कठोर के बॉलीवुड ड्रामा है, जिसका निर्देशन करण कश्यप ने किया है।
फिल्म की कहानी
नीलकंठ चतुर्वेदी 55 वर्ष की है। वह बिलासपुर सेंट्रल जेल से कॉन्स्टेबल के पद से 2 साल में वह सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनके पास एक छोटा परिवार, पत्नी ज्योति और बेटी अनु है। अनु उनकी जीवन रेखा है।
नीलकंठ जेल में खूंखार कैदियों को खाना परोसता है, एक पुलिस वाला होने के बावजूद कभी भी उसने कभी भी किसी के ऊपर चिल्लाया नहीं और ना ही ऊँची आवाज में बात की ।
नीलकंठ की बेटी की शादी तय हो जाती है, इसके चलते वह अपने बेटी को शादी से पहले हर ख़ुशी को पूरा करने का प्रयास करता है। शादी से पहले अनु अपने पिता नीलकंठ से शहर में लगने वाले मेले में जाने की जिद करती हैं, वह उसे वहां ले जाता है, लेकिन उसी दिन उस मेले पर कुछ नक्सलवादी हमला कर देते हैं और नीलकंठ की बेटी की जान उस हमले में चली जाती है।