Tap to Read ➤

गुल्लक सीज़न 3           | Quick Review |    4.5 स्टार

जानिए कैसी है सोनी लिव की सीरीज़ गुल्लक का नया सीज़न इस फटाफट की समीक्षा में।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
हर सीज़न के साथ बेहतर
गुल्लक का प्लॉट बेहद सटीक है - मिडिल क्लास की दिक्कतें। ऐसा मुद्दा, जो ना कम होता है, ना ही पुराना। ना बोझिल होता है और ना ही बोरिंग।
तीसरा एपिसोड अगुआ सीरीज़ की monotony को तोड़ने की कोशिश करता है वहीं चौथा एपिसोड सत्यनारायण व्रत कथा हल्का सा चूकता है। सीरीज़ को चमकाता है क्लाईमैक्स और पांचवा एपिसोड इज़्जत की चमकार।
वैभव राज गुप्ता और हर्ष मयार की भाईयों की जोड़ी है हर उस भाईयों की जोड़ी जैसी है जो एक दूसरे का खून पीने को तैयार हैं। उनकी नोंक झोंक से लेकर इमोशनल सीन आपके दिल जीत लेंगे।
परफेक्ट कास्टिंग
वैभव राज गुप्ता - हर्ष मयार
अन्नू मिश्रा - अमन मिश्रा
शांति मिश्रा - गीतांजली कुलकर्णी
गीतांजली कुलकर्णी, टिपिकल मां है जो गुस्से में जहां करण अर्जुन वाली राखी बन सकती है तो बाकी समय निरूपा राय की छवि रहती है। कुल मिलाकर पूरी मदर इंडिया।
जमील खान का किरदार ताज़ी हवा के झोंके की तरह। पुरूष प्रधान समाज में संघर्ष करता वो पुरूष जो समय के साथ बदलने की पूरी कोशिश करता है। अब चूंकि जड़ें ही पुरूष प्रधान हैं, इसलिए वो उन रूढ़ीवादी भावनाओं में बह कर गलतियां करता है लेकिन वो गलतियां क्षणिक होती है। उन गलतियों का सुधार दिल जीतता है।
संतोष मिश्रा - जमील खान
गुल्लक की
कहानी नहीं है।
क्योंकि मिडिल क्लास
परिवारों की कहानियां नहीं होती। उनके लिए हर दिन की
शुरूआत एक समस्या के साथ
होती है और दिन का अंत
समाधान के साथ।
गुल्लक में दो लोग दिल जीतते हैं।पहले हैं इस सीरीज़ के लेखक दुर्गेश सिंह और दूसरे सूत्रधार यानि कि गुल्लक, जिसकी आवाज़ बनकर शिवांकित परिहार दिल को छू लेने वाली कुछ अहम बातें कर जाते हैं।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
मिडिल क्लास आदमी, पैसा नहीं, इंसान कमाता है। खुश रहना चाहिए आदमी को। खुश रहने के लिए जो करना है करो। और इसलिए हम भी आपको ये सलाह देंगे कि खुश रहने के लिए गुल्लक देखिए।
ज़रूर देखें सीरीज़