बजरंगी भाईजान

पाठकों द्वारा समीक्षा

रिलीज़ डेट

16 Jul 2015
कहानी
सलमान खान अपने फैंस को अपनी फिल्म की ईदी देना कभी नहीं भूलते, तो फिर इस साल कैसे भूल जाते।  इस साल सल्लू भाई ने दर्शकों को ईदी के तौर पर दी बजरंगी भाईजान। ह्म्म्म्म्म्म- फिल्म के चर्चे तो रिलीज़ से पहले ही काफी थे, और अभी भी बरकरार हैं।  कहें तो फिल्म रोज कोई ना कोई रिकॉर्ड बनाती ही जा रही है। खैर, अब हम आते है फिल्म की कहानी पर.....

कहानी---- फिल्म  की कहानी शुरू होती है पाकिस्तान के एक घर से जंहा क्रिकेटप्रेमियोँ का हुजूम इंडिया-पाकिस्तान का मैच देख रहा है।  तभी भीड़ में बैठी एक प्रेग्नेंट महिला कहती है वो अपने बच्चे का नाम शहीद रखेगी। उसकी बेटी होती है जिसका नाम वह शहीदी रखती है। शहीदी जो की बोल नहीं सकती लोग कहते हैं उसे दिल्ली के निज़ामिद्दीन दरगाह में ले जाए तो वो ठीक हो सकती है।

अपनी बेटी को चहकता और बोलता हुआ देखने के लिए शहीदी की माँ उसे दिल्ली लेकर जाती है।  लौटते समय शहीदी माँ को सोता देख ट्रेन से उतर जाती जाती है और ट्रेन निकल जाती है। वो पुकार भी नहीं पाती। जब तक माँ को पता चलता है शहीदी ट्रेन में नहीं है तब तक ट्रेन भारत की सरहद पार कर जाती है। शहीदी की माँ सोचती है कि कोई तो नेक होगा जो उसकी मासूम बच्ची को सही सलामत  पहुंचा देगा।  तभी आते है बजरंगी भाईजान ..ले ले रे ले ले रे ले ले रे गाना गाते हुए बजरंग बली के साथ।

जब बजरंगी को पता लगता है कि शहीदी पाकिस्तानी हैं और वो कुछ बोल नहीं सकती तो वो उसकी मदद करने की ठान लेता है।  लेकिन जब बजरंगी को पता लगता है कि पाकिस्तान जाने के वीजा पासपोर्ट चाहिए तो वह मुश्किल में पड़ जाता है।  फिर बजरंगी सीमा पर बनी सुरंग के जरिये पहुँच जाता है पाकिस्तान। शहीदी को घर पहुँचाने के मिशन में बजरंगी और रसिका की लव स्टोरी भी ट्रैक पर चल पड़ती है।

पाकिस्तान जाने के बाद सलमान की मदद को आते हैं नवाजुद्दीन सिद्दिकी। जो कि फिल्म को एक नयी ही दिशा में लेकर जाते हैं। फिल्म कुल मिलाकर सलमान खान के फैंस के लिए एक बेहतरीन ईदी है और कहना गलत ना होगा कि सलमान खान को सालों बाद इतने सिंपल और इमोशनल अंदाज में देख फैंस की ईद तो इंशाअल्लाह बेहतरीन ही होनी है। 
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