शादी के लिए करीना क्यों नहीं बनीं मुस्लिम?
क्या शर्मिला के आगे करीना जिद्दी और अड़ियल हैं कि उन्होंने अपनी जिद पर इस्लाम नहीं अपनाया या फिर उनके प्रेम में इतनी शक्ति थी कि उन्होंने सैफ से यह बात मनवा ली कि वो अपना धर्म परिवर्तन नहीं करेंगी और प्रेम ही धर्म हैं इस तर्ज पर उन्होंने इस्लाम को नहीं कबूला। करीना आज की नारी है इसलिए हो सकता है कि उन्होंने आधुनिक युग को फॉलो करते हुए अपने सच्चे प्रेम को रीति-रिवाजों से ऊपर उठकर कबूला है इसलिए उन्होंने धर्म को अपने बीच में आने नहीं दिया।
अब आप कहेंगे कि करीना का प्यार अगर सच्चा है तो क्या शर्मिला का प्रेम कमजोर था जिन्हें पटौदी की बेगम बनने के लिए आयशा खान बनना पड़ा था तो हम कहना चाहेंगे कि वो भी गलत नहीं हैं क्योंकि उनका प्रेम एक समर्पण है जिसे पाने के लिए वो कुछ भी कर गुजरने को तैयार थीं। उनके प्यार की कशिश को आप लोग भी महसूस कर सकते हैं क्योंकि शर्मिला ने नवाब पटौदी के साथ लंबा और सफल रिश्ता निभाया है।
पटौदी साहब से मरते दम तक शर्मिला अलग नहीं हुई और उनकी आखिरी सांस तक वो उनके साथ रहीं। इसलिए करीना और शर्मिला के प्रेम की तुलना बेमानी है। शर्मिला का प्रेम अगर समर्पण हैं तो करीना का प्रेम इबादत हैं जिसके समकक्ष कोई नहीं हैं। उम्मीद करते हैं शर्मिला-नवाब पटौदी जैसा सैफ-करीना का रिश्ता भी लोगों के लिए मिसाल बनें।
मालूम हो कि 16 अक्टूबर 2012 को करीना-सैफ ने रजिस्टर्ड मैरज की है। लंबे अरसे कहा जा रहा था कि करीना को सैफ से शादी करने के लिए इस्लाम अपनाना पड़ेगा क्योंकि पटौदी खान की बहू वो ही बन सकती है जो कि मुस्लिम हो लेकिन सैफ-करीना ने निकाह की जगह कोर्ट मैरज की। लोगों ने काफी अटकलें लगायी थीं कि करीना, सैफ के लिए मुस्लिम बन जायेंगी लेकिन करीना ने धर्म-परिवर्तन नहीं किया।
तो वहीं आपको बता दें कि शर्मिला टैगोर ने नवाब पटौदी से शादी करने के लिए इस्लाम अपनाया था। उन्होंने मुस्लिम बनकर नवाब पटौदी से शादी की थी। मुस्लिम बनने के बाद शर्मिला का नाम आयशा खान हो गया था। दोनों ने साथ-साथ सफल जीवन गुजारा है। उनकी शादी से तीन बच्चे सैफ अली खान, सबा अली खान और सोहा अली खान हैं। जिनमें सैफ-सोहा तो फिल्मों में काम करते हैं लेकिन सबा देश की जानी-मानी ज्वैलरी डिजाइनर हैं।


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