मणिकर्णिका: झाँसी की रानी कहानी

    मणिकर्णिका: झाँसी की रानी एक भारतीय हिन्दी फिल्म है, फिल्म का निर्माण ज़ी स्टूडियो द्वारा एवं कृश द्वारा निर्देशित किया गया है।  फिल्म में कंगना के अलावा, अतुल कुलकर्णी, जीशु सेनगुप्ता, सोनू सूद, सुरेश ओबराय, निहार पांड्या, अंकिता लोखंडे और रिचर्ड कीप मुख्य भूमिका में हैं। 

    फिल्म की कहानी 
    मणिकर्णिका: झाँसी की रानी की पटकथा रानी लक्ष्मी लक्ष्मीबाई के जीवन और 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ उनकी लड़ाई पर आधारित है। 

    'छबीली मणिकर्णिका' (कंगना रनौत) का साहस और वीरता पहले ही सीन में दिखा दिया जाता है। जहां उसे एक खतरनाक चीते से भिड़ते हुए दिखाया जाता है (इस सीन में VFX किसी मजाक से कम नहीं लगता)। वो घुड़सवारी, बाड़ लगाने में बहुत तीव्र है और जल्दी ही उस पर नजर पड़ती है कुलभूषण खरबंदा की.. जो उसकी शादी झांसी के महाराजा गंगाधर राव नेवलकर (जिसु सेनगुप्ता) से करवाना चाहता है। जिसके बाद मणिकर्णिका बन जाती है रानी लक्ष्मीबाई। जल्द ही, वो एक बेटे को जन्म देती है और उसका नाम रखती है दामोदर राव। 

    दुर्भाग्य से बच्चा जिंदा नहीं रह पाता और रानी लक्ष्मीबाई समेत पूरा राज्य शोक में डूब जाता है। तभी इस्ट इंडिया कंपनी 'चूक का सिद्धांत' लेकर आती है। वहीं राजा और रानी एक बच्चे को गोद लेते हैं और उसका नाम अपने बेटे के नाम पर ही रखते हैं। जहां एक तरफ गंगाधर राव की बीमारी से जूझने के बाद मौत हो जाती है। वहीं दूसरी तरफ रानी लक्ष्मीबाई झांसी संभाल लेती हैं। 'लक्ष्मी विधवा हुई है, उसकी झांसी अभी सुहागन है।' बाकी की फिल्म ब्रिटिश राज के खिलाफ रानी लक्ष्मी बाई की लड़ाई के इर्द-गिर्द घूमती है। वे ये संदेश साफ कर देती हैं कि 'हम लड़ेंगे.. ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी आज़ादी का उत्सव मनाएं।'
     
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