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    बर्लिन फिल्म महोत्सव में भारतीय फिल्मों की धूम

    By Neha Nautiyal
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    बर्लिन के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शन के लिए 'माई नेम इज खान", 'पीपली लाइव" और 'मंथन" सहित आठ भारतीय फिल्मों को चुना गया है। एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जो भारतीय फिल्मों पर केंद्रित नहीं है उसमें इतनी सारी भारतीय फिल्मों का शामिल किया जाना एक सपने के सच होने जैसा है।

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    महोत्सव की 60वीं वर्षगांठ पर बॉलीवुड और कई भाषाओं की फिल्मों को प्रदर्शन के लिए चुना गया। महोत्सव के विभिन्न खण्डों में इन फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। यूरोपीय फिल्म बाजार में भी कई भारतीय फिल्में हैं। बर्लिनेल महोत्सव के समानांतर इन फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है। महोत्सव में करीब 100 भारतीय शामिल हुए हैं। यहां प्रदर्शन के लिए चुनी गई फिल्मों में करन जौहर की 'माई नेम इज खान", देव बेनेगल की 'रोड, मूवी', अनुशा रिजवी की 'पीपली लाइव', लक्ष्मीकांत शीटगांवकर की 'पाल्टाडाचो म्युनिस' (कोंकणी), उमेश कुलकर्णी की 'विहिर' (मराठी), कौशिक गांगुली की 'अरेक्ती प्रेमर गल्पो' (बांग्ला), श्याम बेनेगल की 'मंथन', सत्यजीत रे की 'चारुलता' और मधुश्री दत्त की 'सिनेमा सिटी' शामिल हैं।

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    इसके अतिरिक्त भारतीय फिल्म निर्देशक श्रीधर रंगायन को टेडी क्विर फिल्म अवार्ड जूरी में शामिल किया गया है। यह जूरी महोत्सव की श्रेष्ठ फिल्मों को एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्चुअल और ट्रांसजेंडर) संदर्भ में पुरस्कृत करती है। फिल्म 'माई नेम इज खान' का यहां जोरदार स्वागत हुआ। देव बेनेगल की फिल्म 'रोड, मूवी' 14 वर्ष से अधिक आयु के युवा किशोरों के लिए प्रदर्शित की गई। बेनेगल ने आईएएनएस से कहा, "मैं अपनी फिल्म को बर्लिन में देखकर रोमांचित हूं -मैं सपना देख रहा हूं।" आमिर खान के निर्माण में बनी फिल्म 'पीपली लाइव' भारत में किसानों की आत्महत्या पर एक शानदार व्यंग्य है।

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