बॉलीवुड की 'उमराव जान' रेखा कभी नायिका नहीं बनना चाहती थीं
फिल्म 'उमराव जान' के लिए नेशनल अवार्ड जीतने वाली रेखा ने कहा कि वह कभी भी अभिनेत्री बनना नहीं चाहती थीं। लेकिन अब, जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन्हें खुशी होती है कि उन्होंने अभिनय को करियर के रूप में चुना। रेखा ने कहा, "फिल्म जगत में आना मेरी पहली पसंद नहीं थी, लेकिन मैं खुश हूं कि यह हुआ। मुझे लगता है कि मैं इसके काबिल थी।
रेखा कहती हैं जो होता है वो अच्छे के लिए होता है जिसका जीता-जागता उदाहरण मेरा अभिनेत्री होना है। रेखा फिल्म निर्देशक सुभाष घई के ह्विसलिंग वूड्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट में 'सेलेब्रेट सिनेमा' महोत्सव में शिरकत करने पहुंची थीं। जहां उन्होंने अपने से जुड़ी यह खास बात लोगों से शेयर की।
मालूम हो कि भानु रेखा गणेशन ने बाल कलाकार के रूप में 1966 में फिल्मों में काम करना शुरू किया था। फिल्म 'खूबसूरत' और 'उमराव जान' में उनके अभिनय को काफी सराहा गया था और 'उमराव जान' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था।
रेखा ने कहा, "मुझे एक के बाद एक फिल्मों के प्रस्ताव मिल रहे थे। हर तरह की भूमिका के प्रस्ताव मेरे पास आ रहे थे। मैंने किस्मत समझकर फिल्में स्वीकार करना जारी रखा। मुझे जो कुछ भी मिला, मैंने उसका सम्मान किया। मैंने काम का मूल्य समझा, अपने काम का लुत्फ उठाया और मेरे साथ दुनिया ने भी इसका लुत्फ लिया।
रेखा जल्द ही अभिषेक कपूर की फिल्म 'फितूर' में नजर आएंगी। रेखा जितनी ज्यादा ऑनस्क्रीन ओपन हैं उससे कहीं ज्यादा वो रीयल लाइफ में बंद हैं। उनके जीवन के बहुत सारे पहलू ऐसे हैं जिनके बारे दुनिया जानना चाहती है लेकिन रेखा हमेशा खामोश और पहेली बनी रहती हैं।


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