अनुराधा पौडवाल जीवनी

    अनुराधा पौडवाल भारतीय हिन्दी सिने जगत की सबसे प्रतिभाशाली गायिकाओं मे से एक हैं। हिंदी सिनेमा में उन्हें गायकी के योगदान के लिए कई सारे पुरुस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। अनुराधा एकमात्र ऐसी गायिका थीं जो मंगेशकर बहनों को टक्कर देने की क्षमता रखती थीं।
     
    पृष्‍ठभूमि
    अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को हुआ था। 

    शादी
    अनुराधा पौडवाल की शादी दिवंगत अरुण पौडवाल से हुई थी। उनके एक बेटा आदित्य पौडवाल और बेटी कविता पौडवाल है।
    बेटा आदित्य पौडवाल का 12 सितम्बर 2020 को महज 35 साल की उम्र में किडनी की दिक्कत से निधन हो गया। 

    करियर
    अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1973 में फिल्म अभिमान (अमिताभ बच्चन, जया बच्चन) से की थी, जिसमे उन्होने एक श्लोक गीत गया था। 1976 में उन्हे कालीचरण मे गाने का मौका मिला पर उनके एकल गाने की शुरुआत हुई फिल्म आप बीती (हेमा मालिनी, शशि कपूर) से। इस फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया जिनके साथ अनुराधा ने और भी कई प्रसिद्ध गाने गाए। उन्होने और संगीतकारों (राजेश रोशन, जे देव, कल्याणजी आनांदजी) के साथ भी अच्छी जोड़ी बनाई। अनुराधा ने कभी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण नही लिया ये कहते हुए की उन्होने कई बार कोशिश की पर बात नही बनी। उन्होने लताजी को सुनते सुनते और खुद घंटो अभ्यास करते करते ही अपने सुर बनाए।

    अनुराधा को फिल्म हीरो के गानो की सफलता के बाद लोकप्रियता मिली और उनकी गिनती शीर्ष गायिकाओं में की जाने लगी| इस फिल्म मे उन्होने लक्षिकांत-प्यारेलाल के साथ जोड़ी बनाई। हीरो की सफलता के बाद इस जोड़ी ने कई और फिल्मों मे सफल गाने दिए जैसे मेरी जंग, बटवारा, राम लखन और आखरी में तेज़ाब। इसके बाद उन्होने टी-सीरीज़ के गुलशन कुमार के साथ हाथ मिलाया और कई नये चेहरों को बॉलीवुड में दाखिला दिलाया। इनमे से कुछ हैं उदित नारायण, सोनू निगम, कुमार सानू, अभिजीत, अनु मलिक और नदीम श्रवण।
     
    अनुराधा पौडवाल को अपनी सफलता के साथ कुछ विवादों का भी सामना करना पड़ा। उनके पति अरुण की मृत्यु के बाद उनके और गुलशन कुमार के रिश्तों पर अफवाहें उड़ने लगीं वहीं अपनी सफलता के चरम पर उन्होने सिर्फ़ टी-सीरीज़ के साथ काम करने का एलान कर दिया जिसका फायदा अल्का याग्निक को मिला। अनुराधा पौडवाल ने फिल्मों से हटकर भक्ति गीतों पर ध्यान देना शुरू किया और इस क्षेत्र में बहुत से सफल भजन गाए। कुछ समय तक काम करने के बाद उन्होने एक विश्राम ले लिया और 5 साल बाद फिर पार्श्व गायन में आ गयीं हालाँकि उनका लौटना उनके लिए बहुत सफल साबित नही रहा। 

    पुरस्‍कार
    अनुराधा पौडवाल को संगीत के क्षेत्र में किये उनके बेहतरीन योगदान के लिये कई सारे पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है। उन्‍हें भारत सरकार की तरफ से साल 2017 में पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया है। इसके अलावा उन्‍हें 4 बार फिल्‍म फेयर पुरस्‍कार से और एक बार राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया जा चुका है। 
     
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