शशि कपूर एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं। शशि कपूर एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते जिसनें बॉलीवुड के 100 सालो में से 85 वर्ष का योगदान दिया है। शशि कपूर ने अपने फ़िल्मी करियर में दर्जनों फ़िल्में की हैं। इस दौरान उन्होंने कई अवार्ड भी अपने नाम किये। वर्ष 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2014 में उन्हें हिंदी सिनेमा में अवार्ड दादा साहेब फाल्के से सम्मानित किया जा चुका है।
पृष्ठभूमि
शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को बिर्टिश राज में कलकत्ता में हुआ था। वह फिल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक पृथ्वीराज कपूर के बेटे हैं। उनका असली नाम बलबीर राज कपूर है। वह राजकपूर और शम्मी कपूर के छोटे भाई हैं। शशि कपूर ने महज चार साल की उम्र में ही अभिनय की शुरुआत कर दी थी।
पढ़ाई
इन्होने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के डोन बोस्की सकूल से पूरी की।
शादी
शशि कपूर ने ब्रिटिश अभिनेत्री जेनिफर से प्रेम विवाह किया था। उनके तीन बच्चे हैं।
करियर
शशि कपूर अभिनय करियर की शुरुआत महज चाहर साल की उम्र में बटुर आकर दी थी। उन्होंने फिल्म आवारा में अपने भिा राजकपूर में टीनऐज भूमिका अदा की थी।
शशि कपूर ने गैर परम्परागत किस्म की भूमिकाओ के साथ सिनेमा के परदे पर आगाज किया था। उन्होंने सांप्रदायिक दंगो पर आधारित धर्मपुत्र में काम किया था। उसके बाद चार दीवारी और प्रेमपत्र जैसी ऑफ बीत फिल्मो में नजर आये। वे हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने हाउसहोल्डर और शेक्सपियर वाला जैसी अंग्रेजी फिल्मो में मुख्या भूमिकाये निभाई। उनके लिए एक महत्वपूर्ण साल था। इसी साल उनकी पहली जुबली फिल्म 'जब जब फूल खिले' रिलीज हुयी और यश चोपड़ा ने उन्हें भारत की पहली बहुल अभिनेताओ वाली हिंदी फिल्म 'वक्त' के लिए कास्ट किया। बॉक्स ऑफिस पर लगातार दो बड़ी हित फिल्मो के बाद व्यावहारिकता का तकाजा यह था की शशि कपूर परम्परागत भूमिकाये करे, लेकिन उनके अन्दर का अभिनेता इसके लिए तैयार नहीं था। इसके बाद उन्होंने 'ए मत्तेर ऑफ़ इन्नोसेंस' और 'प्रीटी परली जसी फिल्मे की. वहीँ हसीना मन जाएगी, प्यार का मोसम ने उन्हें एक चोकलेटी हीरो के रूप में स्थापित किया। फिल्म सिथार्थ के साथ उन्होंने अन्तराष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर अपनी मोजुदगी कायक राखी. ७० के दसक में शशि कपूर सबसे व्यस्त अभिनेताओ में से एक थे। इसी दसक में उनकी 'चोर मचाये शोर', दीवार, कभी - कभी, दूसरा आदमी और 'सत्यम शिवम् सुन्दरम' जैसी हिट फिल्मे रिलीज हुयी। में पिता पृथ्वीराज की मृत्यु के बाद शशि कपूर ने जेनिफर के साथ मिलकर पिता के स्वप्न को जरी रखने के लिए मुंबई में पृथ्वी थियेटर का पुनरूथान किया। अमिताभ बच्चन के साथ आई उनकी फिल्मो दीवार, कभी - कभी, त्रिशूल, सिलसिला, नमक हलाल, दो और दो पञ्च, शान ने भी उन्हें बहुत लोकप्रियता दिलवाई। इन्होने अपनी होम प्रोडक्सन क. 'फिल्म्वालाज' लॉन्च की।