INTERVIEW: बॉक्स ऑफिस, स्टारडम, बॉयोपिक फिल्में और सोशल मीडिया पर रणबीर कपूर-'लाइफ को मिस्ट्री रखना चाहता हूं'

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Ranbir Kapoor: "मैंने तो रॉम- कॉम फिल्मों से रिटायरमेंट ले लिया था, तू झूठी मैं मक्कार काफी सही वक्त पर मेरे पास आई", ये कहते हैं अभिनेता रणबीर कपूर, जिन्हें आज के समय में हिंदी फिल्मों के सबसे दमदार कलाकारों में गिना जाता है। लव रंजन के निर्देशन में बनी रोमांटिक- कॉमेडी फिल्म तू झूठी मैं मक्कार 8 मार्च 2023 को रिलीज होने वाली है, जिसमें रणबीर के साथ दिखेंगी श्रद्धा कपूर।

इस साल रणबीर की दो फिल्में आ रही हैं- तू झूठी मैं मक्कार और एनिमल। अभिनेता ने कहा कि इन दो फिल्मों के बाद वो एक छोटा सा ब्रेक लेंगे और कुछ समय अपनी बेटी राहा के साथ गुजारेंगे। पिता बनने के अनुभव को शेयर करते हुए रणबीर ने कहा, "मैजिकल, बहुत खास रहा है। हालांकि मुझे पिता बने फिलहाल केवल साढ़े तीन महीने हुए हैं, लेकिन मैं इस जर्नी को लेकर एक्साइटेड हूं।"

[श्रद्धा कपूर इंटरव्यू]

तू झूठी मैं मक्कार की रिलीज से पहले, रणबीर कपूर ने फिल्मीबीट के साथ बातचीत की है, जहां उन्होंने बॉलीवुड में 15 साल पूरे करने के अनुभव से लेकर आलिया भट्ट के साथ शादी, स्टारडम और अपने करियर पर खुलकर बातें की। स्टारडम पर बात करते हुए रणबीर ने कहा कि, "मुझे नहीं लगता है कि मैं वो एक्टर हूं जो सिर्फ अपने बूते पर बड़ी बॉक्स ऑफिस ओपनिंग देता हो। मेरी फिल्मों के लिए कंटेंट बहुत मायने रखता है।"

यहां पढ़ें इंटरव्यू से कुछ प्रमुख अंश-

Q. सौरभ गांगुली की बॉयोपिक से जुड़ी खबरें लगातार आ रही हैं। कितनी सच्चाई है?

Q. सौरभ गांगुली की बॉयोपिक से जुड़ी खबरें लगातार आ रही हैं। कितनी सच्चाई है?

A. दादा (सौरव गांगुली) इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि लोग उन्हें भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्यार करते हैं। लेकिन बायोपिक फिल्में पेचीदा होती हैं। जब आप एक फिल्म बना रहे होते हैं, तो इस बात पर खास ध्यान रखना होता है कि आप उनके जन्म से लेकर अब तक के पूरे जीवन को कैसे संजो रहे हैं। उनकी उपलब्धियां, उनका निजी जीवन, उनके संघर्ष.. सब कुछ। हालांकि, अगर मुझे बॉयोपिक के लिए अप्रोच किया जाएगा, तो मैं स्पष्ट रूप से इस पर विचार करूंगा।

Q. किशोर कुमार की बॉयोपिक की भी चर्चा थी?

A. किशोर कुमार की बॉयोपिक पर तो हम 11 साल से बात कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ फाइनल नहीं है। अभी भी उस पर काम चल रहा है। जो अफवाहें हैं कि मैं कास्ट हो चुका हूं, तो मैं बता दूं कि ऑफिशियली ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

Q. तू झूठी मैं मक्कार से कैसे जुड़ना हुआ?

Q. तू झूठी मैं मक्कार से कैसे जुड़ना हुआ?

A. मैंने लव रंजन की फिल्म प्यार का पंचनामा 2 फ्लाइट में देखी थी। उसके बाद मैंने खुद लव को मैसेज किया था। इसके पहले मैंने कभी किसी डायरेक्टर को मैसेज नहीं किया था कि मैं आपके साथ काम करना चाहता हूं। मुझे प्यार का पंचनामा 2 बहुत दिलचस्प लगी थी, उसका टोन, उसकी दुनिया.. इसीलिए मुझे लगा कि हमें साथ काम करना चाहिए। फिर कुछ हफ्ते बाद हम ताज होटल में मिले थे, जहां कई फिल्मों की स्क्रिप्ट्स व आइडियाज पर डिसकशन भी किया। हमने एक स्क्रिप्ट भी लॉक की थी, जिसमें अजय सर (अजय देवगन) भी थे, लेकिन फिर डेट्स की वजह से वो फिल्म आगे बढ़ गई। उसी दौरान लव ने मुझे ये आइडिया सुनाया था। सच कहूं तो उस वक्त मैं रॉम- कॉम जॉनर से अलग जाने की सोच रहा था। मुझे लगता है कि रॉम कॉम एक बहुत खतरनाक जॉनर है क्योंकि वर्ल्डवाइड इसका क्रेज खत्म हो रहा है। साथ ही जब भारत में हम रॉम कॉम बनाते थे तो कहीं ना कहीं वेस्टर्न कल्चर से बहुत ज्यादा प्रभावित होते थे। जबकि मेरे लिए परफेक्ट रोमांटिक कॉमेडी वो है, जो आपके कल्चर से जुड़ी हो। और मेरे हिसाब से लव रंजन उस बात का ख्याल रखते हैं। मुझे याद है जब मैंने लव के साथ फिल्म साइन की थी, उस वक्त पापा (ऋषि कपूर) बहुत खुश थे कि मैं लव के साथ फिल्म करने जा रहा हूं। फिर पापा को जब इस बात का पता चला कि यह फिल्म लव स्टोरी नहीं बल्कि अजय सर के साथ एक्शन है, तो उन्होंने मुझे कॉल कर खूब डांट लगाई थी। वो कहने लगे, मैं खुश हूं कि तू लव रंजन के साथ फिल्म कर रहा है, वो अच्छी फिल्म बनाता है। लेकिन तुम रोमांटिक फिल्मों में माहिर डायरेक्टर के साथ अलग जॉनर की फिल्म क्यों बनाना चाहते हो? उसके साथ वो फिल्म बना न, जिसमें वो एक्सपर्ट है। बाद में जब उन्हें 'तू झूठी' के बारे में पता चला, तो वो बहुत खुश हुए थे।

Q. आपको एफर्टलेस एक्टर माना जाता है। आपके कई को-स्टार्स ने भी ये बात कही है। आप अपने प्रोसेस पर क्या कहना चाहेंगे?

Q. आपको एफर्टलेस एक्टर माना जाता है। आपके कई को-स्टार्स ने भी ये बात कही है। आप अपने प्रोसेस पर क्या कहना चाहेंगे?

A. मुझे लगता है कि एफर्सलेट दिखने के लिए मैं बहुत एफर्ट करता हूं। मुझे नहीं लगता कि एक्टिंग आसान काम है। हर फिल्म नए चैलेंज के साथ आती है। आप सोचोगे कि रॉम कॉम फिल्म है तो ये आसान होगी, तो ऐसी बात नहीं है। इस तरह की फिल्में काफी मुश्किल होती हैं। खासकर लव रंजन की अपनी एक टोन है, जिसमें वो स्क्रिप्ट लिखते हैं, आम तौर पर वो टोन हम हिंदी फिल्मों में नहीं देखते हैं। खैर, हां.. अपनी फिल्मों पर मैं बहुत मेहनत करता हूं, अपने सीन्स पर, अपने गानों पर। आज तक मैंने अपने करियर में जितनी भी फिल्में हैं, कुछ बड़ी हिट रही हैं, कुछ नहीं चली हैं, लेकिन जैसा प्यार मुझे 'ये जवानी है दिवानी' के लिए मिला, वो कमाल का रहा। ये प्यार रॉम- कॉम फिल्मों से ही मिलता है। ऑडियंस महसूस करते हैं कि ये फिल्म में ऐसा है तो रियल लाइफ में भी ऐसा होगा और इसीलिए वो आपसे ज्यादा प्यार करने लगते हैं। लेकिन हां, मैं अभी भी ये कहूंगा ये सबसे मुश्किल जॉनर है।

Q. 15 सालों के सफर में जिस तरह की फिल्में आपने की हैं, या जो रिस्क लिए हैं, उसे देखकर कितनी संतुष्टि या खुशी मिलती है?

A. संतुष्ट होने का तो नहीं पता, लेकिन हां मुझे इस बात की खुशी है कि पिछले 15 सालों में जो भी 18-19 फिल्में मेरी रिलीज हुई हैं, वो सब सिर्फ मेरी च्वॉइस रही हैं। इसीलिए यदि सफलता मिली तो वो भी मेरी वजह से मिली, असफलता मिली, तो वो भी मेरी वजह से मिली। मैंने कभी किसी प्रेशर में आकर काम नहीं किया है, या कभी ये सोचकर कि ये बड़े डायरेक्टर हैं, ये बड़ा प्रोडक्शन हाउस है। मैंने अपनी असफलताओं से बहुत सीखा है और सक्सेस को मैंने कभी सिर पर नहीं चढ़ाया। मेरे अब तक के करियर के लिए मेरा दृष्टिकोण बहुत ही संतुलित रहा है। खैर, अभी रास्ता बहुत लंबा है और मुझे बहुत आगे जाना है। लेकिन मुझे बहुत खुशी है कि मैं उन लोगों के साथ काम कर पा रहा हूं, जो मुझे प्रेरित करते हैं। जैसे लव रंजन हैं, मुझे लगता है कि मैं इनके साथ बहुत अच्छा क्रिएटिव रिश्ता साझा करता हूं। जब हम बैठते हैं तो हम फिल्मों के बारे में बात करते हैं, अपने सपनों के बारे में बात करते हैं, हम तो हर साल आने वाली फिल्मों के प्रेडिक्शन भी करते हैं कि कौन कैसा बिजनेस करेगी। फिर साल खत्म होने के बाद हम टैली करते हैं कि किसकी कितनी प्रेडिक्शन सही निकली।

Q. अपनी या किसी दूसरी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस से प्रभावित होते हैं?

Q. अपनी या किसी दूसरी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस से प्रभावित होते हैं?

A. हां, बॉक्स ऑफिस से मैं थोड़ा प्रभावित तो होता हूं। मुझे नहीं लगता है कि मैं वो एक्टर हूं जो सिर्फ अपने बूते पर बड़ी ओपनिंग देता हो। मेरी फिल्मों के लिए कंटेंट बहुत मायने रखता है। मेरी 18-19 फिल्मों में से कुछ ने बहुत शानदार ओपनिंग दी है, जबकि कुछ धीरे धीरे आगे बढ़ी हैं। तो यहां काफी तरह के फैक्टर होते हैं। मैं उस भुलावे में नहीं रहता हूं कि आप मुझे साइन करोगे तो आपकी फिल्म बंपर ओपनिंग देगी। नहीं.. आपके फिल्म का कंटेंट अच्छा होना चाहिए, गाने अच्छे होने चाहिए.. इतना सही है, तो फिर लोग मुझे भी देखने आ जाएगें।

Q. श्रद्धा कपूर के साथ आपकी केमिस्ट्री को लेकर काफी चर्चा हो रही है। उनके साथ कैसा तालमेल रहा?

A. मैं श्रद्धा के साथ काम करने को लेकर बहुत एक्साइटेड था। मैं हमेशा से उसकी काम का फैन रहा हूं। दरअसल, मैं उसे बचपन से जानता हूं। मुझे याद है जब उसके पापा कश्मीर और ऊटी में शूट कर रहे थे, तो श्रद्धा, मैं, मेरी बहन और श्रद्धा का भाई होटल में बहुत खेला करते थे। हम सब फिल्मी बच्चे थे, तो हम हिंदी फिल्म के गानों पर खूब डांस किया करते थे। श्रद्धा के साथ मेरा रिश्ता इतना पुराना है। साथ ही मुझे लगता है कि हम दोनों ही क्रिएटिव एनर्जी बहुत एक सी है। वो बहुत अनुशासित है, बहुत मेहनती है और एक बेहतरीन को-स्टार है। ऐसा नहीं है कि वो सेट पर ओवर फ्रैंडली रहती है। साथ ही मुझे लगता है कि जिस तरह की ये फिल्म है, उसके लिए श्रद्धा परफेक्ट है क्योंकि वो इस टोन को समझती है। मैं बहुत खुश हूं कि लव ने इस फिल्म के लिए उसे चुना।

Q. आपने शमशेरा के साथ एक्शन जॉनर में कदम रखा था, लेकिन फिल्म चली नहीं। एनिमल को लेकर फिक्र है?

Q. आपने शमशेरा के साथ एक्शन जॉनर में कदम रखा था, लेकिन फिल्म चली नहीं। एनिमल को लेकर फिक्र है?

A. मुझे नहीं लगता कि किसी फिल्म के हिट या फ्लॉप होने की वजह से मेरी फिल्मों की च्वॉइस में कोई फर्क आएगा। आपको कोई फिल्म ऑफर होती है और आप उसे हां करते हैं.. तो उसके पीछे कई वजहें होती हैं। शमशेरा में मैंने जो मेहनत की थी, उस पर मुझे बहुत गर्व है, वह फिल्म भले ही अच्छी नहीं निकली हो, लेकिन मुझे पता है कि जब हम उन 130 दिनों की शूटिंग कर रहे थे, तब मैंने वास्तव में इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। यह आसान शूट नहीं था। मैं हमेशा मानता हूं कि भगवान कड़ी मेहनत को पहचानता है। आप बस अपने काम पर ध्यान दें। फिल्में चलेंगी, कभी नहीं चलेंगी, लेकिन बतौर एक्टर आप अपना बेस्ट देते रहो।

Q. लेकिन रॉम- कॉम जॉनर में लोगों ने आपको इतना प्यार दिया है। फिर आप उससे क्यों दूरी बनाना चाहते हैं?

A. हां लोगों ने मुझे रॉम- कॉम जॉनर में स्वीकारा है। लेकिन वो भी एक जाल ही है। यदि आप वही करते रहे जाएंगे तो ऑडियंस भी आपसे बोर हो जाएगी और आपके पास भी उन्हें नया कुछ दिखाने को नहीं रहेगा। 'तू झूठी मैं मक्कार' काफी सही समय पर मेरे पास आई। मैं तो रॉम- कॉम फिल्मों से रिटायर हो चुका था, मैं इस जॉनर की फिल्में कर ही नहीं रहा था क्योंकि मैंने बहुत सारे स्क्रिप्ट सुने थे लेकिन कुछ बात नहीं बन रही थी। कुछ मजेदार नहीं आ रहा था।

Q. सोशल मीडिया पर नहीं होने की वजह से आप पब्लिक में ओवर एक्सपोज्ड नहीं है। क्या आप मानते हैं कि आपके स्टारडम के पीछे ये एक बड़ी वजह है?

Q. सोशल मीडिया पर नहीं होने की वजह से आप पब्लिक में ओवर एक्सपोज्ड नहीं है। क्या आप मानते हैं कि आपके स्टारडम के पीछे ये एक बड़ी वजह है?

A. हां, मैं भी ये मानता हूं। मेरी हमेशा यही कोशिश रही है कि मैं सोशल मीडिया पर न रहूं क्योंकि मैं चाहता था कि मेरी लाइफ में एक मिस्ट्री बनी रहे। मैं थोड़े पुराने विचारों वाला भी हूं। साथ ही मैं एक फिल्मी परिवार से आता हूं तो मैंने देखा है कि मिस्ट्री क्यों जरूरी है। खैर, ये मेरा विचार था, क्योंकि आज के समय में इस वजह से आप बहुत कुछ खो भी देते हैं। मुझे पता है कि मैं बहुत सारे एंडोर्समेंट और पैसे कमाने के बहुत सारे मौके खो देता हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मेरा फैसला मेरे बेहतरी के लिए काम करेगा। मेरे करियर में लंबी उम्र होगी और जब लोग आएंगे और मेरी फिल्में देखेंगे, तो वे मेरे किरदार से जुड़ सकते हैं उनमें अविश्वास की भावना होगी। यह मेरी विचार प्रक्रिया थी, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं इसमें सफल हूं या नहीं।

Q. आपकी नजर में स्टारडम की क्या परिभाषा है?

A. स्टारडम को परिभाषित करने के लिए मेरे पास दो कहानी है। अगर मुझे स्टारडम की बात करनी है तो मैं लता मंगेशकर के साथ अपने इस एक अनुभव के बारे में बात करूंगा। मैं मैरियट कॉफी शॉप में देर रात खाना खा रहा था। मैं तब अभिनेता नहीं था। वहां बहुत सारे लोग बैठे थे और मुझे याद है कि सभी ने लता जी को लिफ्ट से उतरकर हॉल के एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हुए देखा। वह एक ऐसा पल था कि उस कॉफी शॉप में बैठे सभी लोग बस खड़े हो गए। किसी ने लता जी को परेशान नहीं किया, कुछ नहीं बोला, बस सम्मान के कारण वे खड़े होने लगे। लता जी जब वहां से गुजरीं तो उन्होंने सिर्फ नमस्ते किया और दूसरी तरफ चली गईं। मेरे लिए यही स्टारडम है। वह इसकी मांग नहीं करती हैं। और मुझे एक और कहानी याद है जो मैंने अपने दादाजी राज कपूर के बारे में सुनी थी। जब वे अपनी एक फिल्म के प्रीमियर के लिए रूस गए थे, और वे थिएटर से बाहर आए और वहां हजारों रूसी उनका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने लोगों को देखकर हाथ हिलाया और अपनी कार में बैठ गए। लेकिन वहां मौजूद भीड़ ने उनकी कार उठाई और वे उन्हें कंधों पर उठाकर होटल की ओर चल पड़े। मुझे नहीं पता कि उस तरह का स्टारडम अब भी मौजूद है या नहीं।

Q. राज कपूर की बॉयोपिक की भी काफी चर्चा थी। उस बारे में कोई अपडेट?

Q. राज कपूर की बॉयोपिक की भी काफी चर्चा थी। उस बारे में कोई अपडेट?

A. उनकी बॉयोपिक करना भी थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि उनकी जिंदगी भी थोड़ी कंट्रोवर्शियल रही है। यहां हमें उनकी कहानी को पूरी ईमानदारी से रखनी होगी, हम उसे प्रोपेगैंडा फिल्म नहीं बना सकते हैं। मेरी बड़ी इच्छा है कि मैं उनकी बायोपिक बनाऊं लेकिन मैं एक अच्छा राइटर नहीं हूं, तो यही वजह है फिलहाल स्ट्रगल कर रहा हूं। मुझे पूरा यकीन है कि यदि उनकी बायोपिक बनी, तो बहुत ग्रेट होगी।

Q. फिल्मों के चुनाव को लेकर आलिया से सलाह लेते हैं?

A. बिल्कुल, मैं आलिया की सलाह लेता हूं। बता दूं, वो एक ट्रेड पंडित है। वो एन्जॉय करती है ये प्रोसेस। और जहां तक सलाह लेने की बात आती है तो जब आलिया जैसे बेहतरीन कलाकार के साथ आप रहते हैं तो किसी भी तरह का फीडबैक मेरे लिए बहुत कीमती है। वो मेरी चीयरलीडर भी है, लेकिन वो मुझे हमेशा सच्ची सलाह देती है।

Q. आजकल फिल्मों के बॉक्स ऑफिस को लेकर काफी बातें होती हैं। बतौर एक्टर एक जिम्मेदारी महसूस कर रहे हैं?

Q. आजकल फिल्मों के बॉक्स ऑफिस को लेकर काफी बातें होती हैं। बतौर एक्टर एक जिम्मेदारी महसूस कर रहे हैं?

A. हां, मुझे लगता है कि ये हम सबकी जिम्मेदारी है। कोविड के बाद इंडस्ट्री भी एक करेक्शन फेज़ से गुजर रही है। सभी इस बारे में सोच रहे हैं और सब बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हैं कि ऑडियंस को वापस थियेटर्स तक ला सकें। पिछले साल भी कुछ बहुत अच्छी हिंदी फिल्में आईं। हमने द कश्मीर फाइल्स, गंगूबाई, भूल भुलैया 2, दृश्यम 2, ब्रह्मास्त्र जैसी फिल्में देखीं। वहीं, अब पठान ने शानदार प्रदर्शन किया है। तो हम धीरे धीरे वापसी कर रहे हैं। सबकी कोशिश हमेशा यही रही है कि ऑडियंस को ऐसा अनुभव दें कि वो थियेटर तक आएं। आज ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म हैं जहां लोग घर पर बैठकर भी फिल्में एन्जॉय कर सकते हैं, जो अच्छी बात है, लेकिन मुझे लगता है कि थियेटर जाने का अनुभव बिल्कुल अलग ही होता है और उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। तो आप यदि अच्छा कंटेंट दोगे, अच्छी कहानियां दोगे, अच्छी फिल्म बनाओगे तो दर्शक जरूर थियेटर तक आएंगे। लेकिन यदि आप बुरी फिल्म बनाओगे तो वो जमाना गया कि आपकी फिल्म ऐवरेज जाएगी। अब या तो फिल्में बहुत कमाल करेंगी या सीधे फ्लॉप रहेगी।

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