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    चिठ्ठी ना कोई संदेश..कहां तुम चले गये?

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    जिंदगी के फलसफों को अपने सुरीले अंदाज में पिरोने वाले गजल सम्राट जगजीत सिंह ने आज जिंदगी को अलविदा कह दिया और अपने पीछे छोड़ गये गजल गायिकी का ऐसा साम्राज्य जिसे अब कौन संभालेगा ये कह पाना बेहद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। क्योंकि संगीत के उस मुकाम पर जहां पहुंचना भी किसी के वश में नहीं होता वहां के वो सरताज थे।

    दिल, मुहब्बत, जज्बात, जुदाई को सुरों में कहना कोई जगजीत सिंह से सीखे। उनके संगीत से जुड़ा हर सदस्य आज भीगी पलकों से उन्हें याद कर रहा है और उन्ही में आवाज में कह रहा है कि ... कहां तुम चले गये ?

    संगीत के पुरोधा ने अपने शब्दों से अपने हर गीत को अमर कर दिया...जिसको सुनने के बाद हर गीत में लगता था जैसे उनके अरमान निकलते हों। होंठों पर मुस्कुराट और आंखों में नमी की बात करने वाले जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था। उनके पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे। विकिपीडिया के मुताबिक जगजीत सिंह के बचपन का नाम जीत था।

    करोड़ों सुनने वालों के चलते सिंह साहब कुछ ही दशकों में जग को जीतने वाले जगजीत बन गए। शुरूआती शिक्षा गंगानगर के खालसा स्कूल में हुई और बाद पढ़ने के लिए जालंधर आ गए। डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और इसके बाद कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। उन्हें पहला ब्रेक गुजरात फिल्म के लिए मिला। लेकिन उसके बाद संगीत के जूनन ने उन्हें मायानगरी मुंबई पहुंचा दिया, जहां उन्होंने अपने सुरों से वो इबादत लिखी जिसे मिटा पाना नामुमकीन है। अपनी आवाज से लोगों के बीच पहचान बनाने वाले जगजीत सिंह 1969 में मशहूर गायिका चित्रा से प्रेम विवाह रचाया।

    अर्थ, प्रेमगीत, लीला, सरफरोश, तुम बिन, वीर जारा ये वो फिल्में हैं जिन्होंने उनको हिंदी सिनेमा जगत पर शिखर पर पहुंचाया। लेकिन अपने स्टेश शो के जरिये उन्होंने उर्दू से भरी गजलों को आम आदमी की आवाज बना दिया।

    फिल्मी सितारों को ही नहीं, बल्कि अटल बिहारी जैसे कवि की रचना गाकर जगजीत सिंह ने ये जता दिया कि वो केवल गीतकारों के गीत ही नहीं गा सकते हैं। पंजाबी, बंगाली, गुजराती, हिंदी और नेपाली भाषाओं में गाना गाने वाले जगजीत सिंह को पद्मश्री और पद्मविभूषण से नवाजा जा चुका है। अपने जवान बेटे को एक सड़क दुर्घटना में खो देने का गम उनकी गजल और रचनाओं में अक्सर सुना जाता था।

    संगीत को पूजने वाले जगजीत सिंह के जाने से पूरा देश दुखी हैं। हर कोई अपने संगीत सम्राट के चले जाने से स्त्ब्द्ध है। मशहूर गजल गायक रूप कुमार राठौर ने कहा है कि जगजीत सिंह के क्षति को कोई नहीं भर सकता है। अक्सर अपनी गजलों में सिंह साहब ने कहा था कि ..रूठकर हमसे कभी जब तुम कहीं जाओगे...तो हमें बहुत आओगे..आज उन्हें लोग इसी लाइन के साथ बुला रहे हैं, लेकिन अफसोस वो कहीं गुम हो गये हैं जिन्हें वापस नहीं लाया जा सकता है। लेकिन लोगों की धड़कनों में उनके आवाज की कशिश हमेशा जिंदा रहेगी।वो हमेशा अपने सुरों से हमारे बीच में रहेगें क्योंकि उनके गीतों ने उन्हें अमर कर दिया है।

    English summary
    I Miss u Jagjit singh very much says bollywood. Prominent Indian Ghazal singer Jagjit Singh passed away this morning 10 October 2011,8 am at Mumbai Leelavathy hospital after a prolonged illness.
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