जिंदगी के बीस सालों को लिखना आसान नहीं था : शाहरूख खान
अक्सर लोग दूसरों के बारे में अपने विचार देते हैं लेकिन जब बारी खुद की आती है तो इंसान परेशान हो जाता है। मैने भी अपनी किताब में अपने जीवन के उन बीस सालों को लिखा हैं जिनके चलते लोग आज मुझे शाहरूख खान कहते है। इन पलों को लेखनी में समेटना काफी मुश्किल था लेकिन मैंने फिर भी ये जोखिम उठाया है। हालांकि कि मैंने अपनी कहानी को मजाकिया लहजे में लिखने की कोशिश की है। ताकि लोग उसे पढ़कर खुश हों ना कि बोर।
शाहरूख की आत्मकथा का नाम है ट्वेंटी ईयर्स इन द डिकेड। जिसके बारे में शाहरूख ने कहा कि मैनें किताब पूरी कर ली है, अब मैं इसे अपने दोस्तों को दूंगा ताकि वो इसको संपादित कर सके उसके बाद ही ये किताब बाजार में आयेगी। शाहरूख को उम्मीद हो कि लोग उनकी किताब को वो ही इज्जत देगें जो उनकी फिल्मों को मिलती हैं। इस किताब को बादशाह खान पिछले दस सालों से लिख रहे थे।


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