रूमानी आवाज की मल्लिका आशा भोंसले

बहुत कम उम्र में ही अपनी गायकी का करियर शुरू करने वाली आशा ने अलग-अलग तरह के गीत गाए हैं। हिंदी फिल्मोद्योग की मशहूर डांसर हेलन के लिए कई गीतों को आवाज देने के बाद उन्हें कैबरे गायिका कहा जाने लगा था।
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बाद में 1957 में आई दिलीप कुमार-वैजंतीमाला अभिनीत फिल्म 'नया दौर' के 'मांग के साथ तुम्हारा' गीत ने उनकी कैबरे गायिका की छवि को तोड़ उन्हें बहुमुखी प्रतिभा वाली एक गायिका के रूप में स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उन्होंने रवि, खय्याम, शंकर जयकिशन और आर.डी. बर्मन जैसे प्रख्यात संगीतकारों के साथ काम किया। बर्मन ने उन्हें उनकी बड़ी बहन व मशहूर गायिका लता मंगेशकर की छांव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आशा ने बर्मन के साथ 'दम मारो दम' ('हरे रामा, हरे कृष्णा'), 'महबूबा महबूबा' ('शोले'), 'मेरा कुछ सामान' ('इजाजत'), 'पिया तू अब तो आजा' ('कारवां') और 'चुरा लिया है तुमने' ('यादों की बारात') जैसे सुरीले गीत दिए। आशा कहती हैं, "पंचम (बर्मन) में यह अनूठा गुण था कि वह प्रत्येक कलाकार को सहज बना उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करा लेते थे। वह जानते थे कि मैं गाने को किस तरह से अधिक असरदार बना सकती हूं।"
आशा ने असमिया, बांग्ला, गुजराती, हिंदी, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, उर्दू, अंग्रेजी, रूसी, चेक, नेपाली और मलय सहित 18 भाषाओं में गीत गाए हैं। जब 80 के दशक में 'उमराव जान' में उनके 'दिल चीज क्या है', 'इन आंखों की मस्ती' और 'ये क्या जगह है दोस्तों' जैसे गीत आए तो उन्होंने सभी को रोमांचित कर दिया। उनका फिल्मी तरानों का सफर आज भी जारी है।


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