क्यों वहीदा अपनी लाइफ को पर्दे पर नहीं देखना चाहतीं?
इस किताब में वहीदा के जीवन से जुड़ी बहुत सारी बातें हैं। जिसके बारे में वहीदा ने लोगों से बात की। जब उनसे यह पूछा गया कि आज कल बॉलीवुड में जीवनी पर आधारित फिल्में बन रही हैं जैसे कि भाग मिल्खा भाग और मैरिकॉम.., ऐसे में अगर उनकी जीवनी को पर्दे पर उतारा जाये तो उन्हें कैसा महसूस होगा।
वहीदा ने कहा कि मेरी निजी राय है कि किसी की लाइफ पर फिल्में नहीं बनानी चाहिए
लेकिन इस सवाल का जवाब वहीदा ने बड़े ही हैरत अंगेज तरीके से दिया। वहीदा ने कहा कि मैं 75 साल की हूं। यह यात्रा काफी लंबी है। इसे तो चार भागों में बनाना पड़ेगा। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं नहीं चाहती कि मेरी जीवनी पर फिल्म बने। वहीदा ने कहा कि मेरी निजी राय है कि किसी की लाइफ पर फिल्में नहीं बनानी चाहिए।
50 साल बाद भी गुरूदत्त को लेकर क्यों खामोश हैं वहीदा?
वहीदा की इस बात से लोगों के दिलों में सैकड़ों सवाल घूमने लगते हैं कि आखिर वो कौन सी बात है जिसके कारण वहीदा को लगता है कि उनकी जीवनी पर फिल्म नहीं बननी चाहिए, क्या उसका कारण दिवंगत अभिनेता गुरूदत्त की मौत है या फिर कुछ और।
इससे पहले भी जब किशोर कुमार के जीवन पर फिल्म बनने की बात आयी थी तो वहीदा ने कहा था कि जीवनी पर कभी भी फिल्म नहीं बननी चाहिए और ऐसे लोगों पर तो कभी नहीं जो कि अब इस दुनिया में नहीं है। वहीदा जी का कहना है कि उन्हें इस तरह की फिल्में पसंद नहीं हैं।
पिछले कुछ वर्षो में वहीदा को 'रंग दे बसंती' और 'दिल्ली-6' जैसी फिल्मों में देखा गया था। लेकिन, अब पर्दे से दूर होकर भी वहीदा खुश हैं।
उन्होंने कहा, "कोई आखिर कितना काम करेगा! हमें दूसरों को भी मौका देना चाहिए। मुझे कोई बात नहीं खलती। मैं अपने साथ खुश हूं। मैं यात्राएं करती हूं, किताबें पढ़ती हूं, दोस्तों से मिलती-जुलती हूं, कभी-कभी खाना बनाती हूं। अपने जीवन से मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं।"


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