3 साल पाकिस्तानी जेल में बंद था ये एक्टर, 50 की उम्र में दी हिट फिल्में, आखिरी दिनों में कंगाली ने ली जान
AK Hangal life story: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे एक्टर हुए हैं, जिन्होंने बिना हीरो बने भी दर्शकों के दिलों पर राज किया। ए. के. हंगल उन्हीं कलाकारों में से एक थे। उन्होंने अपनी शानदार एक्टिंग से यह साबित किया कि मजबूत एक्टिंग किसी भी किरदार को यादगार बना सकती है, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो।

बहुत से लोग ए. के. हंगल को नाम से ना पहचानते हों, लेकिन फिल्म 'शोले' का मशहूर डायलॉग 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई' आज भी लोगों को याद है। यह डायलॉग उन्होंने फिल्म में रहीम चाचा के किरदार में बोला था। इसी रोल ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों के बीच पहचान दिलाई।
बचपन और शुरुआती जीवन
ए. के. हंगल का पूरा नाम अवतार किशन हंगल था। उनका जन्म एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका बचपन पाकिस्तान के पेशावर में बीता, जहां से उनके जीवन की यात्रा आगे बढ़ी।
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आजादी की लड़ाई लड़ी
फिल्मों में आने से पहले ए. के. हंगल एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने 1929 से 1947 तक आजादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वामपंथी विचारधारा से जुड़े होने के कारण उन्हें कराची की जेल में लगभग तीन साल तक कैद रहना पड़ा।
50 साल की उम्र में शुरू हुआ फिल्मी सफर
जेल से रिहा होने के बाद हंगल साहब 1949 में मुंबई आए। थिएटर के जरिए एक्टिंग को निखारने के बाद उन्होंने करीब 50 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा। 1966 में आई फिल्म 'तीसरी कसम' उनकी पहली फिल्म थी।
70 और 80 के दशक के भरोसेमंद एक्टर
इसके बाद ए. के. हंगल ने 70 और 80 के दशक में लगातार शानदार काम किया। उन्होंने पिता, बुज़ुर्ग, दोस्त और मार्गदर्शक जैसे किरदार निभाए। उन्होंने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ 16 फिल्मों में काम किया और हर रोल में अपनी छाप छोड़ी।
यादगार फिल्में और सम्मान
'बावर्ची', 'गुड्डी', 'आंधी', 'कोरा कागज', 'नमक हराम', 'नरम गरम', 'शौकीन' और 'बालिका बधु' जैसी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी याद किया जाता है। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें साल 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
दर्दनाक रहे आखिरी दिन
इतनी उपलब्धियों के बावजूद ए. के. हंगल की जिंदगी के आखिरी दिन आर्थिक और सेहत से जुड़ी समस्याओं से भरा रहा। 95 साल की उम्र में वो अपने बेटे के साथ एक बदहाल घर में रहा करते थे। उनकी आर्थिक स्थिति इनती ज्यादा बिगड़ गई थी कि उनके पास दवाइयों और मेडिकल बिल भरने तक के पैसे नहीं थे। हालात तब और बदतर हो गए जब वो बाथरूम में फिसलकर गिर गए, जिसकी वजह से उनकी जांघ की हड्डी टूट गई और पीठ को भी काफी नुकसान हुआ, लेकिन उनके पास इतने भी पैसे नहीं बचे थे कि वो अपना ऑपरेशन तक करवा सकें। उनकी हालत बिगड़ती चली गई और धीरे-धीरे उनके फेफड़ों ने भी काम करना बंद कर दिया। इतनी यातनाएं सहने के बाद आखिरकार 26 अगस्त 2012 को 98 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।


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