विक्रम वेधा फिल्म रिव्यू : सीटी और तालियों की गारंटी देती है ऋतिक - सैफ स्टारर ये एक्शन थ्रिलर
निर्देशक- पुष्कर और गायत्री
कलाकार- ऋतिक रोशन, सैफ अली खान, राधिका आप्टे, रोहित सराफ, शारिब हाशमी, सत्यदीप मिश्रा आदि
लोकप्रिय भारतीय लोककथा 'बेताल पच्चीसी' के खाके पर बनी है फिल्म 'विक्रम वेधा'। जहां बेताल यानि की वेधा हर बार विक्रम को अपनी पहेलीनुमा कहानी में उलझाकर उसकी चंगुल से बच निकलता है।
लखनऊ पुलिस का एक ईमानदार अधिकारी विक्रम, गैंगस्टर वेधा को ढूंढ़कर खत्म करने के मिशन पर है। लेकिन, वेधा खुद ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देता है और फिर विक्रम को कहानियां सुनाना शुरू करता है। जो धीरे-धीरे उसके अच्छे और बुरे के बारे में अपनी धारणा को बदलने लगती है।

[ऋतिक रोशन विक्रम वेधा इंटरव्यू]
एक ईमानदार पुलिसवाले और एक गैंगस्टर की ये कहानी काले और सफेद के बीच के स्पेस की बात करती है। "अच्छे और बुरे में चुनना तो बहुत आसान होता है सर.. ई कहानी में तो दोनों ही बुरे हैं", सामने बैठे विक्रम से वेधा कहता है।
विक्रम वेधा इसी नाम से बनी 2017 की तमिल फिल्म का हिंदी रीमेक है। अच्छी बात ये है कि रीमेक को अलग दिखाने की कोशिश में पुष्कर और गायत्री ने कहानी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया है। बल्कि सिनेमेटोग्राफर से लेकर एडिटर तक, टीम के कई सदस्य दोनों फिल्मों से जुड़े रहे हैं।
कहानी
शहर के सबसे खतरनाक गैंगस्टर वेधा को पकड़ने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसका हिस्सा है विक्रम, एक ईमानदार और जाबांज पुलिस अफसर। वेधा को पकड़ने के लिए पुलिस जाल बिछा ही रही होती है कि एक दिन वो खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देता है। सभी चकित रहते हैं कि वेधा जैसे गैंगस्टर ने ऐसा क्यों किया! लेकिन पूछताछ के दौरान वो विक्रम को एक पहेलीनुमा कहानी सुनाता है, और अंत में उससे जवाब मांगता है। विक्रम को अंदाजा नहीं होता है कि उसका जवाब वेधा की प्लानिंग का हिस्सा है। जल्द ही वेधा को जेल से वकील द्वारा छुड़ा लिया जाता है। लेकिन विक्रम के साथ उसका चूहे- बिल्ली का खेल जारी रहता है। जितनी बार वो विक्रम की गिरफ्त में आता है, वेधा उतनी बार एक कहानी सुनाता है और उसका जवाब मांगता है। आखिरी कहानी तक धीरे धीरे विक्रम के लिए सच और झूठ, सही और गलत को देखने का नजरिया पूरी तरह से बदल जाता है। हर कहानी के साथ चीजें कैसे टर्न लेती हैं, बाकी फिल्म इसी के बारे में है।
अभिनय
जिन दृश्यों में ऋतिक रोशन और सैफ अली खान साथ दिखे हैं, दोनों शानदार लगे हैं। खासकर क्लाईमैक्स के एक्शन सीन्स में। पूरी फिल्म इन दो किरदारों के इर्द गिर्द घूमती है, जिसमें से एक को "व्हाइट" माना गया है, तो एक को "ब्लैक"। दोनों एक्टर्स ने अपने किरदारों में काफी सहजता बनाकर रखी है। एक ईमानदार पुलिस वाले के रूप में सैफ अली खान अच्छे लगे हैं। हालांकि कहीं कहीं उन्हें देखकर सेक्रेड गेम्स की याद आती है, लेकिन अपने हाव भाव में वह काफी संतुलित दिखे हैं। वहीं, वेधा के किरदार में ऋतिक ने एक स्वैग बनाकर रखा है। वह खतरनाक और कुछ भागों में भावुक दिखे हैं। लेकिन उनके किरदार में जिस तरह की निर्ममता दिखानी की कोशिश की जा रही थी, वो अभिनय में मिसिंग थी। वहीं, भाषा पर उनकी कच्ची पकड़ कहीं कहीं ध्यान भटकाती है।
राधिका आप्टे को यहां अपने अभिनय कौशल का प्रदर्शन करने की अधिक गुंजाइश नहीं मिली, लेकिन जितनी देर वो स्क्रीन पर रहती हैं, आकर्षित करती हैं। ऋतिक के छोटे भाई के किरदार में रोहित सराफ कहीं कहीं आपको 'कहो ना प्यार है' की याद दिलाएंगे। खैर, ऋतिक के साथ उनके भावनात्मक दृश्य अच्छे लगे हैं। योगिता बिहानी अपने हाव भाव और लुक से यहां थोड़ी मिसफिट लगती हैं। वहीं, शारिब हाशमी और सत्यदीप मिश्रा ने सहायक भूमिकाओं में अच्छा काम किया है।
निर्देशन
फिल्म का लेखन और निर्देशन पुष्कर- गायत्री ने किया है। कहानी का मूल काफी दिलचस्प है। इन्होंने किरदारों में इतनी परतें दी हैं कि हर कहानी के साथ आप फिल्म से बंधते जाएंगे। साथ ही फिल्म के संवाद काफी प्रभावी हैं। विक्रम और वेधा से जुड़ी कई बारीक बातों को उन्होंने शामिल किया है, जो प्रभावशाली है। जैसे वेधा का राज कपूर के गानों से प्यार होना.. और 'किसी की मुस्कुराहटों ' का इस्तेमाल किसी एक्शन सीन में करना। अच्छी बात ये भी है कि निर्देशकों ने इस रीमेक को ओरिजनल के बिल्कुल करीब रखा है और जबरदस्ती कहानी में कोई तब्दीली नहीं की है। हालांकि फिल्म में कुछ भी कमियां हैं। जिसमें सबसे प्रमुख है, फिल्म की लंबाई। कलाकारों का इतना स्लो-मोशन शॉट लिया है कि कहीं कहीं वह चुभने लगता है। खासकर फिल्म का पहला भाग खिंचा हुआ लगता है। साथ ही फिल्म में यहां किरदारों के बीच इमोशनल बॉण्डिंग में कमी नजर आई है, जिस वजह से कहानी के कुछ भाग वो प्रभाव नहीं डाल पाते, जितनी निर्देशक को उम्मीद होगी।
तकनीकी पक्ष
तकनीकी रूप से फिल्म दमदार है। हां, कुछ हिस्सों में फिल्म काफी धीमी लगी है, लेकिन किरदारों पर आपकी नजर बनी रहती है। एक्शन दृश्यों को वास्तव में अच्छी तरह से कोरियोग्राफ किया गया है। जैसे प्री-इंटरवल एक्शन सीक्वेंस जहां पुलिस एक इलाके में वेधा को तलाश रही है, और वो छतों से होता हुआ एक कंटेनर यार्ड में पहुंच जाता है। एक्शन सीन्स में लखनऊ के सेटअप को फिल्म में बखूबी इस्तेमाल किया गया है। पीएस विनोद की सिनेमेटोग्राफी जबरदस्त है। ए रिचर्ड केविन ने फिल्म का संपादन किया है, जो कई बार पकड़ खो देता है।
म्यूजिक
फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष है कि इसके गाने। फिल्म में जिस तरह "अल्कोलिया" गाने को बिठाया गया है, हैरानी होती है कि ये क्यों किया गया है! गाना कहानी की प्रवाह में बाधा डालती है और पटकथा को आगे बढ़ाने में कोई भूमिका नहीं निभाती है। इस गाने का म्यूजिक है विशाल- शेखर ने। वहीं, बैकग्राउंड स्कोर दिया है सैम सीएस ने, जो कि काफी बेहतरीन है और हर सीन में जान डाल देता है।
रेटिंग- 3 स्टार
ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्क्रीन पर साथ काफी शानदार लगे हैं। एक्शन सीन्स हो या डायलॉग्स, दोनों अपने किरदारों में जमे हैं। फिल्म में कुछ छोटी कमियां हैं, लेकिन कहना गलत नहीं होगा कि विक्रम वेधा एक अच्छी रीमेक है और बड़े पर्दे पर इसे देखना दिलचस्प होगा। इस एक्शन मसाला को फिल्मीबीट की ओर से 3 स्टार।


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