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"लोग मुझे चरसी - गंजेड़ी की बहन बोलते थे" - संजय दत्त की बहन

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संजय दत्त ने हाल ही में अपने पुराने दिनों की कड़वी यादों को खुलकर बांटा। और सब कुछ मीडिया से शेयर। ड्रग्स की आदत, एके 47 का मिलना, 1993 बम ब्लास्ट में उनका रोल...सब कुछ उन्होंने खुलकर बांटा। 

इतना ही नहीं उन्होंने अपने जेल के दिनों की यादें भी बांटी। वो इतना खुलकर बोले, कि कभी कभी ये भी भूल गए कि क्या बोलना है और क्या नहीं। पर हां, ये बातें संजय दत्त ने बिल्कुल साफगोई से की।
 

Sanjay Dutt confessions

संजय दत्त ने हाल ही में अपने नशे की आदत के बारे में खुलकर बात की और बताया कि उन्हें ऐसी लत थी कि एयरपोर्ट की चेकिंग में जूते में हेरोइन छिपाकर जाते थे। दो दो दिन तक चरस के नशे में बेहोश रहते थे। 
[मेरी मां मुस्लिम थी इसलिए मेरी बहनों का रेप कर देते' - संजय दत्त] 

फिर उन्होंने अपने पापा से मदद मांगी। उनकी बहन प्रिया दत्त ने बताया कि उन पर संजय पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी थी। लोग उन्हें चरसी - गंजेड़ी की बहन कहते थे और उन्हें बहुत गुस्सा आता था। पर कुछ किया नहीं जा सकता था।

संजय ने बताया कि किसी ने कहा एके 47 चाहिए, मुझे लगा कि चला के खंडाला के पास कहीं फेंक दूंगा। ये तो सोचा ही नहीं था कि इतना बड़ा कांड हो रहा है या हो जाएगा। पूरी ज़िंदगी ही बदल गई। किसी को नशा नहीं करनी चाहिए।
[संजय दत्त की एक गलती माधुरी दीक्षित माफ नहीं कर पाईं] 

ये सब अब तो पुरानी बातें हैं लेकिन फिर भी 1993 बंबई बम ब्लास्ट के कुछ सवाल संजय दत्त का पीछा कभी नहीं छोड़ेंगे -
 

एक संजय और एक नीरजा

एक संजय और एक नीरजा

दिलचस्प है कि एक लड़की थी नीरजा, जिसकी कहानी हाल ही में लोगों ने देखी, 23 साल की उम्र में उसने लगभग 360 लोगों की जान बचाई थी और 33 साल की उम्र में संजय दत्त की एक नादानी बंबई को काला कर गई थीं...धमाकों के धुंए से! 257 लोगों की मौत के साथ!

इतने थे नादान

इतने थे नादान

संजय दत्त ने 33 साल की उम्र में बंबई बम ब्लास्ट से ठीक पहले काफी बड़ा कांड किया। ध्यान दीजिएगा संजय दत्त की उम्र उस वक्त 33 साल थी, तो क्या वो इतने नादान थे कि उन्हें समझ नहीं आया कि ऐसे वक्त में एके 56 राइफल वो किससे खरीद रहे हैं!

असलहा से राइफल तक

असलहा से राइफल तक

संजय दत्त ने अपने बयान में कहा था कि जब वो राइफल खरीद रहे तो कुछ लोगों ने उन्हें हैंड ग्रेनेड भी दिखाए। और पूछा भी कि क्या वो बारूद के गोले खरीदेंगे। इतने के बाद भी संजय ने पुलिस को इत्तिला करना ज़रूरी क्यों नहीं समझा!

257 जान गईं

257 जान गईं

संजय दत्त ने एक डीटेल छिपाई जिसका असर 12 मार्च को पूरी बंबई ने देखा जब 13 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों को जान चली गई और करीब 750 लोग घायल हो गए।

क्यों नहीं किया कुबूल

क्यों नहीं किया कुबूल

जब संजय दत्त ने राइफल खरीदी थी और उन्हें पता चला कि वही लोग ब्लास्ट के दोषी हैं तो उन्होंने इस बात को कुबूल करने की बजाय चुप रहना बेहतर समझा। जबकि उनसे पूछा गया, तब भी!

 कैसे दोस्त बनाए थे

कैसे दोस्त बनाए थे

संजय दत्त ने राइफल और उसके बाद एक गन अपने दोस्त से खरीदी थी। वो अबू सलेम से भी मिले। उन्होंने अपने घर के गराज में एक स्मगलिंग का आया माल भी रखवाया...किस तरह के लोगों से संजय दत्त की दोस्ती थी!

डर बड़ा था या फर्ज़

डर बड़ा था या फर्ज़

संजय दत्त को जब पता चला कि उनके 'दोस्तों' के पास इतनी भारी मात्रा में असलहे और बारूद है तो भी उन्होंने पुलिस को इत्तिला करना ज़रूरी नहीं समझा। जबकि बंबई पहले ही दंगों में सुलग रही थी। क्या डर एक 33 साल के आदमी के फर्ज़ से बड़ा था?

काम में कैसे लगे थे

काम में कैसे लगे थे

इतना बड़ा कांड हो जाने के बाद, 257 लोगों की जान चली जाने के बाद संजय दत्त आराम से किसी आतिश नाम की फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, मॉरीशस में! कैसे?

आज भी मुंबई के हीरो!

आज भी मुंबई के हीरो!

कहते हैं ना कि इस देश की जनता का दिल बहुत बड़ा है। तभी तो इतने कांड करने के बावजूद संजय दत्त इस देश के हीरो हैं। लोगों के हीरो हैं। मुंबई के हीरो हैं। उस मुंबई के जिसके 257 लोगों की जान उनकी एक 'नादानी' ने ली थी! क्या ये स्टारडम संजय दत्त को काटती नहीं!

English summary
Sanjay Dutt opens up on his drug addiction and 1993 bomb blasts.
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