एबीसीडी- फिल्म रिव्यू
एक डांस प्रतियोगिता पर बनी फिल्म एबीसीडी दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है और अंत में दर्शकों के दिल में एक जीत और खुशी का एहसास छोड़ जाती है। ये एक ऐसी फिल्म जिससे कि हर एक भारतीय खुद को जुड़ा हुआ पाएगा। प्रभु देवा और गणेष आचार्या का डांस लोगों के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं होगा। कई डांस स्टाइल तो ऐसे हैं जिन्हें देख कर शायद आपकी आंखें भी खुली की खुली रह जाएं।
फिल्म का प्लॉट थोड़ा कमजोर है जहां पर फिल्म मात खा गयी वरना फिल्म काफी बेहतरीन है। अपने दूसरे भाग में फिल्म की एडिटिंग और फिल्म का 2डी इफेक्ट थोड़ा हल्का पड़ गया। फिल्म का डांस फिनाले किसी इंडिया पाकिस्तान क्रिकेट मैच से कम नहीं है। इसे देखते समय आपके दिल में कुछ ऐसा ही रोमांच पैदा हो जाएगा।
कहानी
विष्णु (प्रभु देवा ) डांस के लिए पहुल पैशिनेट है। वो अपने पार्टनर (के के मेनन ) के साथ मिलकर एक डांस अकेडमी शुरु करता है। बाद में के के मेनन मैनुपुलेट करना शुरु कर देता है और विष्णु बहुत ही निराश हो जाता है। वो मुंबई छोड़ अपने शहर वापस जाने का फैसला करता है। और तभी उसकी मुलाकात एक टैलेंटेड डांसिंग ग्रुप से होती है जो कि एक डांस कॉम्पीटीशन की तैयारी कर रहे होते है। विष्णु फैसला करता है कि वो उन्हें बेहतरीन डांसर्स के लिए ट्रेन करेगा।
फिल्म में के के मेनन की परफॉर्मेंस हमेशा की तरह बेहतरीन है उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। प्रभु देवा अपने डांस में परफैक्ट दिखे हैं। बतौर एक्टर वो कुछ खास नहीं हैं लेकिन डांसिंग में उन्हें कोई नहीं हरा सकता। फिल्म के बाकी सभी किरदार औसत हैं।


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