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लता मंगेशकर से जुडी कुछ अनसुनी और रोचक बातें

भारत की स्वर कोकिला 'लता मंगेशकर' भले ही आज हम सबके बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज में गाये गए गीतों में वह आज भी जिन्दा हैं।
28 सितम्बर, 1929 इंदौर, मध्यप्रदेश में जन्मी लता जी के पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर था जो एक कुशल रंगमंचीय गायक थे। संगीत शिक्षा उन्हें विरासत में मिली थी।
महज 5 साल की उम्र में लता ने अपनी 3 बहनों आशा, ऊषा और मीना के साथ अपने पिता से संगीत सीखना शुरू किया था
लता जी का नाम पहले 'हेमा' था, मगर 5 साल बाद माता-पिता ने इनका नाम 'लता' रख दिया।
स्वर कोकिला को और जानें
1974 में उन्होंने सबसे अधिक गीत गाने का 'गिनीज़ बुक रिकॉर्ड' भी बनाया है। 
संगीत के अलावा लता जी को खाना पकाना और तस्वीरें खींचने का शौक था। 
1943 में प्रदर्शित हुई फिल्म किस्मत उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने यह फिल्म तकरीबन पचास बार तक देखी थी।
लता जी ने 27 जनवरी 1963 में दिल्ली के राम लीला मैदान में ऐ मेरे वतन के लोगों गीत गाया जिसे सुनकर उस समय के प्रधानमंत्री नेहरू जी के आँखों में आँसू आ गए।
ऐसा कहा जाता है के लताजी मानती थी के उनकी आवाज सबसे ज्यादा सायरा बानो पर अच्छी लगती है। 
1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त है।
लताजी  फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला हैं जिन्हें भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ।
लताजी को प्राप्त पुरस्कार
गाने की रिकॉर्डिंग के लिये जाने से पहले लता मंगेशकर कमरे के बाहर अपनी चप्पलें उतारती थीं वह हमेशा नंगे पाँव गाना गाती थीं।
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लताजी के विरोध प्रदर्शन के बाद साल 1959 में पहली बार फिल्मफेयर अवार्ड्स में बेस्ट प्लेबैक सिंगर की कटैगरी जोड़ी गयी
लताजी नेअपने संगीत करियर में 35 से भी ज्यादा भाषाओँ में गीत गायें हैं।  
लताजी गुलाम हैदर साहब को अपना गॉड फादर मानती थी।