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बुनियादी ज़रुरतें पूरी हों तो विकलांगता अभिशाप नहीं: सत्यमेव जयते

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एक सात साल की लड़की श्रेया मुस्कुराते हुए अपनी मां का हाथ पकड़े अपने नन्हे कदमों को सीधा रखने की कोशिश करती है और इतनी तकलीफ के बाद भी उसका ज़िंदगी से बिना किसी शिकायत कहना  है "मैं खुश हूं जो भी भगवान ने मुझे दिया है।" कुछ ऐसे ही लोगों के जिंदगी जीने के जज्बे को सलाम किया आमिर ने अपने सत्यमेव जयते के 10 जून के एपिसोड में।

Satyamev Jayate

हमारे भारत देश में अक्सर विकलांगिता को अभिशाप का नाम दिया जाता है और कहा जाता है कि ये उनके पिछले जन्मों के पापों का दंड है। लेकिन इस अभिशाप को एक वरदान में बदलने वाले लोगों से आमिर ने दर्शकों को रुबरु कराया।

हर रोज जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए नई नई टेक्नॉलाजी का इजा़त करते देश में विकलांग लोगों के लिए बुनियादी जरुरते ही मौजूद नहीं हैं और जहां मौजूद हैं वहां भी लोग उन जरुरतों का प्रयोग तक करने में सक्षम नहीं हो पाते।

आमिर के शो में मुम्बई के साई विश्वनाथ भी मौजूद थे। बचपन से ही साईं की रीढ़ की हड्ड्‍ी में तकलीफ थी और उनका ऑपरेशन भी हुआ पर फिर भी उनकी कमर से नीचे का हिस्सा ठीक ना हो सका।साई ने बताया कि चैतन्य भारती स्कूल ऑफ टेक्नॉलोजी से इंजीनियरिंग करने की बाद कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान उन्हें तीन कम्पनी में जॉब ऑफर मिला। जिसमें से उन्होंने इन्फोसिस का ऑफर स्वीकार किया  और कम्पनी की इंफास्ट्रक्चर को देखकर साईं को काफी खुशी हुई। अपनी विकलांगिता के बावजूद साईं अपने सारे काम करने में सक्षम थे क्योंकि वहां उनकी सभी बुनियादी जरुरतें पूरी हुई।

साईं अपनी जॉब के समय अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में भी गऐ और वहां उन्हें कम्पनी के फ्लैट में भी सभी सुविधाएं मिलीं। साईं ने स्काई डाइविंग तक की जिसे करने में पूरी तरह से फिट इंसान भी डरता है।साईं ने कहा कि अपने देश में कभी वो अपनी विकलांगिता को भूलकर एक आम इंसान की तरह जिंदगी नहीं जी पाए। सिर्फ इसलिए क्योंकि यहां कभी भी उन्हें उनके लिए आवश्यक बुनियादी जरुरतें मुहैय्या नहीं हुई।

आमिर ने बैगलूरु के एक सरकारी ऑफिस की स्थिति दिखाई जहां विकलांगों के लिए रैम्प ना होने के चलते उन्हें ऑफिस में आने जाने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है, इसके अलावा दिल्ली के जीपीओ में भी विकलांगों के लिए रैम्प नहीं बना है। जब सरकारी ऑफिसों में ही विकलांगों के लिए बुनियादी जरुरतें मुहैय्या नहीं होती हैं तो बाकी जगहों की तो बात ही छोड़ दें।

आमिर ने ऐसे और भी कई लोगों का उदाहरण दिया जो अपनी विकलांगिता के बावजूद खुद को आम से खास बनाने में सक्षम हुए हैं। आमिर ने इस मुद्दे पर भी रोशनी डाली कि कोई भी स्कूल अपने यहां विकलांग बच्चों को एडमिशन नहीं देते। इस वजह से न जाने कितने बच्चे एक उज्जवल भविष्य को पाने से रह जाते हैं।

दिल्ली के अमर ज्योति स्कूल के बारे में बताते हुए आमिर ने कहा कि इस स्कूल में विकलांग बच्चों के लिए सारी बुनियादें जरुरतों के साथ एक उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक सारी सामग्री मौजूद है।

आमिर के शो में मौजूद जावेद ने बताया कि सरकारी आंकड़ों को देखा जाए तो सिर्फ 2-3 प्रतिशत लोग ही विकलांग हैं जबकि असलियत में भारत की 6-7 करोड़ आबादी विकलांगिता से पीड़ित है। उन्होने ये भी बताया कि 2001 तक की जनगणना में तो विकलांगों को शामिल तक नहीं किया गया था। इतना ही नहीं बल्कि 10 वीं पंचवर्षीय योजना तक में विकलांगों के लिए किसी प्रकार की बात नहीं की गई थी। 11वीं योजना में विकलांगों के लिए कई प्रकार की योजनाएं बनाने की बात की गई पर अब जबकि ये खत्म होने वाली है इसमें से एक भी योजना पर अमल नहीं हुआ है।

आमिर ने विकलांगिता को पुराने जन्म के पाप से जोड़ने वालों को करारा जवाब देते हुए कहा कि जबसे अमिताभ ने पोलियो अभियान से जुड़कर दो बूंद जिंदगी की बांटने की शुरुआत की है तब से देश में पोलियो के केस बहुत कम हो चुके हैं अब इसकी बजह ये भी हो सकती है कि शायद अब हमारे देश में लोगों ने पाप करना छोड़ दिया है।

विकसित देशों की सूची में अपना नाम शामिल करने के लिए प्रयत्नशील हमारे देश के पालनहार चाहे कितना ही बड़ी बड़ी बातें कर लें पर सच तो ये है कि आज भी कई ऐसे वर्ग हैं जो विकास के नाम पर अभी भी काफी पिछड़े हुए हैं। और आमिर की इस पहल में एक एक करके ये सभी सामने आने वाले हैं। बस हमें भी इस पहल का एक मजबूत हिस्सा बनना है।

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    English summary
    Aamir said that in our country we don't have infrastructure for handicapped people. And their basic needs are not getting fulfilled.
    भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?

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