाम दलीलें पेश होती हैं, जो आपको कभी किसी को सच तो कभी किसी को झूठ मानने पर मजबूर करेगी। क्लाईमैक्स तक जाते जाते फिल्म कई परतों में खुलती है। लेकिन क्या एक झूठ.. पूरी की पूरी सच्चाई बदल सकता है? इसी पर टिकी है पूरी कहानी। फिल्म देखने के दौरान बॉलीवुड में हो रहे 'मी टू अभियान' की ओर ध्यान जरूर जाएगा। जहां एक के बाद एक सेलिब्रिटीज पर यौन शोषण जैसे आरोप तो लग रहे हैं, लेकिन सिद्ध नहीं हो रहा।

    भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 काफी संवेशनशील और पेचीदा मुद्दा है। लेकिन इस मुद्दे को गंभीरता के साथ उठाने की कोशिश की है निर्देशक अजय बहल ने। फिल्म धारा 375 के दुरुपयोग पर केंद्रित है, जिसे भारत में बलात्कार विरोधी कानून के रूप में भी जाना जाता है। फिल्म में एक संवाद है जहां वकील तरुण सलूजा (अक्षय खन्ना) कहते हैं कि- ये केस सटीक उदाहरण है कि कैसे एक महिला उसी कानून का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करती है, जो उसकी सुरक्षा के लिए बनाया गया था। बहरहाल, कहानी में कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ , यह देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।
     
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