मन की शांति तलाश रहे शाहिद

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शाहिद ने बताया, "मैं कह सकता हूं कि विश्वास से ही सारे काम संभव होते हैं। इसलिए इसे विश्वास की छलांग कहते हैं। मैंने 20 जनवरी तक रोज 20 घंटे काम किया है। मैं पागलों की तरह काम कर रहा था। जब मैं 21 जनवरी की सुबह जागा तो मुझे किसी काम पर नहीं जाना पड़ा।"
शाहिद कहते हैं कि वह जब भी वो अपनी किसी फिल्म से पहले घर पर बिना काम के बैठते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद साबित होता है। उन्होंने 'विवाह" और 'जब वी मेट" फिल्म से पहले भी ऐसा ही किया था। शाहिद साल 2010 में केवल एक ही फिल्म करेंगे और यह उनके पिता की फिल्म 'मौसम" होगी। इस फिल्म में वह पर्दे पर तो नजर आएंगे ही पर्दे के पीछे के निर्माण कार्य में भी योगदान देंगे।
वह कहते हैं, "जब मेरे पिता द्वारा मुझे निर्देशित किया जा रहा है तो मैं फिल्म निर्माण के प्रत्येक विभाग को समझना चाहूंगा। मैं छायांकन, नृत्य निर्देशन और निर्देशन सीखना चाहता हूं। इस सब से ज्यादा मैं अपने पिता से अभिनय सीखना चाहता हूं।" शाहिद बताते हैं उन्होंने जब अपने पिता के सामने अभिनय के विषय में सोचा तो वह डरे हुए थे। वह कहते हैं पिता के सामने अभिनय को लेकर उनके अंदर चिंता और घबराहट थी। लेकिन अभ ऐसा कुछ नहीं है। मौसम में शाहिद वायु सेना के एक पायलट की भूमिका में होंगे।


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