धर्मेंद्र जीवनी

    धर्मेन्द्र हिंदी फिल्‍मों के बहुत प्रसिध्‍द अभिनेता हैं। साथ ही उन्‍होंने राजनीति में भी वही शोहरत हासिल की जिसके वे मालिक थे। धर्मेंद्र ने 2004 में बीजेपी के टिकट पर राजस्‍थान के बीकानेर से चुनाव लड़े और उसमें विजय हासिल कर 5 साल ताक वहां की जनता का लोकसभा में प्रतिनिधित्‍व किया। 

    पृष्‍ठभूमि:  
             धर्मेन्द्र का जन्म 8 दिसम्बर 1935 को फगवाडा, पंजाब में हुआ था। 

    पढाई:  
         धर्मेन्द्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई फगवाडा के आर्य हाई स्कूल एवं रामगढ़िया स्कूल से की है। 
      
    शादी:  
        धर्मेन्द्र ने दो शादियां की हैं। उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर हैं। जिनके तीन बच्चे हैं- सनी देओल,बॉबी देओल और बेटी अजिता देओल। उनके दोनों बेटे हिंदी सिनेमा में फिल्म अभिनेता हैं, जबकि बेटी शादी के बाद विदेश में रहती हैं। उनकी दूसरी पत्नी हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी हैं।  उनकी दो बेटियां हैं। इशा और अहाना देओल, उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। 

    करियर:  
        रोल चाहे फिल्म सत्यकाम के सीधे सादे ईमानदार हीरो का हो, या फिर फिल्म शोले के एक्शन हीरो का हो चाहे फिल्म चुपके चुपके के कॉमेडियन हीरो का, सभी को सफलता पूर्वक निभा कर दिखा देने वाले धर्मेंद्र सिंह देओल अभिनय प्रतिभा के धनी कलाकार हैं। सन् 1960 में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से अभिनय की शुरुआत करने के बाद पूरे तीन दशकों तक धर्मेंद्र चलचित्र जगत में छाये रहे। उन्‍होंने केवल मेट्रिक तक ही शिक्षा प्राप्त की थी। स्कूल के समय से ही फिल्मों का इतना चाव था कि दिल्लगी (1949) फिल्म को 40 से भी अधिक बार देखा था। धर्मेंद्र अक्सर क्लास में पहुँचने के बजाय सिनेमा हॉल में पहुँच जाया करते थे। वह फिल्मों में प्रवेश के पहले रेलवे में क्लर्क थे और लगभग सवा सौ रुपये की तनख्वाह पर काम करते थे। 19 साल की उम्र में ही प्रकाश कौर के साथ उनकी शादी भी हो चुकी थी और अभिलाषा थी बड़ा अफसर बनने की।

    फिल्मफेयर के एक प्रतियोगिता के दौरान अर्जुन हिंगोरानी को धर्मेंद्र पसंद आ गये और हिंगोरानी जी ने अपनी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे के लिये 51 रुपये साइनिंग एमाउंट देकर उन्हें हीरो की भूमिका के लिये अनुबंधित कर लिया। पहली फिल्म में नायिका कुमकुम थीं। पहली फिल्म से कुछ विशेष पहचान नहीं बन पाई थी इसलिये अगले कुछ साल संघर्ष के बीते। संघर्ष के दिनों में जुहू में एक छोटे से कमरे में रहते थे। फिल्म अनपढ़ (1962), बंदिनी (1963) तथा सूरत और सीरत (1963) से लोगों ने उन्हें जाना, पर स्टार बने ओ.पी. रल्हन की फिल्म फूल और पत्थर (1966) से। धर्मेंद्र ने 200 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है, कुछ अविस्मरणीय फिल्में हैं अनुपमा, मँझली दीदी, सत्यकाम, शोले, चुपके चुपके आदि।

    धर्मेन्द्र अपने स्टंट दृश्य बिना डुप्लीकेट की सहायता के स्वयं ही करते थे। धर्मेंद्र ने चिनप्पा देवर की फिल्म मां में एक चीते के साथ सही में फाइट किया था। 
     
    पुरस्‍कार: 
           धर्मेंद्र ने अपने बेहतरीन अभिनय के दम पर कई पुरस्‍कार प्राप्‍त किया है। उन्‍हे फिल्‍मफेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्‍मानित किया गया है। इसके अलावा वह भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से भी सम्‍मानित किये जा चुके हैं। 
     
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